समस्याओं से दुखी मतदाता उदासीन, कर रहे ‘नोटा’ को पसंद, समस्तीपुर में सबसे अधिक हुआ इस्तेमाल

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Apr 2019 6:34 AM

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मुख्य दलों को छोड़ बाकी उम्मीदवारों से अधिक ‘नोटा’ को मिला मत पटना : अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान में दिलचस्पी नहीं देख पीड़ित वोटर उम्मीदवार से बेहतर ‘नोटा’ को पसंद करने लगे हैं. अपनी भड़ास निकालने के लिए वोटर अपना वोट उम्मीदवार को नहीं डाल रहे हैं. ‘नोटा’ का इस्तेमाल शुरू होने से […]

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मुख्य दलों को छोड़ बाकी उम्मीदवारों से अधिक ‘नोटा’ को मिला मत

पटना : अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान में दिलचस्पी नहीं देख पीड़ित वोटर उम्मीदवार से बेहतर ‘नोटा’ को पसंद करने लगे हैं. अपनी भड़ास निकालने के लिए वोटर अपना वोट उम्मीदवार को नहीं डाल रहे हैं. ‘नोटा’ का इस्तेमाल शुरू होने से पीड़ित वोटर उसमें अपना वोट डाल कर मन की तसल्ली पूरी कर लेते हैं.

चौथे चरण में उजियारपुर, दरभंगा, समस्तीपुर सुरक्षित, बेगूसराय और मुंगेर में बाढ़, सुखाड़, बेरोजगारी, रोजगार के लिए लोगों का पलायन, सिंचाई की सुविधा पर्याप्त नहीं आदि मुख्य समस्या है. समस्याओं के समाधान में उम्मीदवारों के दिलचस्पी नहीं लेने के कारण 2014 के चुनाव में इन क्षेत्रों में मुख्य दलों के उम्मीदवार को मिलनेवाले कुल मतों का लगभग 10 प्रतिशत वोट ‘नोटा’ में

पड़ा. मुख्य दलों के उम्मीदवार को छोड़ कर शेष उम्मीदवार को मिलनेवाले

कुल वोट से अधिक ‘नोटा’ को वोटरों

ने पसंद किया. इन क्षेत्रों में पिछले लोकसभा चुनाव में दरभंगा में 11, समस्तीपुर सुरक्षित और बेगूसराय

में नौ-नौ व मुंगेर में आठ उम्मीदवारों

को ‘नोटा’ से कम वोट मिला.

उजियारपुर में वोटरों ने उम्मीदवारों को अधिक चाहा. ‘नोटा’ में मात्र 6171 वोट गिरा.

समस्तीपुर में सबसे अधिक ‘नोटा’ का इस्तेमाल

पिछले लोकसभा चुनाव में समस्तीपुर में सबसे अधिक ‘नोटा’ का इस्तेमाल हुआ. वहां 29 हजार 211 वोटरों ने ‘नोटा’ का बटन दबाया. चुनाव में जीत हासिल करनेवाले लोजपा के रामचंद्र पासवान को मिले कुल वोट 270401 व दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के डॉ अशोक कुमार को मिले कुल वोट 263529 का 10 प्रतिशत से अधिक ‘नोटा’ में गिरा. यहां लोजपा, कांग्रेस व जदयू के बाद शेष नौ उम्मीदवारों को ‘नोटा’ में गिरे वोट से कम वोट मिला. बेगूसराय में 26 हजार 622 वोटरों ने ‘नोटा’ का इस्तेमाल किया. वहां भाजपा, राजद व भाकपा के बाद शेष नौ उम्मीदवारों को वोटरों ने ‘नोटा’ से कम वोट दिया.

दरभंगा में 21 हजार 103 वोट ‘नोटा’ में गिरा. वहां मुख्य दल भाजपा, राजद व जदयू को छोड़ शेष 11 उम्मीदवारों को ‘नोटा’ से कम वोट मिला. मुंगेर में 15 हजार 420 वोटरों ने ‘नोटा’ का इस्तेमाल किया. चुनाव में मुख्य दलों के उम्मीदवार को छोड़ कर शेष आठ उम्मीदवारों को ‘नोटा’ से कम वोट मिला. केवल उजियारपुर में वोटरों ने उम्मीदवारों को अधिक पसंद किया. वहां मात्र 6171 वोट ‘नोटा’ में मिला.

बेरोजगारी मुख्य समस्या

इन पांचों लोकसभा क्षेत्र में बाढ़, सुखाड़, बेरोजगारी, रोजगार को लेकर पलायन, पर्याप्त सिंचाई की सुविधा नहीं आदि मुख्य समस्या है. उजियारपुर में सिंचाई व पेयजल की मुख्य समस्या है. कर्पूरी ठाकुर के मुख्यमंत्री रहते शुरू हुई नून नदी परियोजना अब तक पूरी नहीं हुयी है. दरभंगा-समस्तीपुर से सटा कुशेश्वरस्थान का इलाका आधा से अधिक आबादी दियारा क्षेत्र की है. इस इलाके में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. छह माह से अधिक यह इलाका जलजमाव से ग्रस्त रहता है. मुंगेर में कई कारखाने के बंद होने से रोजगार की समस्या बढ़ी है.

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