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28 साल पुराने हत्या मामले में नीतीश पर नहीं चलेगा केस

Updated at : 16 Mar 2019 5:41 AM (IST)
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28 साल पुराने हत्या मामले में नीतीश पर नहीं चलेगा केस

पटना : हत्या के 28 साल पुराने एक मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं चलेगा. पटना हाइकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत द्वारा लिये गये संज्ञान को रद्द कर दिया है. न्यायाधीश अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की एकलपीठ ने नीतीश कुमार द्वारा दायर आपराधिक याचिका पर शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा […]

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पटना : हत्या के 28 साल पुराने एक मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं चलेगा. पटना हाइकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत द्वारा लिये गये संज्ञान को रद्द कर दिया है.

न्यायाधीश अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की एकलपीठ ने नीतीश कुमार द्वारा दायर आपराधिक याचिका पर शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी भी गवाह ने अपनी गवाही में याचिकाकर्ता का नाम नहीं लिया है.
उन्हें सिर्फ शक के आधार पर इस मामले में अभियुक्त बनाया गया है. एकलपीठ ने कहा कि बाढ़ के एसीजेएम ने
नीतीश कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए जो संज्ञान लिया है, वह कानूनी रूप से गलत है. इसलिए इसे निरस्त किया जाता है. आपराधिक याचिका दायर कर चुनौती दी गयी थी.
यह है मामला
16 नवंबर, 1991 में बाढ़ लोकसभा क्षेत्र के मध्यावधि चुनाव के दौरान पंडारक थाने के ढीवार गांव के प्राथमिक स्कूल में चुनावी हिंसा में सीताराम सिंह की हत्या हो गयी थी. अगले दिन 17 नवंबर, 1991 को इसकी प्राथमिकी दर्ज करायी गयी, जिसमें नीतीश कुमार समेत पांच लोगों को अभियुक्त बनाया गया था.
लेकिन नीतीश कुमार और दुलार चंद्र को आरोपमुक्त कर दिया गया था. हत्या के करीब 17 वर्ष बाद मृत सीताराम के रिश्ते के भाई अशोक सिंह ने बाढ़ के एसीजीएम की अदालत में एक परिवाद पत्र दायर कर नीतीश कुमार को अभियुक्त बनाने की मांग की थी और कहा था कि हत्या में ये भी शामिल थे.
पुलिस ने इनका नाम जांच में हटा दिया है. एसीजीएम ने परिवाद पत्र पर 2009 में नीतीश कुमार समेत अन्य लोगों पर मुकदमा चलाने के लिए संज्ञान ले लिया था.
निचली अदालत के संज्ञान आदेश को नीतीश कुमार और अन्य ने पटना हाइकोर्ट में आपराधिक याचिका दायर कर चुनौती दी थी. हाइकोर्ट की न्यायाधीश सीमा अली खां की एकलपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाते हुए इसे सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया था.
वर्ष 2018 में इस मामले पर सुनवाई शुरू हुई और 31 जनवरी, 2019 को न्यायाधीश ए अमानुल्लाह की एकलपीठ ने सुनवाई पूरी कर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिस पर अपना फैसला शुक्रवार को सुनाया.
सुनवाई के दौरान ये बातें आयी सामने
सुनवाई के दौरान कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से जबलपुर हाइकोर्ट के वरीय अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह और पटना हाइकोर्ट के वरीय अधिवक्ता कृष्णा प्रसाद सिंह ने कहा था कि पुलिस ने इस मामले में कोई साक्ष्य नहीं पाया है और यह मामला राजनीतिक साजिश का परिणाम है.
वहीं, सरकारी अधिवक्ता ने कहा था कि इस मुकदमे में कोई ठोस सबूत नीतीश कुमार के खिलाफ नहीं है और यह मुकदमा राजनीति से प्रेरित होकर दायर किया गया है.
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