पटना : सीबीआइ से बचने के लिए भाजपा से हाथ मिलाने को तैयार थे लालू प्रसाद : सुशील कुमार मोदी
Updated at : 18 Apr 2019 7:26 AM (IST)
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सियासत गरमायी : उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने किया दावा, कहा पटना : डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद पर हमला करते हुए कहा कि वह अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी कर सकते हैं. उन्हें भाजपा से भी समझौता करने में कोई गुरेज नहीं. सार्वजनिक तौर पर आरएसएस को गाली देने […]
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सियासत गरमायी : उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने किया दावा, कहा
पटना : डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद पर हमला करते हुए कहा कि वह अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी कर सकते हैं. उन्हें भाजपा से भी समझौता करने में कोई गुरेज नहीं. सार्वजनिक तौर पर आरएसएस को गाली देने वाले लालू प्रसाद जरूरत पड़ने पर पैर भी पकड़ सकते हैं.
बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि नवंबर, 2014 को झारखंड हाइकोर्ट से उनके पक्ष में फैसला आने पर पैरवी करने के लिए कई बार केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से लालू प्रसाद के दूत प्रेमचंद गुप्ता और फिर स्वयं भी मिले. वह चाहते थे कि सीबीआइ उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कोई अपील नहीं करे और इसमें केंद्र सरकार उनकी मदद करे. इसके बदले में उन्होंने नीतीश कुमार की सरकार को गिराने और धूल चटाने तक की बात कही थी.
लालू प्रसाद ने ऑफर दिया था कि अगर मदद करें, तो 24 घंटे में वह नीतीश कुमार का इलाज कर देंगे. बिहार में सरकार गिरा देंगे और जदयू को तोड़कर बिहार में सरकार बना देंगे. लेकिन भाजपा ने उनकी किसी बात मानने से साफ तौर पर इन्कार कर दिया था. साथ ही यह भी कहा कि सीबीआइ के किसी मामले में वह हस्तक्षेप नहीं करेंगे.
डिप्टी सीएम ने कहा कि लालू प्रसाद को अभी चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में 27 साल की सजा हुई है. उनके बेटे भाजपा के खिलाफ बोलते रहते हैं. लालू प्रसाद चाहते थे कि सभी मामलों को मिलाकर उन्हें एक साथ सजा हो जाये, जिससे उनकी सजा कम हो सके.
लेकिन सीबीआइ उनके खिलाफ सभी मामलों की सुनवाई अलग-अलग करना चाहती थी. इसी बात को लेकर वह सीबीआइ के तत्कालीन निदेशक यूएन विश्वास और रणजीत सिन्हा तक को मैनेज करने की पूरी कोशिश की थी. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपाध्यक्ष देवेश कुमार, प्रवक्ता राजीव रंजन, निखिल आनंद, अशोक भट्ट, राजीव रंजन समेत अन्य मौजूद थे.
1990 में समर्थन लेने भाजपा ऑफिस तक आये थे राजद अध्यक्ष
मोदी ने कहा कि 1975 में पटना विवि छात्र संघ के चुनाव में आरएसएस और विधार्थी परिषद से मदद ली थी. 1977 में छपरा से सांसद बनने के लिए संघ की मदद ली थी. 1990 में मुख्यमंत्री बनने के लिए भाजपा से समर्थन लेने कार्यालय तक पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि वह अभी जेल में बंद हैं. फिर भी बिहार की राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं. हॉस्पिटल से टिकट बांटने का पूरा खेल खेला है.
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