पटना : रोजगार की आस में 493 दिनों से धरने पर बैठे कंप्यूटर शिक्षकों में से 50% की उम्र सीमा खत्म

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अनुभव को देखते हुए उन्हें स्थायी किये जाने की थी उम्मीद पटना : गर्दनीबाग सड़क के एक किनारे फटे से टेंट में जमीन पर सो रहे कुछ युवकों को उम्मीद है कि उनका अनिश्चितकालीन धरना जरूर रंग लायेगा. गुरुवार को उनके धरने का लगातार 493वां दिन था. वे थक चुके हैं, उनकी आंखों से उत्साह […]

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अनुभव को देखते हुए उन्हें स्थायी किये जाने की थी उम्मीद
पटना : गर्दनीबाग सड़क के एक किनारे फटे से टेंट में जमीन पर सो रहे कुछ युवकों को उम्मीद है कि उनका अनिश्चितकालीन धरना जरूर रंग लायेगा. गुरुवार को उनके धरने का लगातार 493वां दिन था. वे थक चुके हैं, उनकी आंखों से उत्साह की चमक गायब है, फिर भी उम्मीदें बाकी हैं. यह कहानी पांच साल के काॅन्ट्रैक्ट पर सरकारी हाइस्कूल में कंप्यूटर पढ़ाने के लिए बहाल लोगों की है. इनका कार्यकाल जब 21 अगस्त, 2017 को खत्म हुआ, तो ये सभी युवा कंप्यूटर शिक्षक सड़क पर आ गये. 22 अगस्त, 2017 से वे धरने पर हैं.
वोटर लिस्ट बनवायी, जनगणना तक करवायी : इन युवाओं को उम्मीद थी कि उनके अनुभव और अतिरिक्त कार्य काे देखते हुए, उन्हें स्थायी कर लिया जायेगा. पांच साल के काॅन्ट्रैक्ट की नौकरी के दौरान इन लोगों से वोटर लिस्ट बनवायी गयी. जनगणना तक करवायी गयी. यह लालच देकर कि आज नहीं तो कल उन्हें स्थायी करवा दिया जायेगा. धरना दे रहे टीचर्स ने बताया कि बेशक इस आश्वासन की असलियत कोई मानेगा नहीं, लेकिन यह सच्चाई है. अन्यथा हमसे किस आधार पर अतिरिक्त कार्य कराये गये. यही नहीं अब भी लगातार आश्वासन दिये जा रहे हैं.
टेंट में बैठे इन युवाओं की हिम्मत अब भी बाकी है. वे वहीं खाना बनाते हैं. पुआल पर बहुत पतला गद्दा डाल कर फटी-सी मच्छरदानी में साेते हैं. धरना दे रहे एक युवा ने बताया कि कई बार यहां से निकलने वाले लोग कुछ मदद कर जाते हैं. सब आपस में ले देकर काम चला रहे हैं.
1832 कंप्यूटर शिक्षकों में से 50 फीसदी तो अब सरकारी नौकरी के लिए उम्र सीमा खो चुके हैं. उन्होंने आना बंद कर दिया. कुछ की माली हालत खराब है, तो दूसरा काम करने के लिए शहर छोड़ गये. बावजूद धरने पर आ रहे लोगों की संख्या सैकड़ों में है, जिनकी सरकारी नौकरी की उम्र सीमा खत्म होने में अब साल दो साल ही बचे हैं.
धरना देते हुए तीसरी सर्दी : धरना दे रहे युवकों ने बताया कि जिस कंपनी के लिए काॅन्ट्रैक्ट पर काम किया, उसने न तो ग्रेच्यूटी दी और न बोनस. फिलहाल धरना देते हुए उनकी यह तीसरी सर्दी है.
पटना : भ्रष्टाचार व बेरोजगारी से तंग युवा गुरुवार को झाड़ू लेकर सड़क पर उतरे और मानव शृंखला के जरिये अपने विरोध व गुस्से का इजहार किया.
गांधी मैदान के चारों ओर कतारबद्ध तरीके से खड़े होकर शांतिपूर्वक तरीके से भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं ने प्रदर्शन करते हुए अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की. रामगुलाम चौक से होते हुए जेपी गोलंबर, बिस्कोमान भवन, कृष्ण मेमोरियल हॉल समेत पूरे गांधी मैदान में छात्रों ने अपने-अपने हाथ एक दूसरे से पकड़ कर बेरोजगारी व भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने गुस्से व पीड़ा का प्रदर्शन किया. मानव शृंखला का आयोजन नेशनल एसोसिएशन फॉर चेंज (एनएसी) की ओर से किया गया.
इस मौके पर एनएसी के सदस्य पुनपुन यादव, सरोज कुमार आदि ने कहा कि राज्य के परीक्षाओं में पारदर्शिता लाएं, बेरोजगार छात्रों को रोजगार का अवसर प्रदान करें. सभी सरकारी पदों पर बहाली के लिए प्रतियोगिता परीक्षा ही एक माध्यम हो. कार्यक्रम की अध्यक्षता धीरज सिंह ने की. प्रदर्शन में सुमन सिक्किम, जे स्टालिन, प्रह्लाद, आशुतोष, मृनमय, रनवीर, अनुराग, बंटी, फैजल समेत कई युवा मौजूद थे.
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