एक से दूसरे वार्ड में पैदल जाने को मजबूर मरीज

Updated at : 21 Aug 2018 9:30 AM (IST)
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एक से दूसरे वार्ड में पैदल जाने को मजबूर मरीज

दिखावा बन कर रह गयी ई-रिक्शा की सुविधा पटना : पीएमसीएच में मरीजों के लिए रोगी वाहन ई-रिक्शा की नि:शुल्क सुविधा महज दिखावा साबित हो रही है. मरीजों के परिजनों से इस सेवा के एवज में मनमाना किराया वसूलाजा रहा है. इसके कारण परिजन एक-एक किमी टूटी व्हीलचेयर व स्ट्रेचर पर मरीजों को एक सेदूसरे […]

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दिखावा बन कर रह गयी ई-रिक्शा की सुविधा
पटना : पीएमसीएच में मरीजों के लिए रोगी वाहन ई-रिक्शा की नि:शुल्क सुविधा महज दिखावा साबित हो रही है. मरीजों के परिजनों से इस सेवा के एवज में मनमाना किराया वसूलाजा रहा है. इसके कारण परिजन एक-एक किमी टूटी व्हीलचेयर व स्ट्रेचर पर मरीजों को एक सेदूसरे वार्ड में ले जाने को मजबूर हैं. वहीं, व्हीलचेयर की सुविधा नहीं मिलने पर प्राइवेट ऑटो व रिक्शाकी सुविधा ली जाती है. कुव्यवस्था का आलम यह कि मरीजों को यूरिन बैग हाथ में थमा कर दूसरे वार्ड के लिए भेज दिया जाता है. परिजनों का आरोप है कि जब ई-रिक्शा बुक करने के लिएवार्ड के जिम्मेदार अधिकारी से बातकी जाती है, तो सीधे ड्राइवर सेसंपर्क करने को कहते हैं. वहीं, जब ड्राइवर से बात की जाती है, तो रुपये की मांग जाती है, जबकि मरीजों के लिए यह सेवा नि:शुल्क है. इसका फायदा प्राइवेट ऑटो व रिक्शा वाले उठाते हैं.
परिजनों से वसूला जाता है मनमाना किराया, प्राइवेट वाहनों का लेना पड़ता है सहारा
क्या कहते हैं मरीज के परिजन
पीएमसीएच के शिशु रोग विभाग में कौशल कुमार (10) भर्ती है. सुबह राउंड पर आये डॉक्टर ने चेस्ट की समस्या बता कर राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक में दिखाने की सलाह दी. दूसरे वार्ड में जाने के लिए परिजन जब ई-रिक्शा बुलाने गये, तो रुपये की मांग की गयी. ऐसे में कौशल को उसके पिता अपने कंधे पर रख कर राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक पहुंचे. कौशल के पिता मुनमुन कुमार ने बताया कि जब ई रिक्शा के ड्राइवर से वार्ड में जाने को कहा तो उसने 20 रुपये मांगे. लेकिन मेरे पास रुपये नहीं थे इसलिए मैं खुद अपने बेटे को कंधे पर रख वार्ड तक ले गया.
एक नजर में ई-रिक्शा सुविधा
7 जून, 2015 को रोगी कल्याण समिति की बैठक में ई-रिक्शा चलाने के प्रस्ताव पर लगी मुहर
2016 से पीएमसीएच में ई-रिक्शा की हुई शुरुआत
एक ई-रिक्शा के ड्राइवर व मेंटनेंस सहित हर महीने 10 हजार रुपये का खर्च आता है
रोजाना 200 मरीज जाते हैं ई रिक्शा
रोजाना करीब 500 मरीजों को जरूरत पड़ती है ई रिक्शा की
कुल चार ई-रिक्शा पीएमसीएच में चलायी जाती हैं
रोगी वाहनों की संख्या बढ़ेगी
अस्पताल में मरीजों की सुविधा को देखते हुए रोगी वाहन की सुविधा नि:शुल्क की गयी है. रुपये मांगने की अभी तक कोई शिकायत मेरे पास नहीं आयी है. हालांकि, मरीजों की भीड़ अधिक होने के चलते ई-रिक्शा पर दबाव रहता है. अस्पताल में रोगी वाहनों की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया गया है. ऐसे में बहुत जल्द मरीजों की परेशानी खत्म हो जायेगी.
– डॉ अजीत कुमार वर्मा, प्रिंसिपल, पीएमसीएच
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