उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र : कुशवाहा की जमीन पर कमल खिलाने की चुनौती, दिलचस्प होगा यहां का मुकाबला
Updated at : 23 Apr 2019 6:35 AM (IST)
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अभय सिंह/प्रकाश कुमार नित्यानंद राय और उपेंद्र कुशवाहा के मैदान में होने से दिलचस्प होगा यहां का मुकाबला सिर्फ एक दशक पहले अस्तित्व में आया उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र इस बार एनडीए और महागठबंधन के दो दिग्गजों के मैदान में आने की वजह से चर्चा में है. यहां से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय और […]
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अभय सिंह/प्रकाश कुमार
नित्यानंद राय और उपेंद्र कुशवाहा के मैदान में होने से दिलचस्प होगा यहां का मुकाबला
सिर्फ एक दशक पहले अस्तित्व में आया उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र इस बार एनडीए और महागठबंधन के दो दिग्गजों के मैदान में आने की वजह से चर्चा में है.
यहां से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय और रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा चुनाव लड़ रहे हैं. माकपा ने अजय कुमार को मैदान में उतारा है. मतदान में अब सप्ताह भर रह गये हैं और सियासी तपिश उजियारपुर के बाजार से लेकर विभूतिपुर के गांवों तक में है.
समस्तीपुर से उजियारपुर के रास्ते में शीतलपट्टी चौक पर सुबह-सुबह एक सैलून में लोग जुटे हैं. चर्चा चुनाव की हुई तो अच्छे लाल राय बोले- ‘हर क्षेत्र में काम हुआ है. पहले छह-सात घंटे मुश्किल से बिजली रहती थी.
अब तो खूब बिजली मिल रही है.’ बात खत्म हुई नहीं कि बगल में बैठे दयावंत ने उनकी बातों को काटा- ‘बेरोजगारी पर भी बात करिये, रोजगार मिलना मुश्किल हुआ है.’ उजियारपुर में कांटे की लड़ाई में चुनाव का मुद्दा स्थानीय भी है और राष्ट्रीय भी. नित्यानंद राय अपने चुनावी दौरों में यह बता रहे हैं कि पांच साल में विकास के कौन-कौन से काम हुए.
साथ ही यह भी समझाते हैं कि नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना देश के लिए क्यों जरूरी है. दूसरी तरफ, उपेंद्र कुशवाहा क्षेत्र के मुद्दे उठाने के साथ-साथ यह भी बता रहे हैं कि देश व लोकतंत्र खतरे में है. माकपा प्रत्याशी अजय कुमार के निशाने पर दोनों उम्मीदवार हैं. क्षेत्र में पार्टियों व प्रत्याशियों के होर्डिंग व बैनर इक्का-दु्क्का ही दिखते हैं. कस्बों में तो चुनावी चर्चा में राष्ट्रीय व स्थानीय मुद्दे हैं, लेकिन मुख्य सड़क से किसी गांव की ओर बढ़ते ही चर्चा जातीय गोलबंदी से होते हुए इस बात की ओर मुड़ती है कि किसके वोट बैंक में कौन, कितना सेंध लगा रहा है. 2014 में उजियारपुर से भाजपा के नित्यानंद राय ने राजद के आलोक कुमार मेहता को करीब 60 हजार मतों के अंतर से पराजित किया था.जदयू की अश्वमेघ देवी को तीसरा स्थान मिला था. तब बिहार के राजनीतिक समीकरण में रालोसपा, एनडीए के साथ खड़ी थी.
इस बार उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन में हैं और जदयू, एनडीए में है. इस लिहाज से चुनाव में उजियारपुर में नये सामाजिक समीकरण की परीक्षा भी होने वाली है. नये समीकरण ने नित्यानंद राय के सामने नयी चुनौती पेश कर दी है. उन्हें अपने आधार मतों को गोलबंद रखने के साथ-साथ महागठबंधन के मतों को भी ज्यादा से ज्यादा संख्या में अपने पक्ष में करने की चुनौती है. 2014 में मोदी लहर पर सवार नित्यानंद राय ने संसदीय क्षेत्र के प्रत्येक विधानसभा सीट पर बढ़त कायम की थी
दूसरी तरफ उपेंद्र कुशवाहा के सामने चुनौती अपने वोट बैंक को हासिल करने के साथ-साथ राजद के आधार मतों को अपने पक्ष में ज्यादा से ज्यादा ट्रांसफर कराने की है. कुशवाहा बहुल उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र में यादव वोटरों की अच्छी-खासी तादाद है, जो अतीत में जीत-हार में अपनी अहम भूमिका निभाते रहे हैं. माकपा के उम्मीदवार अजय कुमार की ताकत अपने कैडर मत हैं. उजियारपुर के कई इलाकों में माकपा ने संघर्ष के बल पर अपनी जमीन तैयार की है.
लोकसभा क्षेत्र से कुल
180 उम्मीदवार मैदान में हैं
बाेले युवा वोटर
उजियारपुर में बड़ी संख्या में युवा वोटर भी पहली बार मतदान करेंगे. उनकी सोच अलहदा है. शीतलपट्टी चौक पर मिले राजेश कहते हैं – हमारी युवा पीढ़ी के लिए जाति और धर्म कोई मायने नहीं रखता है. हमारे पहले की पीढ़ी के लोग जाति पर वोट कर देख चुके हैं, उससे न जाति को लाभ हुआ और न ही समाज को.
यादव वोटर तय करेंगे जीत-हार का समीकरण
सिंचाई और पेयजल है यहां बड़ी समस्या
उजियारपुर का इलाका देश भर में सरैसा खैनी के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है. बड़ी संख्या में किसान व कारोबारी इससे जुड़े हैं. गांवों में इन दिनों गेहूं की कटनी हो रही है और किसानों की चिंता चुनाव से कहीं ज्यादा अपनी दौनी और गेहूं की बिक्री को लेकर है. सरायरंजन के शंभू कहते हैं – ‘गेहूं तो ठीक हुआ, पर सही भाव नहीं मिल रहा है.’ राजकपूर कहते हैं कि ‘खेती के लिए न तो समुचित पटवन की व्यवस्था है, न कोई वैकिल्पक सुलभ साधन. निजी स्रोतों पर पूरी तरह निर्भरता है.’ कर्पूरी ठाकुर के मुख्यमंत्री रहते शुरू हुई नून नदी परियोजना 28 साल में पूरी नहीं हुई. कई इलाकों में भूजल का स्रोत सूख रहा है.
छह विधानसभा क्षेत्र हैं उजियारपुर में
उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं. इसमें उजियारपुर, सरायरंजन, मोरवा, विभूतिपुर व मोहिउद्दीननगर के अलावा वैशाली जिले का पातेपुर भी है. इनमें उजियारपुर, पातेपुर और मोहिउददीनगर सीट पर राजद का कब्जा है, जबकि सरायरंजन, विभूतिपुर और मोरवा से जदयू के विधायक हैं.
पहली सांसद बनी थीं अश्वमेघ देवी
परिसीमन के बाद 2009 में उजियारपुर लोकसभा अस्तित्व में आया था. पहली बार जदयू की अश्वमेघ देवी यहां से जीतकर संसद में पहुंची थीं. लेकिन 2014 के चुनाव में भाजपा से गठबंधन टूट जाने के कारण वे तीसरे नंबर पर रही थीं. भाजपा ने इस सीट पर अपना कब्जा जमाया था.
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