पुनपुन : मसौढ़ी व धनरूआ की अपेक्षा पुनपुन की स्थिति काफी हद तक ठीक थी. यहां करीब ग्यारह बजे एक ही कक्ष में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ अमीर चंद प्रसाद, डाॅ अशोक कुमार एवं दंत चिकित्सक डाॅ मनीषा बैठी थीं. तीनों चिकित्सक के पास बारी-बारी से रोगी पहुंच रहे थे. उस वक्त तक तीनों चिकित्सक कुल 103 मरीजों को ओपीडी में देख चुके थे. प्रस्तावित 32 प्रकार की दवाओं में यहां 28 प्रकार की दवा उपलब्ध थी. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ अमीर चंद प्रसाद ने बताया यहां इन तीन चिकित्सकों के अलावा और तीन चिकित्सक पदस्थापित हैं.
मरांची पीएचसी में प्रमुख दवाएं नहीं, मरीज परेशान
मोकामा. मरांची पीएचसी में प्रमुख दवाओं का अभाव है. इसको लेकर मरीजों की संख्या घट रही है. सुबह के 11 बजे तक महज पंद्रह मरीज उपचार के लिए ओपीडी पहुंचे थे. मौके पर मौजूद डॉक्टर उमाशंकर ने बताया कि सात दिनों से दर्द निवारक व खांसी की दवा नहीं है, जबकि फिलहाल बुखार से पीड़ित लोग अस्पताल पहुंंच रहे हैं.
बाहर की दवा लिखने पर मरीज आनाकानी करते हैं. इलाज के लिए पहुंचे स्थानीय लोगों ने बताया कि दवा उपलब्ध नहीं होने को लेकर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इधर, स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि एक-दो दिनों में दवाओं की किल्लत दूर हो जायेगी.
मसौढ़ी पीएचसी में 30 दवाओं में 17 मौजूद
मसौढ़ी . सुबह के दस बजे रहे थे. ओपीडी में उस वक्त तक कुल 54 मरीजों को अस्पताल में मौजूद मात्र एक आयुष चिकित्सक द्वारा देखा जा चुका था. यहां ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले मरीजों की औसतन संख्या सौ के आसपास ही रहती है. दवा काउंटर पर बैठी एक महिला कर्मी ने बताया ओपीडी के लिए प्रस्तावित 30 प्रकार की दवाओं में से फिलहाल 17 प्रकार की ही दवा उपलब्ध हैं.
निबंधन काउंटर से पता चला कि अभी तक 87 मरीजों ने ओपीडी में दिखाने का निबंधन कराया है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मसौढ़ी में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के अलावा उनकी पत्नी डॉ अंजु सिंह, महेंद्र शर्मा एवं जया शर्मा पदस्थापित हैं.
जया शर्मा डब्लूएचओ की ट्रेनिंग में गयी हैं.
धनरूआ 50 प्रकार की दवाओं में 35 ही उपलब्ध
धनरूआ . सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धनरूआ की स्थिति मसौढ़ी से भी खराब देखने को मिली. सुबह साढ़े दस बजे केंद्र पर डाॅ विनय कुमार व आयुष चिकित्सक डाॅ संजीव कुमार आलोक एक ही कक्ष व एक टेबल पर ओपीडी में मरीजों को देख रहे थे. दवा काउंटर पर बैठे कर्मी ने बताया कि ओपीडी में यहां प्रस्तावित 50 प्रकार की दवाओं में 35 प्रकार की दवा उपलब्ध है.
बताया जाता है कि धनरूआ में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ उदय प्रताप नारायण सिंह के अलावा डॉ विनय कुमार, डाॅ विभा रानी एवं डाॅ प्रतिभा कुमारी पदस्थापित हैं, लेकिन डाॅ विभा व प्रतिभा धनरूआ के बांसबिगहा व सिमहांडी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अपनी प्रतिनियुक्ति करा पटना में रहती है.
जबकि इनका केंद्र कभी नहीं खुलता. अस्पताल में मौजूद मरीजों ने बताया कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अपने कभी रोगी को नहीं देखते, एकमात्र एमबीबीएस डाॅ विनय कुमार के अलावा आयुष चिकित्सक के भरोसे यह स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है.
बाढ़ अनुमंडलीय अस्पताल में संसाधनों का अभाव
बाढ़. अनुमंडलीय अस्पताल पर दस लाख लोगों के स्वास्थ्य के देखभाल की जिम्मेदारी है. अस्पताल में संसाधनों का अभाव है. इस अस्पताल को इन दिनों रेफर करने वाले अस्पताल के रूप में देखा जा रहा है. अस्पताल में ओपीडी सुबह आठ बजे से 12 तक चलता है. सुबह 10.10 बजे एक ही डॉक्टर विनायक कुमार अस्पताल में थे.
महिला चिकित्सक करीब 10:20 में अस्पताल पहुंची. इस दौरान करीब एक सौ के आसपास महिला मरीजों की भीड़ लगी हुई थी. कुछ देर के बाद डाॅ राजेश कुमार सिन्हा अस्पताल पहुंचे. 72 बेड वाले इस अस्पताल में कुल 30 डॉक्टर पदस्थापित हैं, लेकिन वर्तमान में 10 डॉक्टर ही कार्यरत हैं .
पंडारक में खून जांच की पर्याप्त सुविधा नहीं
पंडारक. पंडारक पीएचसी में साढ़े दस बजे तक 40 मरीजों का उपचार ओपीडी में हुआ था. डॉ आनंद सिंह का कहना था कि जांच की सुविधा नहीं है. यहां महज एक्सरे किया जाता है. बाहर से खून जांच करवाने के लिए मरीज पैसे के अभाव में तैयार नहीं होते हैं. कई रोगियों को अनुमंडल अस्पताल रेफर कर दिया जाता है. अस्पताल में पांच प्रमुख दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं. स्लाइन का भी अभाव है,
खुसरूपुर. खुसरूपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर दस बजे डाॅ अरविंद कुमार सिन्हा ओपीडी में मरीज को देख रहे थे, जबकि पीएचसी के प्रभारी डाॅ प्रभा कुमारी प्लस पोलियो ट्रेनिंग के लिए पटना गयी थीं. ओपीडी में 270 मरीज आये. सभी को दवा भी मिली.
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रूई, कॉटन, बैंडेज, सीरिंज, सर्दी-खांसी, बुखार व अन्य तमाम दवाइयां उपलब्ध थीं.