एक अक्तूबर से ई-वे बिल में किये गये हैं कई महत्वपूर्ण बदलाव, जानें

Updated at : 04 Oct 2018 8:58 AM (IST)
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एक अक्तूबर से ई-वे बिल में किये गये हैं कई महत्वपूर्ण बदलाव, जानें

ई-वे बिल में अब ट्रांसपोर्टर का नाम देना अनिवार्य पटना : एक अक्तूबर से ई-वे बिल में कई महत्वपूर्ण बदलाव किये गये हैं. अब ई-वे बिल जारी करने के लिए उस ट्रांसपोर्टर का नाम देना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके माध्यम से माल भेजा जा रहा है. साथ ही ई-वे बिल में बड़ी खामियों […]

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ई-वे बिल में अब ट्रांसपोर्टर का नाम देना अनिवार्य
पटना : एक अक्तूबर से ई-वे बिल में कई महत्वपूर्ण बदलाव किये गये हैं. अब ई-वे बिल जारी करने के लिए उस ट्रांसपोर्टर का नाम देना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके माध्यम से माल भेजा जा रहा है. साथ ही ई-वे बिल में बड़ी खामियों की वजह से भारी जुर्माना चुकाना पड़ सकता है. ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि नये बदलावों के बारे में जानकारी प्राप्त कर लिया जाये. ई-वे बिल में हुए बदलाव को लेकर प्रभात खबर ने वरीय चार्टर्ड अकाउंटेंट राजेश कुमार खेतान से बातचीत की. प्रस्तुत है यह रिपोर्ट…
ट्रांसपोर्टर आईडी के बिना ई-वे बिल जारी नहीं किये जा सकेंगे
नये प्रावधान के तहत अब ट्रांसपोर्टर आईडी के बिना ई-वे बिल जारी नहीं किये जा सकेंगे. ई-वे बिल नियम 138 (3) के अनुसार अब पार्ट ए स्लिप जेनेरेट करने के लिए भी ट्रांसपोर्टर आईडी का भरा जाना जरूरी है.
इसको लेकर सबसे बड़ी समस्या उन लोगों को हो रही है, जो अब स्वयं की गाड़ियों से माल भेजना चाहते हैं. विभाग की ओर से प्रावधान जारी किया गया है जिसमें यह लिखा गया है कि अपनी गाड़ी से माल भेजने वाले व्यवसायी ट्रांसपोर्टर की आईडी के स्थान पर खुद का जीएसटीएन देकर ई-वे बिल जारी कर सकते हैं.
इसके लिए उन्हें अपने आप पार्ट-बी में वाहन की संख्या भरनी होगी. उसके बाद ही वह वस्तु का मूवमेंट कर सकेंगे. पहले कारोबारी ई-वे बिल जारी करने को लेकर पार्ट-ए स्लिप जेनेरेट करने के लिए पार्ट-बी को अधूरा छोड़ देते थे. पार्ट बी में ट्रांसपोर्टरों को जीएसटीएन से दी गयी आईडी और अन्य जानकारी देनी होती है. पहले इस जानकारी के बिना भी बिल जारी हो जाता था. लेकिन, अब पहले पार्ट बी को भर कर सेव करना होगा, तभी पार्ट-ए जेनेरेट होगा.
एक और बड़े बदलाव में ई-वे बिल की वैद्यता बढ़ाने के लिए दी गयी सुविधा बिल समाप्ति के आठ घंटे पहले से लेकर वैधता समाप्त होने के आठ घंटे बाद तक ही उपलब्ध होगी. इसी अवधि में ट्रांसपोर्टर की ओर से विशेष दी गयी परिस्थितियों में ई-वे बिल की अवधि बढ़ायी जा सकेगी.
कुछ छोटे-मोटे बदलाव भी किये गये हैं : कुछ छोटे-मोटे बदलाव भी किये गये हैं. जैसे अगर इनवाइस वैल्यू ई-वे बिल के वैल्यू से कम होगा, तो सिस्टम अब ई-वे बिल जारी करने ही नहीं देगा. पिन कोड गलत रहने की स्थिति में राज्य का चुनाव स्वतः व्यवसायी की ओर से किया जा सकेगा. ई-वे बिल जारी करते समय टैक्स रेट अथवा टैक्स की रकम अलग से देने की बाध्यता नहीं है.
मल्टी व्हीकल आॅप्शन भी यूजर के लिए चालू
एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब मल्टी व्हीकल आॅप्शन भी यूजर के लिए चालू कर दिया गया है. यह वैसे लोगों के लिए जरूरी है जिन्हें गुड्स के मूवमेंट के दौरान बड़ी वाहन के एक निर्धारित गंतव्य तक पहुंंचने के बाद छोटी गाड़ियों से आगे ले जाना होता है. लेकिन, उनके पास पूरे माल का एक ही इनवाइस होता है.
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