पटना : ईओयू ने 50 किलो गांजे के साथ चार को दबोचा
Updated at : 11 Oct 2018 9:10 AM (IST)
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पटना : आर्थिक अपराध इकाई ने 50.5 किलो गांजे के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया है. यह गांजा ओड़िशा से लाया गया था. इसकी आरा में डिलिवरी दी जानी थी. पकड़े गये आरोपित भोजपुर के रहने वाले हैं. ईओयू ने एक सूचना के आधार पर नाकाबंदी की. नौ अक्तूबर को शाम चार बजे लोगान […]
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पटना : आर्थिक अपराध इकाई ने 50.5 किलो गांजे के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया है. यह गांजा ओड़िशा से लाया गया था. इसकी आरा में डिलिवरी दी जानी थी. पकड़े गये आरोपित भोजपुर के रहने वाले हैं. ईओयू ने एक सूचना के आधार पर नाकाबंदी की. नौ अक्तूबर को शाम चार बजे लोगान गाड़ी (नंबर डब्लू बी 20एच 5246) बिहटा चाैक से आरा रोड में तेजी से मुड़ी. छापादल ने एनएच 30 पर सिकंदरपुर के पास रोकी. उसमें 40 पैकटों में 55.5 किलो गांजा छिपा हुआ था. ईओयू ने गाड़ी में सवार चारों को गिरफ्तार कर लिया.
चैंबर से डॉक्टर व काउंटर से कर्मी गायब
पटना एम्स का हाल. अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई व्यापक इंतजाम नहीं
सुबह के 9:20 बज चुके थे, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना के रजिस्ट्रेशन काउंटर से लेकर ओपीडी तक मरीजों की लंबी लाइन लगी हुई थी. संस्थान में रजिस्ट्रेशन काउंटर तो खुले हुए थे, लेकिन काउंटर नंबर तीन व पांच पर कर्मी मौजूद नहीं थे.
बाकी काउंटर पर मरीजों की लंबी लाइन थी. भीड़ इतनी अधिक बढ़ गयी कि लाइन व्यवस्थित नहीं थी. काली वर्दी में पहुंच एक गार्ड बेतरतीब लाइन को ठीक करा रहा था. उसी ग्राउंड फ्लोर पर पूछताछ काउंटर भी है, जहां काउंटर नंबर एक और काउंटर नंबर दो की सुविधा दी गयी है.
हालांकि वहां के काउंटर पर भी कर्मी गायब है. इलाज कराने के लिए मरीज एक वार्ड से दूसरे वार्ड का चक्कर लगा रहे हैं. मरीजों को इलाज में सुविधा मिले, इसके लिए एम्स प्रशासन की ओर से कोई व्यापक इंतजाम नहीं किये गये थे. एम्स की बदहाली पर पेश है एक रिपोर्ट…
जीए ब्लॉक के रूम नंबर तीन में एचआईवी की जांच एवं रिपोर्ट केंद्र संचालित किये जा रहे हैं. सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक मरीजों की जांच की जाती है. लेकिन यहां 11:30 बजे ही डॉक्टर अपना चेंबर छोड़ चले गये थे. आठ से 10 मरीज चेंबर के सामने खड़े होकर डॉक्टर के आने का इंतजार कर रहे थे. मरीजों ने बताया कि यहां एक महिला डॉक्टर की ड्यूटी थी. वहीं जब 12 बजे तक डॉक्टर नहीं आयीं, तो सभी मरीज लौट गये.
छुट्टी पर हैं हड्डी के डॉक्टर, कब से कर रहे हैं इंतजार
जीसी ब्लॉक में हड्डी रोग विभाग बनाया गया है. यहां कमरा नंबर 38 से 59 तक हड्डी रोग के मरीजों के लिए ओपीडी संचालित होते हैं. लेकिन 57, 45 और 46 नंबर चेंबर में डॉक्टर मौजूद नहीं हैं. 57 नंबर रूम के सामने मरीजों की लंबी लाइन लगी हुई है. सामने कुर्सी पर 8 से 10 मरीज बैठे हुए हैं.
शहर के बेला से आये मो रब्बान ने बताया कि कमरा नंबर 57 में एक डॉक्टर से उनका इलाज चलता है. बुधवार को संबंधित डॉक्टर का ओपीडी रहता है, इसलिए इलाज कराने आया हूं. सुबह 9 बजे से 11 बजे तक डॉक्टर के चेंबर के सामने इंतजार किया. कर्मचारियों ने कहा कि डॉक्टर छुट्टी पर हैं. नतीजा बिना इलाज के ही लौटना पड़ा.
अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, ब्लड जांच रिपोर्ट के लिए 15 से 20 दिन का दिया जाता है समय
रजिस्ट्रेशन काउंटर दोपहर 12:30 बजे तक खोले जाने का नियम है, लेकिन 12:10 तक काउंटर से कर्मी उठ जाते हैं
भीड़ कंट्रोल करने के लिए जवानों की तैनाती है, बावजूद बेतरतीब भीड़ से अफरा-तफरी का माहौल बना रहता है
ओपीडी में अपने समय से आधे व एक घंटे देरी से डॉक्टर आते हैं
इमरजेंसी में भर्ती होने के लिए मरीजों को परिसर में ही काफी देर इंतजार करना पड़ता है
इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने के समय कागजी प्रक्रिया पूरी करने में मरीजों के पसीने छूट जाते हैं
लाचार मरीज मजबूरी व सस्ते इलाज के लिए एम्स आते हैं, जिसका पूरा फायदा यहां पर बैठे डॉक्टर व कर्मचारी उठा रहे हैं.
— मिथलेश, मरीज
रजिस्ट्रेशन काउंटर पर गार्ड नये मरीज से पैसे मांगते हैं. पैथोलॉजी रिपोर्ट 15 दिन पर मिलती है.
— ब्रिज किशोर यादव, मरीज
भीड़ कंट्रोल करने के लिए सुरक्षा गार्ड को लगाया गया है. मरीजों की भीड़ काफी बढ़ गयी है. जिससे रिपोर्ट में समय लग रहा है. मरीजों को कोई परेशानी नहीं हो, इसे जल्द खत्म कर लिया जायेगा.
—डॉ पीके सिंह, डायरेक्टर, एम्स पटना
ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट 20 दिन बाद देते हैं
ब्लड टेस्ट, एक्स-रे, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड आदि जांच के लिए अलग से बिल्डिंग बनायी गयी है. मरीजों का आरोप है कि एचआईवी, हीमोग्लोबिन आदि जांच के लिए खून का सेंपल लिया जाता है. लेकिन रिपोर्ट के लिए 20 दिन बाद बुलाया जाता है. नतीजा मरीज का मर्ज बढ़ता जाता है.
इतना ही नहीं अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे व एमआरआई जांच के लिए मरीजों की फीस जमा कर ली जाती है और 10 से 15 दिन बाद नंबर आता है. इतना ही नहीं रजिस्ट्रेशन से पहले गार्ड द्वारा टोकन दिया जाता है. लेकिन कुछ ऐसे भी गार्ड हैं, जो टोकन देने से पहले मरीजों से रुपये की डिमांड करते हैं.
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