पटना : फिर घेरे में आया आसरा होम, एक सप्ताह में तीन संवासिनें पीएमसीएच में भर्ती
Updated at : 05 Oct 2018 6:07 AM (IST)
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18 साल की लीली कुमारी पीएमसीएच की इमरजेंसी में हुई भर्ती पटना : पटना के नेपाली नगर स्थित आसरा होम में संवासिनों का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. होम में रह रही संवासिनों की लगातार बिगड़ रही हालत के बाद वहां की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गये हैं. पिछले एक सप्ताह […]
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18 साल की लीली कुमारी पीएमसीएच की इमरजेंसी में हुई भर्ती
पटना : पटना के नेपाली नगर स्थित आसरा होम में संवासिनों का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. होम में रह रही संवासिनों की लगातार बिगड़ रही हालत के बाद वहां की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गये हैं. पिछले एक सप्ताह में तीन संवासिनें पीएमसीएच में इलाज के लिए पहुंच चुकी हैं.
वहीं गुरुवार को होम से 18 साल की लीली कुमारी नाम की एक लड़की को गंभीर स्थिति में पीएमसीएच में भर्ती कराया गया है. लीली को भर्ती कराने आयी एक महिला कर्मी की मानें तो लीली एक सप्ताह पहले ग्रिल तोड़ भागने का प्रयास कर रही थी. अचानक सुरक्षा कर्मचारियों की नजर पड़ी और उसको पकड़ लिया गया.
भागने के क्रम में वह चोटिल हो गयी. उसके कमर व हड्डी में गंभीर चोट आने से इलाज के लिए पहले राजवंशी नगर हड्डी अस्पताल ले जाया गया जहां सुधार नहीं होने के बाद गुरुवार को पीएमसीएच में लाकर भर्ती किया गया. लिली को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया है.
तीनों संवासिनों का चल रहा इलाज
क्या है मामला
राजीव नगर थाना क्षेत्र के नेपाली नगर स्थित आसरा होम में रहने वाली पूनम भारती और बेबी की मौत अगस्त महीने में हो गयी. ये दोनों संवासिन की मौत आसरा होम में ही हो गयी थी. इसके बाद होम द्वारा पीएमसीएच में इलाज कराने के लिए अगले दिन ले जाया गया. इस बात का खुलासा अस्पताल प्रशासन ने किया था. जांच में पाया गया था कि दोनों को डायरिया और तेज बुखार था.
अब तक 20 का हो चुका है इलाज
पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि पिछले एक सप्ताह के अंदर आसरा होम से लीली, बिलकिस और केसरी देवी नाम की तीन संवासिनों को पीएमसीएच में इलाज कराने के लिए लाया गया.
गुरुवार को लीली नाम की संवासिन को लाया गया. उसका एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, ब्लड आदि जांच किया गया है. केसरी व बिलकिस नाम की दोनों संवासिनों में खून की कमी और चक्कर आने आदि की समस्या है. तीनों का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में किया जा रहा है. पूरा इलाज नि:शुल्क किया जा रहा है. अब तक आसरा होम की बीस संवासिनों का इलाज कर उन्हें डिस्चार्ज किया जा चुका है.
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