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शिकायत के तीन घंटे के अंदर, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटेंगे विवादित कंटेट

Updated at : 03 Apr 2019 6:38 AM (IST)
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शिकायत के तीन घंटे के अंदर, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटेंगे विवादित कंटेट

सुमित कुमार पटना : लोकसभा चुनाव 2019 की अवधि में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप, गूगल, शेयरचैट, टिकटॉक आदि की कड़ी निगरानी हो रही है. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 का उल्लंघन करने वाले किसी भी विवादित कंटेट को शिकायत के तीन घंटे के अंदर हटाने का निर्देश है. इसको लेकर केंद्रीय निर्वाचन […]

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सुमित कुमार
पटना : लोकसभा चुनाव 2019 की अवधि में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप, गूगल, शेयरचैट, टिकटॉक आदि की कड़ी निगरानी हो रही है.
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 का उल्लंघन करने वाले किसी भी विवादित कंटेट को शिकायत के तीन घंटे के अंदर हटाने का निर्देश है. इसको लेकर केंद्रीय निर्वाचन आयोग की इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आइएएमआइए) तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रतिनिधियों के साथ सहमति बन गयी है.
वॉलेंट्री कोड ऑफ एथिक्स का उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े प्रतिनिधियों में विश्वास की भावना जगाना तथा निर्वाचन आयोग द्वारा कराये जा रहे स्वच्छ एवं निष्पक्ष चुनाव में सहयोग करना है. आयोग के निर्देश पर बिहार में निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों ने सोशल मीडिया की मॉनीटरिंग शुरू कर दी है.
मीडिया सर्टिफिकेशन एवं मॉनीटरिंग कोषांग की जिम्मेवारी
सोशल मीडिया पर चलने वाले कंटेट पर निगरानी की जिम्मेदारी हर जिले में मीडिया सर्टिफिकेशन एवं मीडिया मॉनीटरिंग कमेटी की दी गयी है. इसके लिए एडीएम स्तर के अधिकारी की निगरानी में कोषांग में कर्मियों की प्रतिनियुक्ति भी है. कोषांग को मिलने वाली किसी भी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई किये जाने का प्रावधान है.
डेडिकेटेड रिपोर्टिंग मैकेनिज्म हुआ तैयार
आयोग के निर्देश पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने भी उच्च प्राथमिकता वाली डेडिकेटेड रिपोर्टिंग मैकेनिज्म व डेडिकेटेड टीम तैयार की है. यह मंच निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों की शिकायत पर विवादित कंटेंट हटाने के साथ ही राजनीतिक दलों व उम्मीदवारों के विज्ञापन के प्रचार-प्रसार को लेकर मैकेनिज्म विकसित करेगा.
मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार रोकना चुनौती : जनप्रतिनिधत्वि अधिनियम 1951 की धारा 126 के प्रावधानों में संशोधनों एवं बदलाव पर समीक्षा और सुझाव को लेकर वरिष्ठ उपचुनाव आयुक्त उमेश सिन्हा की अध्यक्षता में गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट हाल ही में चुनाव आयोग को सौंप दी है.
इस कमेटी ने माना है कि मतदान वाले दिन से पहले 48 घंटों के दौरान किसी भी तरह के राजनीतिक विज्ञापनों या प्रचार पर रोक लगाना बड़ी चुनौती है. इससे संबंधित नियम पहले से मौजूद हैं. बावजूद यदि कोई व्यक्ति निजी तौर पर ब्लॉग या ट्विटर पोस्ट डालकर किसी राजनीतिक दल या इसकी नीतियों की प्रशंसा करता है, तो चुनाव आयोग उसे कैसे रोक सकता है?
क्या कहती है धारा 126?
जनप्रतिनिधत्वि अधिनियम, 1951 की धारा 126 में किसी निर्वाचन क्षेत्र में मतदान पूरा होने से 48 घंटे पहले की अवधि के दौरान रेडियो, टेलीविजन अथवा किसी समान माध्यम से किसी प्रकार के चुनावी तथ्य का निषेध किया गया है. चुनावी तथ्य का मतलब ऐसी सामग्री, जिसके पीछे किसी चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की मंशा होती है. धारा 126 के उपर्युक्त प्रावधानों का उल्लंघन करने पर अधिकतम दो वर्ष का कारावास अथवा जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है.
धारा 126 के तहत चुनाव आयोग टेलीविजन, रेडियो चैनल और केबल नेटवर्क आदि चलाने वालों से यह सुनिश्चिति करने को कहता है कि उनके द्वारा प्रसारित या प्रदर्शित कार्यक्रमों के कंटेंट में ऐसा कुछ भी नहीं होना चाहिए, जिससे किसी खास दल अथवा उम्मीदवार की संभावना को बढ़ावा मिलता हो अथवा चुनाव परिणाम प्रभावित होता हो. इसमें कोई ओपनियनपोल आधारित परिणाम को दर्शाना, परिचर्चाएं,विश्लेषण, दृश्य और ध्वनि संदेश शामिल हैं.
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