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नेताओं को क्यों नहीं दिखती छोटे अस्पतालों की बदहाली

Updated at : 27 Apr 2019 5:41 AM (IST)
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नेताओं को क्यों नहीं दिखती छोटे अस्पतालों की बदहाली

आनंद तिवारी, पटना : पटना में नेता अभी तक राष्ट्रीय सुरक्षा, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, जाति, गरीबी और कृषि संकट के मुद्दों को आगे लाकर जनता के बीच पहुंच रहे हैं. लेकिन किसी भी पार्टी के नेता शहर के छोटे सरकारी अस्पतालों की बदहाली को मुद्दा बना कर जनता के बीच नहीं पहुंच रहे हैं. स्थिति यह […]

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आनंद तिवारी, पटना : पटना में नेता अभी तक राष्ट्रीय सुरक्षा, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, जाति, गरीबी और कृषि संकट के मुद्दों को आगे लाकर जनता के बीच पहुंच रहे हैं. लेकिन किसी भी पार्टी के नेता शहर के छोटे सरकारी अस्पतालों की बदहाली को मुद्दा बना कर जनता के बीच नहीं पहुंच रहे हैं. स्थिति यह है कि शहर के पांच छोटे अस्पताल गार्डिनर रोड, लोकनायक जय प्रकाश नारायण राजवंशी नगर हड्डी अस्पताल, राजेंद्र नगर अस्पताल, गर्दनीबाग अस्पताल व गुरुगोविंद सिंह अस्पताल में बदहाली का मंजर छाया हुआ है. जबकि सभी अस्पताल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का दर्जा प्राप्त कर चुके हैं.

कहीं दवाओं की कमी तो कहीं मशीनों का बुरा हाल, मरीज होते हैं परेशान
शहर के गार्डिनर रोड अस्पताल इंडोक्राइन का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल घोषित है. यहां सबसे अधिक एक्स-रे, और अल्ट्रासाउंड की जांच की जरूरत पड़ती है. मगर यहां अक्सर जांच मशीन खराब हो जाती है. कभी-कभी जांच का जिम्मा संभालने वाली कंपनी बीच में जांच करना बंद कर देती हैं.
कंपनियों की मानें तो राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से पेमेंट का भुगतान नहीं होता है, नतीजा जांच बंद करनी पड़ती है. यहां हीमोफीलिया की जांच भी नहीं होती है.
गर्दनीबाग में बुलाने पर आते हैं विशेषज्ञ
गर्दनीबाग सरकारी अस्पताल में रोजाना पांच से सात प्रसूताओं की डिलिवरी होती है. यहां एनेस्थीसिया के स्थायी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं. अगर सर्जरी से डिलिवरी की नौबत आ जाये, तो फोन कर एनेस्थीसिया के डॉक्टर को बुलाते हैं. रात में बिजली कटने के बाद जेनेरेटर नहीं चलाया जाता है. जेनेरेटर खराब है, जिसे ठीक कराने का काम कागजों में ही चल रहा है.
राजेंद्र नगर और हड्डी अस्पताल
आंख के इलाज के लिए राजेंद्र नेत्रालय व हड्डी रोग के इलाज के लिए राजवंशी नगर एलएनजेपी अस्पताल दोनों ही अस्पताल बदहाल हैं. राजेंद्र नगर नेत्रालय में एक साल में मुश्किल से तीन से चार महीने मरीजों को लेंस अस्पताल से मिलता है या फिर मोतियाबिंद का ऑपरेशन होता है. वहीं, हड्डी अस्पताल में ट्रामा सेंटर नहीं होने से गंभीर मरीज सीधे पीएमसीएच रेफर हो रहे हैं.
अर्बन हेल्थ केयर सेंटर पर देना होगा ध्यान
प्रारंभिक स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने की जिम्मेदारी अर्बन हेल्थ केयर सेंटर की है. शहर के सभी केंद्रों पर अनुभवी डॉक्टर हैं, लेकिन फिर भी लोग प्रारंभिक इलाज के लिए पीएमसीएच, एम्स जैसे संस्थानों में पहुंच जाते हैं. इसमें बदलाव करना आवश्यक है. अर्बन हेल्थ केयर सेंटरों में सुविधा बढ़ानी होगी.
छोटे अस्पतालों का लोड पीएमसीएच व आइजीआइएमएस पर
पीएमसीएच व आइजीआइएमएस जैसे मेडिकल अस्पतालों में छोटे बीमारियों के इलाज के लिए मरीज आ रहे हैं. नतीजा उन दोनों मेडिकल कॉलेजों में लोड अधिक बढ़ गया है. शहर के छोटे अस्पतालों में डॉक्टर, कर्मचारियों के अलावा मशीन आदि की संख्या बढ़ानी होगी.
डॉ विजय कुमार गुप्ता, पूर्व प्रिंसिपल, पीएमसीएच
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