मिड-डे-मील का हाल, कहीं शौचालय के पास किचेन तो कहीं है ही नहीं

Updated at : 10 Sep 2018 8:35 AM (IST)
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मिड-डे-मील का हाल, कहीं शौचालय के पास किचेन तो कहीं है ही नहीं

गोबर के ढेर और शौचालय के पास बना है किचेन, बच्चे यहीं खाते भी हैं, बिजली गुल होने पर नहीं बनता खाना राजधानी के सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना और स्वच्छता अभियान दोनों खस्ता हालत में हैं. राजधानी पटना में ही ऐसे तमाम स्कूल हैं, जहां क्लास रूम के निकट कूड़ा-करकट बिखरा पड़ा है. […]

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गोबर के ढेर और शौचालय के पास बना है किचेन, बच्चे यहीं खाते भी हैं, बिजली गुल होने पर नहीं बनता खाना
राजधानी के सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना और स्वच्छता अभियान दोनों खस्ता हालत में हैं. राजधानी पटना में ही ऐसे तमाम स्कूल हैं, जहां क्लास रूम के निकट कूड़ा-करकट बिखरा पड़ा है. कूड़ा-करकट, गोबर के ढेर व शौचालय के पास बैठ कर बच्चे मध्याह्न भोजन खाते हैं. ये हालात तब के हैं जब शिक्षा विभाग बरसात के इस मौसम में मध्याह्न भोजन, किचेन व भंडारण की स्वच्छता आदि सुनिश्चित करने के लिए अभियान चला रहा है. स्कूलों के शिक्षकों की मानें, तो उनकी भी मजबूरी है. भूमि, पैसा आदि के अभाव में भी विभागीय निर्देशों का यथासंभव पालन किया जा रहा है.
पढ़ें आनंद मिश्र की ग्राउंड रिपोर्ट.
अपना भवन नहीं है, प्रभारी शिक्षिका
के घर से बन कर आता है खाना
थमिक विद्यालय इंदिरा नगर तेतरी लॉज का अपना भवन नहीं है.राजापुल के निकटस्थ एक मंदिर के परिसर में पेड़ के नीचे कक्षा लगती है. एक कमरा है, जिसमें टेबुल-कुर्सी, चावल-दाल, आलू आदि रखा जाता है. विद्यालय की अपनी जमीन व भवन नहीं है. किचेन या शेड भी नहीं है. इस कारण स्कूल की प्रभारी शिक्षिका पुनाईचक स्थित अपने घर में ही मध्याह्न भोजन (एमडीएम) बनवाती हैं. वहां से ठेला से प्रतिदिन सौ रुपया किराया देकर मध्याह्न भोजन लाया जाता है. स्कूल में जहां कक्षा चलती है वहीं मध्याह्न भोजन बंटता है. उसके बाद बच्चे पास में ही बैठ कर खाते हैं, जहां बगल में गोबर का ढेर व शौचालय बना है. स्कूल में नामांकित बच्चों की संख्या 75 है, जबकि प्रतिदिन औसतन उपस्थिति 50 के करीब होती है.
पकाने के लिए नहीं है जगह
स्कूल में खाना पकाने के लिए जगह नहीं है. चूंकि मेरे घर में बहुत जगह है. इसलिए अपने घर में ही मध्याह्न भोजन बनवाती हूं.
वहां से अपने खर्च पर प्रतिदिन ठेला से
मध्याह्न भोजन स्कूल मंगाया जाता है. बच्चों को हर हाल में मध्याह्न भोजन देना है, इसलिए यह व्यवस्था की है.
सुधा रानी, प्रभारी शिक्षिका, प्रावि इंदिरा नगर तेतरी लॉज
शौचालय और किचेन आमने-सामने बच्चों में वहीं बंटता है मिड-डे-मील
जकीय कन्या मध्य विद्यालय अदालतगंज तारामंडल का भी तीन मंजिला भवन है. स्कूल में कमरों की कमी नहीं है. लेकिन भूतल पर एक छोटे से कमरे में किचेन बनाया गया है, जिसके पास ही शौचालय व स्नानागार है.
किचेन में न खिड़की है न दरवाजा. उसी में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) पकाया जाता है. उसके बाद बाहर पोर्टिको में बच्चों के बीच बांटा जाता है. स्कूल भवन के बीच में मैदान में चारों तरफ कूड़ा-कर्कट बिखरा पड़ा है. इसी मैदान से सटे पोर्टिको में बैठ कर बच्चे मध्याह्न भोजन खाते हैं. साफ-सफाई के बारे में बताया जाता है कि फंड के अभाव में यह स्थिति बनी हुई है. फंड आने पर ही साफ-सफाई संभव है. स्कूल में नामांकित बच्चों की संख्या 500 से अधिक है, जबकि हर दिन करीब 350-400 बच्चे स्कूल आते हैं.
स्कूल के पास नहीं है फंड
स्कूल में मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता
पर हम पूरा ध्यान देते हैं. गुरु पर्व केदौरान किचेन के पास शौचालय व स्नानागार बनाया गया था.
रही साफ-सफाई की बात, तो स्कूल के पास फंड नहीं है. बगैर फंड के साफ-सफाई कराना संभव नहीं है.
कुमारी सुनैना, प्रभारी शिक्षिका, राजकीय कन्या मध्य विद्यालय अदालतगंज तारामंडल
तीसरी मंजिल पर किचेन, पानी नहीं रहने के कारण भूखे रहे बच्चे
मध्य विद्यालय राजापुल मैनपुरा
न मंजिला भवन वाले मध्य विद्यालय राजापुल मैनपुरा में प्रवेश करते ही गेट पर पेशाब की दुर्गंध आती है. बड़े भवन वाले इस स्कूल की तीसरी मंजिल पर एक छोटे से कमरे में किचेन है, जहां दो शिफ्ट के बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन पकता है. किचेन में ही बर्तन धोने का चबूतरा है.
शनिवार को भी दो शिफ्ट में स्कूल चला, लेकिन पहली शिफ्ट के बच्चों को भोजन नहीं मिला. बिजली नहीं थी. इस कारण मोटर से पानी ऊपर नहीं चढ़ सका. पानी के अभाव में सामग्री होते हुए भी भोजन नहीं बना. इस तरह पहली शिफ्ट के करीब 200 बच्चे मध्याह्न भोजन खाये बगैर ही घर चले गये. हालांकि दूसरी शिफ्ट में बिजली आने पर मध्याह्न भोजन पका और इस शिफ्ट के बच्चों को खाना मिला. इस शिफ्ट में भी नियमित रूप से स्कूल आने वाले करीब 200 बच्चे हैं.
हैंडपंप नहीं रहने से परेशानी
पहली शिफ्ट में बिजली नहीं थी. इस कारण मध्याह्न भोजन नहीं पका. हालांकि दूसरी शिफ्ट के समय बिजली आ गयी थी. दूसरी शिफ्ट के बच्चों को मध्याह्न भोजन खिलाया गया.
100-150 मीटर की परिधि में कोई हैंडपंप भी नहीं है, इस कारण बिजली नहीं रहने पर पानी की व्यवस्था नहीं हो पाती है.
क्लोटिल्डा टोप्पो, प्रभारी शिक्षिका, म वि राजापुल मैनपुरा
कहीं फल बंटा, कहीं नहीं एमडीएम
की राशि
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