मुजफ्फरपुर कांड : ब्रजेश को बिहार के बाहर दूसरी जेल में भेजना होगा : सुप्रीम कोर्ट

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Oct 2018 8:13 AM

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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मुजफ्फरपुर बालिका गृह दुष्कर्म मामले की जांच कर रही सीबीआई की रिपोर्ट में दिये गये विवरण को ‘भयानक’ और ‘डरावना’ करार दिया. साथ ही मामले में प्रमुख आरोपित ब्रजेश कुमार के बहुत अधिक प्रभावशाली होने संबंधी सीबीआई के आरोप को कोर्ट ने बहुत ही गंभीर बताया. कहा […]

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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मुजफ्फरपुर बालिका गृह दुष्कर्म मामले की जांच कर रही सीबीआई की रिपोर्ट में दिये गये विवरण को ‘भयानक’ और ‘डरावना’ करार दिया.
साथ ही मामले में प्रमुख आरोपित ब्रजेश कुमार के बहुत अधिक प्रभावशाली होने संबंधी सीबीआई के आरोप को कोर्ट ने बहुत ही गंभीर बताया. कहा कि उसे बिहार के बाहर दूसरी जेल में भेजना होगा. बिहार सरकार ने भी इसका समर्थन किया. कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की जांच कर रही सीबीआई की वर्तमान टीम में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाये. अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी.
न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने गुरुवार को सीबीआई की प्रगति रिपोर्ट के अवलोकन के बाद कहा कि इसमें तो लड़कियों को नशीला पदार्थ देने सहित बहुत ही हतप्रभ करने वाले तथ्य सामने आये हैं.
पीठ ने कहा, यह सब क्या हो रहा है? यह तो बहुत ही भयानक है. बच्चों के लिए यह क्या नशीला पदार्थ है?” सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने सीबीआई को इस मामले की जांच में हुई प्रगति की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करने का निर्देश दिया था.
गुरुवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि सीबीआई के अनुसार ब्रजेश ठाकुर एक प्रभावशाली व्यक्ति है और जेल में उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है. ब्रजेश ठाकुर इस समय न्यायिक हिरासत में भागलपुर जेल में बंद है. पीठ ने कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि उसे बिहार की जेल में रखना उचित नहीं होगा. साथ ही कोर्ट ने ब्रजेश ठाकुर को नोटिस जारी कर यह पूछा कि क्यों नहीं उसकी हिरासत किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित कर दी जाये.
इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रही अधिवक्ता अपर्णा भट ने कहा कि अब तक 17 व्यक्ति गिरफ्तार किये गये हैं और सीबीआई की प्रगति रिपोर्ट में दिया गया विवरण दुखद है. इस पर पीठ ने कहा, ‘‘दुखद? यह बहुत ही दुखद है. बहुत ही भयभीत करने वाला है.” पीठ ने बिहार सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार से कहा, ‘‘यह बहुत ही पीड़ादायक है. आपकी राज्य सरकार क्या कर रही है?”
जांच ब्यूरो की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया गया कि जेल में ब्रजेश ठाकुर के पास से मोबाइल बरामद हुआ है और वह जेल से ही 40 व्यक्तियों के साथ संपर्क में था. इस पर पीठ ने कहा, ‘‘उसे (ठाकुर) बिहार से बाहर स्थानांतरित करना होगा और दूसरी जेल में भेजना होगा. यह तमाशा है.”
सुप्रीम कोर्ट ने बीते 18 सितंबर को इस मामले की जांच के लिए नयी सीबीआई टीम गठित करने के पटना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी.
शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि यह कदम न सिर्फ अभी चल रही जांच, बल्कि पीड़ितों के लिए भी नुकसानदेह होगा. न्यायालय ने कहा था कि सीबीआई निदेशक द्वारा गठित टीम बदलने की कोई वजह नहीं है और बीते 30 जुलाई को गठित की गयी टीम को बरकरार रहने दिया जाये. इससे पहले, पीठ ने कहा था कि जांच सही दिशा में बढ़ती दिख रही है. उसने आयकर विभाग को बालिका गृह संचालित कर रहे एनजीओ और इसके मालिक ब्रजेश ठाकुर की संपत्तियों की जांच करने के भी निर्देश दिये थे.
पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति को खोज निकालने में इतना विलंब क्यों
शीर्ष अदालत ने राज्य की पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा का पता लगाने में हुए विलंब पर बिहार सरकार और सीबीआई से सफाई मांगी है.
पीठ ने पिछले महीने ही बिहार पुलिस को आदेश दिया था कि पूर्व मंत्री और उनके पति के यहां से बड़ी संख्या में हथियार बरामद होने के मामले की वह जांच करे. इस पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति को खोज निकालने में इतना विलंब क्यों शीर्ष अदालत ने राज्य की पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा का पता लगाने में हुए विलंब पर बिहार सरकार और सीबीआई से सफाई मांगी है. पीठ ने पिछले महीने ही बिहार पुलिस को आदेश दिया था कि पूर्व मंत्री और उनके पति के यहां से बड़ी संख्या में हथियार बरामद होने के मामले की वह जांच करे.
नौ आरोपितों से पूछताछ, सबने एक समान कहानी बतायी
सीबीआई ने कहा कि नौ आरोपितों से पूछताछ हुई है. सभी ने एक समान कहानी सुनायी है, जिससे पता चलता है कि ठाकुर ने उन्हें सिखाया- पढ़ाया है. मुजफ्फरपुर का बालिक गृह चार मंजिली इमारत में है. इसकी दीवारें 50 फुट ऊंची हैं. इनमें कोई झरोखा नहीं है. इसकी हालत जेल से भी बदतर है.
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