पटना : खुलेगा स्किन बैंक, मोटापे का होगा इलाज
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Sep 2018 5:52 AM
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पहला स्किन बैंक जो खुलेगा सरकारी अस्पताल में बिहार-झारखंड एसोसिएशन ऑफ प्लास्टिक सर्जन ऑफ इंडिया के दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन का किया गया आयोजन पटना : ब्लड बैंक व आई बैंक की तर्ज पर अब पटना मेडिकल अस्पताल में स्किन बैंक की सुविधा बहाल की जायेगी. यह स्किन बैंक बर्न के मरीजों की जान बचाने […]
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पहला स्किन बैंक जो खुलेगा सरकारी अस्पताल में
बिहार-झारखंड एसोसिएशन ऑफ प्लास्टिक सर्जन ऑफ इंडिया के दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन का किया गया आयोजन
पटना : ब्लड बैंक व आई बैंक की तर्ज पर अब पटना मेडिकल अस्पताल में स्किन बैंक की सुविधा बहाल की जायेगी. यह स्किन बैंक बर्न के मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा. सरकारी अस्पतालों में खुलने वाला यह पहला स्किन बैंक होगा.
प्रदेश में कई ऐसे लोग हैं जो आगजनी की घटनाओं के शिकार होते हैं. इनमें अस्पताल पहुंचने से पहले अधिकांश लोगों की मौत हो जाती है. ऐसे में अब यह सुविधा पीएमसीएच में मरीजों को मिलेगी. इसके अलावा मोटापा रोग से परेशान मरीजों का इलाज किया जायेगा. इसके लिए लिपो सेक्शन मशीन लायी जायेगी.
ये सभी सुविधाएं अगले दो से तीन महीने के अंदर मरीजों को मिलने लगेगी. यह कहना है स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का. पीएमसीएच में बिहार व झारखंड एसोसिएशन ऑफ प्लास्टिक सर्जन ऑफ इंडिया का दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे व पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ राजीव रंजन प्रसाद ने किया.
पीएमसीएच में 150 डॉक्टरों की मांग : सभा को संबोधित पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि पीएमसीएच में मरीजों को लोड काफी बढ़ गया है. बेहतर इलाज का नतीजा है कि यहां का ओपीडी व इमरजेंसी मिला कर मरीजों की संख्या 3 हजार से अधिक पहुंच रही है. मरीजों की तुलना में पीएमसीएच में डॉक्टरों की कमी चल रही है.
इसको देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से 150 सीनियर व जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की बहाली की मांग की गयी है. ताकि मरीजों का इलाज अच्छे से किया जा सके. इस मौके पर पीएमसीएच के प्रिंसिपल डॉ अजीत कुमार वर्मा, आर्य भट्ट विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ एके अग्रवाल, डॉ अभिजीत सिंह सहित कई डॉक्टर मौजूद थे.
मौत के छह घंटे के अंदर ली जाती है स्किन
दिल्ली आये डॉ पीएस भंडारी व डॉ अनूप धर ने बताया कि डोनर की मृत्य के छह से आठ घंटे के भीतर डेड बॉडी से स्किन के ऊपर की पतली लेयर निकाल कर उसे संरक्षित कर लिया जाता है. किसी मेजर बर्न पेसेंट, जिसकी ऊपर की पूरी परत जल गयी हो, उसकी जान बचाने के लिए इस स्किन का प्रयोग किया जाता है. यह स्किन मरीज को संक्रमण से बचाती है.
पीएमसीएच के प्लास्टिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.विद्यापति चौधरी ने बताया कि जन्मजात बीमारी जैसे कान ठीक से विकसित नहीं हो पाना, नाक को सुंदर और सुडौल बनाना, शरीर में अधिक बढ़ी हुई चर्बी को हटाना, सिर के झड़े हुए बाल पीआरपी विधि द्वारा उगाना, चेहरे व शरीर पर अनचाहे बाल को लेजर विधि से हटाना और युवतियों और महिलाओं के दाग-धब्बे एवं झुर्री जैसी बीमारी के मरीज पीएमसीएच में अधिक आते हैं. इन सभी बीमारियों का इलाज पीएमसीएच के प्लास्टिक विभाग में होता है.
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