पहली बार लोकसभा से आउट हुआ राजद: लालू के समधी और बेटी हारे, खाता नहीं खुला

Updated at : 24 May 2019 11:59 AM (IST)
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पहली बार लोकसभा से आउट हुआ राजद: लालू के समधी और बेटी हारे, खाता नहीं खुला

दीपक कुमार मिश्रा पटना: यह महज संयोग है या फिर राजनीति का फलसफा राज्य विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी राजद का 17वीं लोकसभा में कोई नुमाइंदा नहीं होगा. अस्सी विधायकों वाला दल राजद के लिए यह पहला मौका है, जब लोकसभा चुनाव में उसके सारे उम्मीदवार पराजित हो गये. 22 साल पहले 1997 में लालू […]

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दीपक कुमार मिश्रा

पटना: यह महज संयोग है या फिर राजनीति का फलसफा राज्य विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी राजद का 17वीं लोकसभा में कोई नुमाइंदा नहीं होगा. अस्सी विधायकों वाला दल राजद के लिए यह पहला मौका है, जब लोकसभा चुनाव में उसके सारे उम्मीदवार पराजित हो गये.
22 साल पहले 1997 में लालू प्रसाद की अगुवाई में राजद की स्थापना हुई थी. इसके पहले 1990 से 2005 तक राज्य की सत्ता की सिरमौर रहे राजद की दमदार उपस्थिति 2004 में गठित यूपीए -1 की मनमोहन सरकार में भी बनी रही. इस बार के लोकसभा चुनाव में राजद का सूपड़ा साफ हो गया. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के समधी चंद्रिका राय और बेटी मीसा भारती तक चुनाव हार गयीं. मौजूदा तीन सांसद जयप्रकाश यादव, बुलो मंडल और सरफराज आलम भी अपनी सीट नहीं बचा पाये. पार्टी के दिग्गज जगदानंद सिंह और रघुवंश प्रसाद सिंह को भी हार का सामना करना पड़ा है. राजद ने 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे.
पिछले चुनाव में पार्टी को चार सीटों पर सफलता मिली थी. राजद को करीब 16 फीसदी वोट मिले हैं. इससे समझा जा रहा है कि राजद का माय समीकरण भी टूट गया. अब पार्टी के भविष्य पर भी सवाल उठने लगे हैं. लालू प्रसाद के जेल में रहने की वजह से राजद में जो एक राजनीतिक शून्यता उभरी है, इसका खामियाजा पार्टी को लोकसभा चुनाव में उठना पड़ा. आने वाले समय में पार्टी में नेतृत्व के खिलाफ असंतोष का स्वर उभर सकता है इससे इन्कार नहीं किया जा सकता. 2014 के लोकसभा चुनाव में राजद को चार सीटें मिली थीं और 21 सीटों पर वह दूसरे स्थान पर थीं. पिछले चुनाव में पार्टी को करीब 88 लाख वोट मिले थे. लोकसभा चुनाव में बहुत अच्छी स्थिति नहीं रहने के बाद भी पार्टी को विधानसभा चुनाव में जबर्दस्त सफलता मिली. पार्टी 100 सीटों पर चुनाव पर चुनाव लड़ी और 80 पर सफलता मिली.
लिटमस टेस्ट में फेल हुआ राजद
पाटलिपुत्र को यादव राजनीति का लिटमस टेस्ट भी माना जा रहा था. मीसा भारती यहां दूसरी बार पराजित हुई हैं. 2009 में इस सीट से लालू प्रसाद भी चुनाव हारे थे. लालू परिवार को दूसरा झटका सारण में लगा. यहां से लालू प्रसाद के समधी और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा राय के पुत्र चंद्रिका राय चुनाव हार गये. सारण से लालू प्रसाद भी सांसद रहे चुके हैं. राजद की सभी सीटों पर हार बताती है कि राजद के आधार वोट और समीकरण दोनों दरक गये हैं. चुनाव परिणाम पर राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी कहते हैं कि चुनाव परिणाम अप्रत्याशित रहा. राजद के प्रदेश प्रवक्ता और विधायक भाई वीरेंद्र कहते हैं कि जनादेश का हम सम्मान करते हैं. उन्होंने साथ में यह भी कहा कि इवीएम में जरूर छेड़छाड़ हुई है.
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