बिहार में बेनामी संपत्ति मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई, थाई व्यवसायी ने बोधगया में दलितों से छह बीघे जमीन लिखवायी, हुई जब्त

By Prabhat Khabar Digital Desk
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कौशिक
पटना : बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर के पास मौजूद सात बीघे पांच कट्ठा जमीन को आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति के एक मामले में जब्त कर लिया है.
इसका प्लॉट नंबर 4488 और खाता संख्या 808 है. बिहार में बेनामी संपत्ति मामले में अब तक की यह सबसे बड़ी कार्रवाई है. दलितों को दी गयी सीलिंग की इस जमीन को थाईलैंड मूल के एक व्यवसायी ने भारत का फर्जी निवासी बनकर लिखवा ली थी.
आयकर विभाग की एड्जुकेटिंग ऑथोरिटी ने इस मामले में संपत्ति की तत्कालिक जब्ती का आदेश जारी कर दिया है. 90 दिन बाद अंतिम रूप से जब्ती का आदेश जारी होगा. इस जमीन का बाजार मूल्य वर्तमान में करीब 90 करोड़ रुपये आका जा रहा है. यह जमीन मूल रूप से दलित समाज के लोगों की है, जिन्हें यहां बसाया गया था और जीविकोपार्जन के लिए सालों पहले यह जमीन दी गयी थी. इस जमीन को बेचने या लीज पर किसी दूसरे को देने का अधिकार उनके पास नहीं था.
लेकिन सीलिंग की इस जमीन को 2014 में किट्टी नवानी नाम के एक व्यक्ति ने दलितों को बहला-फुसला कर फर्जी तरीके से एक ट्रस्ट के नाम पर रजिस्ट्री करवा ली थी. साथ ही इस जमीन का गलत तरीके से गया नगर निगम से दाखिल-खारिज भी करवा लिया गया था.
मामले का खुलासा होने के बाद स्थानीय थाने में उसके खिलाफ उस समय धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज किया गया था. इसके बाद से वह फरार है. किट्टी ने जिस ट्रस्ट के नाम का उपयोग इस जमीन की रजिस्ट्री कराने में किया था, उसके सदस्यों को इसकी कोई जानकारी नहीं है. इस वजह से इससे जुड़े तमाम मामलों की तफ्तीश के बाद आयकर विभाग ने इसे बेनामी संपत्ति एक्ट के तहत जब्त किया है.
मस्तीपुर गांव का बताया था मूल निवासी
किट्टी नवानी ने इस जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए अपने को बोधगया के मस्तीपुर गांव का निवासी बताते हुए संबंधित ट्रस्ट का फर्जी अध्यक्ष घोषित किया था. हालांकि, जांच में उसके थाई नागरिक होने से जुड़ा एक सर्टिफिकेट मिला है, जिसमें उसे पाकिस्तान में पैदा हुआ थाईलैंड (बैंकॉक) मूल का व्यवसायी बताया गया है.
यह सर्टिफिकेट थाईलैंड सरकार की तरफ से 10 अगस्त, 2007 को जारी किया गया है. इसके आधार पर उसके थाई नागरिक होने की बात स्पष्ट होती है. फिलहाल उसके बारे में अन्य कोई विशेष जानकारी किसी जांच एजेंसी के पास नहीं है.
इस तरह पकड़ी जालसाजी
जिस ट्रस्ट के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री करायी थी, उसके आयकर रिटर्न में इसका कोई जिक्र नहीं था, जबकि रजिस्ट्री के दस्तावेज में ट्रस्ट का उल्लेख है. आयकर ने जब जमीन से जुड़े पूरे मामले की पड़ताल शुरू की, तो पूरे मामले का खुलासा हुआ. इस मामले में जिला निबंधन विभाग और गया नगर निगम दोनों की भूमिका संदेहास्पद मालूम होती है. सीलिंग की जमीन होते हुए भी इसकी रजिस्ट्री कैसे हो गयी.
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