मंदी की आहट : बिहार में 15 हजार करोड़ के निवेश पर ग्रहण, पहले से चल रही इंडस्ट्रीज को भी झटका

Updated at : 23 Aug 2019 7:23 AM (IST)
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मंदी की आहट : बिहार में 15 हजार करोड़ के निवेश पर ग्रहण, पहले से चल रही इंडस्ट्रीज को भी झटका

मांग में कमी होने से पिछले कुछ महीनों में 80 औद्योगिक यूनिट ठप पटना : नोटबंदी के झटके से अभी राज्य के उद्योग ठीक से उबरे भी नहीं थे कि आर्थिक मंदी की दस्तक ने राज्य की अर्थव्यवस्था को जबरदस्त झटका दिया है. इससे नये औद्योगिक निवेश पर ब्रेक लग गयी है. एक मोटे अनुमान […]

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मांग में कमी होने से पिछले कुछ महीनों में 80 औद्योगिक यूनिट ठप
पटना : नोटबंदी के झटके से अभी राज्य के उद्योग ठीक से उबरे भी नहीं थे कि आर्थिक मंदी की दस्तक ने राज्य की अर्थव्यवस्था को जबरदस्त झटका दिया है.
इससे नये औद्योगिक निवेश पर ब्रेक लग गयी है. एक मोटे अनुमान के अनुसार अगर 15 हजार करोड़ रुपये का निवेश होता, तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर करीब 10 हजार युवाओं को रोजगार मिलता. उद्योग विभाग के अनुसार इस साल राज्य में विभिन्न कंपनियों की तरफ से करीब 15 हजार करोड़ रुपये का निवेश होना था, लेकिन अब तक मात्र 2500 करोड़ रुपये का निवेश हो सका है.
यह निवेश भी इस साल के शुरू में हुआ था. पिछले तीन माह में निवेशकों ने मंदी का खतरा टल जाने तक पल्ला झाड़ लिया है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक करीब 15 हजार करोड़ रुपये का रुका यह वह निवेश था, जिसने मंजूरी का पहला स्टेज पार कर लिया था. निवेशकों ने निवेश की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी, लेकिन मंदी की आहट ने इस पर फिलहाल ब्रेक लगा दी है.
उद्योग विभाग का मानना है कि बैंकों का रुख भी ठंडा है. बैंक लोन देने को तैयार नहीं हैं. हालांकि, विभाग ने बैंकों से कई दौर की बातचीत में आश्वस्त किया है कि वह निवेशकों की तरफ से गारंटी देने को तैयार है. लेकिन बैंक इस आश्वासन के बाद भी लोन देने को तैयार नहीं दिखते.
पहले से चल रही इंडस्ट्रीज को भी झटका
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक बिहार में 80 औद्योगिक इकाइयां ऐसी हैं, जो पिछले कुछ माह में करीब-करीब बंद हो चुकी हैं. इसका कारण स्थानीय बाजार में उनके उत्पादों की मांग का कम हो जाना है. ये वैसी औद्योगिक इकाइयां हैं, जो सरकार से भी अनुदान प्राप्त कर रही हैं. सरकारी अनुदान योजना का लाभ लेने वाली कुल अौद्योगिक इकाइयों की संख्या 500 के आसपास है. राज्य में 25000 हजार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इंडस्ट्रीज यूनिट हैं.
कहते हैं अधिकारी
मंदी ने नये निवेश को झटका दिया है. बैंक निवेशकों को लोन और अन्य वित्तीय सुविधा देने में आनाकानी कर रहे हैं. सरकार बैंकों से बातचीत कर आश्वस्त कर रही है कि उनका पैसा नहीं फंसेगा. बैंकों ने अभी तक सकारात्मक रुख नहीं दिखाया है. जल्दी ही फिर बैंकों से बातचीत होगी.
-पंकज कुमार सिंह, निदेशक उद्योग विभाग
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