जहां साइंस टीचर नहीं वहां भी लैब पर कर डाले लाखों खर्च
Author Prabhat khabar digital desk
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पटना : इन दिनों बिहार बोर्ड के इंटर परीक्षा से जुड़ा प्रैक्टिकल चल रहा है. विदित हो कि जिले में दर्जनों ऐसे स्कूल हैं, जहां एक भी विज्ञान विषय के शिक्षक नहीं है. कुल मिला कर जहां विज्ञान की पढ़ाई का एक पीरियड भी नहीं लगा, वहां प्रायोगिक परीक्षाएं चल रही हैं. खास बात यह […]
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पटना : इन दिनों बिहार बोर्ड के इंटर परीक्षा से जुड़ा प्रैक्टिकल चल रहा है. विदित हो कि जिले में दर्जनों ऐसे स्कूल हैं, जहां एक भी विज्ञान विषय के शिक्षक नहीं है. कुल मिला कर जहां विज्ञान की पढ़ाई का एक पीरियड भी नहीं लगा, वहां प्रायोगिक परीक्षाएं चल रही हैं.
खास बात यह है कि जिन स्कूलों में पढ़ाने के लिए विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं, वहां भी इस साल तीन से साढ़े आठ लाख रुपये तक के उपकरण खरीदे गये हैं. ऐसी प्रायोगिक परीक्षाओं की गुणवत्ता को सहज ही समझा जा सकता है. इससे पहले तक शिक्षा विभाग महज पांच से दस हजार रुपये प्रति साल लैब के लिए देता था.
विज्ञान विषय की पढ़ाई की महज रस्म अदायगी
जिले में 147 इंटरमीडिएट स्कूलों में विज्ञान विषयों के शिक्षकों की उपलब्धता के आंकड़ों पर नजर डालें, तो लगता है कि जिले में विज्ञान विषय की पढ़ाई की महज रस्म अदायगी ही की जा रही है.
स्कूलों की संख्या के अनुपात में विषयवार शिक्षकों का तुलनात्मक अध्ययन बताता है कि वनस्पति विज्ञान के शिक्षकों की संख्या प्रत्येक छह स्कूलों में केवल एक है.
जंतु विज्ञान में तीन से चार स्कूल के बीच एक शिक्षक हैं. रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान के शिक्षक हर दूसरे स्कूल में हैं. ये हालात तब है, जब इस साल भारी संख्या में अतिथि शिक्षक की बहाली की गयी है.
असल स्थिति कुछ यूं समझें
जिले में फिजिक्स के केवल चार शिक्षक है. ये शिक्षक भी शहर में पदस्थापित है. इसी साल अतिथि शिक्षकों के जरिये सैद्धांतिक तौर पर भौतिकी के कुल शिक्षकों की संख्या 132 कर ली गयी है. अगर सरकारी आंकड़ों को ही सही मान लें तब भी जिले के कम-से-कम 15 इंटरमीडिएट स्कूलों में फिजिक्स का एक भी शिक्षक नहीं है. इससे भी भयावह स्थिति दूसरे विज्ञान विषयों की है.
विशेष फैक्ट :
राज्य में ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके तहत शासन किसी टीचर को उसकी मर्जी के खिलाफ ग्रामीण क्षेत्रों में तैनाती कर दे. लिहाजा विज्ञान विषयों के अतिथि शिक्षक भी ग्रामीण क्षेत्रों में जाने की जहमत नहीं उठाते.
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