आई बैंक तो खुला, पर कम हो रहा नेत्रदान, तीन महीने पहले पीएमसीएच में शुरू हुई थी सुविधा

Updated at : 10 Nov 2018 3:06 AM (IST)
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आई बैंक तो खुला, पर कम हो रहा नेत्रदान, तीन महीने पहले पीएमसीएच में शुरू हुई थी सुविधा

आनंद तिवारी, पटना : लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने वाले तमाम उपाय पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में धरातल पर नहीं उतर पा रहे हैं. नेत्रदान की सुविधा और लोगों को रोशनी मिले, इस उद्देश्य से पीएमसीएच में तीन महीने पहले आई बैंक की सुविधा शुरू हुई, लेकिन वर्तमान समय में यहां अब तक […]

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आनंद तिवारी, पटना : लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने वाले तमाम उपाय पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में धरातल पर नहीं उतर पा रहे हैं. नेत्रदान की सुविधा और लोगों को रोशनी मिले, इस उद्देश्य से पीएमसीएच में तीन महीने पहले आई बैंक की सुविधा शुरू हुई, लेकिन वर्तमान समय में यहां अब तक सिर्फ चार मरीजों का ही कॉर्निया ट्रांसप्लांट हो पाया है.
इसके पीछे नेत्रदान को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी दिख रही है. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कॉर्निया देने वालों की कमी के कारण यह परेशानी खड़ी हो रही है.
अब तक सिर्फ चार मरीजों को ही मिल पायी रोशनी, लोगों में जागरूकता की कमी
कॉर्निया के अभाव में नहीं मिल रही रोशनी प्रतिवर्ष 35 हजार बढ़ रहे मरीज
देश में 1.40 लाख कॉर्निया की जरूरत
नहीं चलाया जा रहा कार्यक्रम: अस्पताल सूत्रों की मानें, तो नेत्रदान के लिए आई बैंक न तो जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है और न ही नेत्रदान की संख्या बढ़ाने के लिए कोई उचित कदम उठा रहा है. इसी कारण यहां अभी तक मात्र चार कॉर्निया ट्रांसप्लांट हो पाया है. कई बार दान करनेवालों तक समय पर नहीं पहुंच पाना भी एक कारण बनता है. जानकारों की मानें, तो छह से आठ घंटे के अंदर मृत व्यक्ति की कॉर्निया लेनी जरूरी होती है. लेकिन डॉक्टर आदि स्टाफ की टीम समय पर नहीं पहुंच पाती है. इस तरह का मामला सामने आ चुका है.
10 मरीज इंतजार में : पीएमसीएच में 10 ऐसे मरीज हैं, जो नेत्रदान के इंतजार में भटक रहे हैं. इन मरीजों को तत्काल कॉर्निया लगाने की जरूरत है. इन मरीजों ने अस्पताल में अपना रजिस्ट्रेशन भी करा लिया है. आई बैंक को कॉर्निया मिले, इसके लिए मरीज रोजाना अस्पताल का चक्कर काटते हैं. लेकिन कॉर्निया की कमी के चलते इन मरीजों को रोशनी नहीं मिल पा रही है. इसके अलावा कई अन्य अस्पतालों में भी मरीज भटक रहे हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
नेत्रदान की कमी होने के चलते जरूरतमंदों को कॉर्निया नहीं मिल पा रहा है. जब तक लोगों में नेत्रदान करने को लेकर जागरूकता नहीं आयेगी, संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो पायेगी. पीएमसीएच में अब तक चार मरीजों को रोशनी मिल पायी है. वहीं जो 10 मरीज वेटिंग में हैं, उनको भी जल्द रोशनी मिलेगी, इसके लिए कॉर्निया जुटाने का काम तेजी से चल रहा है.
डॉ राजीव रंजन प्रसाद, अधीक्षक, पीएमसीएच
पूरे बिहार में दो अस्पतालों में ट्रांसप्लांट की सुविधा
प्रदेश के सिर्फ दो मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में ही आई बैंक की सुविधा है, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान और पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल. आईजीआईएमएस में पिछले पांच वर्षों से कॉर्निया ट्रांसप्लांट की जा रही है. यहां अब तक करीब 150 लोगों को ट्रांसप्लांट के बाद रोशनी दी जा चुकी है. प्रदेश के बाकी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में भी कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए आई बैंक खोलने का निर्णय लिया गया है. लेकिन अभी यह निर्णय कागजों में ही चल रहा है.
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