फुलवारीशरीफ : वायु प्रदूषण से बढ़ रही लोगों में अस्थमा की बीमारी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 May 2019 8:45 AM
विज्ञापन
पटना एम्स में विश्व अस्थमा दिवस पर बोले विशेषज्ञ चिकित्सक फुलवारीशरीफ : पटना एम्स के निदेशक डाॅ प्रभात कुमार सिंह ने कहा कि गांव के बजाये शहर में अस्थामा की बीमारी बढ़ने की वजह वायु प्रदूषण है. शहर में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण माइनिंग डीजल टेंपो. हर 10 में से एक व्यक्ति के फेफड़े […]
विज्ञापन
पटना एम्स में विश्व अस्थमा दिवस पर बोले विशेषज्ञ चिकित्सक
फुलवारीशरीफ : पटना एम्स के निदेशक डाॅ प्रभात कुमार सिंह ने कहा कि गांव के बजाये शहर में अस्थामा की बीमारी बढ़ने की वजह वायु प्रदूषण है. शहर में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण माइनिंग डीजल टेंपो. हर 10 में से एक व्यक्ति के फेफड़े कमजोर मिलते हैं. मंगलवार को एम्स के पल्मोनेरी विभाग की ओर से आयोजित दमा दिवस के मौके पर कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि शहरी करण होने के कारण पेड़ काट दिया गया.
उन्होंने ने लोगों से अपील की कि एक आदमी एक पेड़ जरूर लगाने का संकल्प लेे. ब्रोनकीयल थार्मोप्लास्टी एक नयी तकनीक से खराब हालत के अस्थामा का इलाज किया जायेगा यह मशीन बहुत जल्द ही एम्स में लगायी जायेगी. एम्स पल्मोनेरी विभागाध्यक्ष डाॅ दीपेंद्र कुमार राय ने कहा कि दमा या अस्थमा के मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है, दम फूल जाता है, खांसी आती है, वह भी बलगम वाली. यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है. पुरुषों में इसके होने की संभावना ज्यादा रहती है, बच्चों को यह अपनी गिरफ्त में जल्दी ले लेता है. डब्लूएचओ के आॅकड़ों के मुताबिक पूरे विश्व में 15 से 20 करोड़ लोग दमा से ग्रस्त हैं.
वहीं भारत में 2 करोड़ इस बीमारी से ग्रस्त हैं. जिसमें 80 प्रतिशत मौत दमा के कारण हो जाती है. अस्थमा लगभग 15 से 20 प्रतिशत बच्चों को प्रभावित करता है. डाॅ राय ने कहा कि अस्थमा का उपचार है और इसे दवा के माध्यम से काबू किया जा सकता है, लेकिन जड़ से समाप्त नहीं होगा. इसका सही उपचार इन्हेलर थेरेपी है. मौके पर 40 लोगों को निःशुल्क इलर्जी की जांच की गयी.
अस्थमा के कारण
आज के समय में अस्थमा का सबसे बड़ा कारण है प्रदूषण. कल कारखानों, वाहनों से निकलने वाले धुएं अस्थमा का कारण बन रहे हैं. सर्दी, फ्लू, धूम्रपान, मौसम में बदलाव के कारण भी लोग अस्थमा से ग्रसित हो रहे हैं.
कुछ ऐसे एलर्जी वाले फूड्स हैं जिनकी वजह से सांस संबंधी बीमारियां होती है. पेट में अम्ल की मात्रा अधिक होने से भी अस्थमा हो सकता है. इसके अलावा दवाइयां, शराब का सेवन और कई बार भावनात्मक तनाव भी अस्थमा का कारण बनते हैं. अत्यधिक व्यायाम से भी दमा रोग हो सकता है. कुछ लोगों में यह समस्या आनुवांशिक होता है. मेडिकल साइंस में दमा का कारण वंशानुगत भी माना गया है.अर्थात दमे के मरीज के परिवार में पहले किसी को यह बीमारी रही हो तो यह भी एक कारण होता है वर्तमान मरीज के लिए.
बताया गया उपचार
दमा रोग को खत्म करना संभव नहीं है, हां रोग की तीव्रता कम की जा सकती है, रोगी को उपचार द्वारा सांस लेना आसान बनाया जा सकता है. दमे का इलाज डॉक्टर से कराएं. इलाज के साथ ही इसके बढ़ने के कारणों से बचें, तो ही फायदा हो सकता है. समय से दवाइयों का सेवन करें.
इनहेलर्स का प्रयोग आजकल दमा रोग में किया जाता है, ये श्वसन तंत्र की सूजन को कम करते हैं, इससे रोगी को तुरंत आराम मिलता है और कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता. दमा रोग को काबू में करने के लिए दमा के कारणों के विपरीत आचरण करें यानी धूम्रपान न करें, कोई कर रहा हो तो उससे दूर रहें, ठंड से तथा ठंडे पेय लेने से बचें, थकान का काम न करें.
सांस फूलने लगे ऐसा श्रम न करें. दमा रोगी को यह समझ लेना चाहिए कि दवा के दम पर दमे को नहीं हराया जा सकता, इसलिए नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार, खुली हवा में लंबी-लंबी सांस लेना लाभदायक रहता है.
मौके पर अस्पताल अधीक्षक डाॅ सीएम सिंह, डाॅ सौरभ कार्माकार, डाॅ समेनेश ठाकुर, डाॅ एलएन तिवारी, डाॅ सोमनाथ भट्टाचार्या, डाॅ विनोद, डाॅ इरशाद, डाॅ सत्यप्रकाश ने भी अपने-अपने विचार रखें.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










