पटना : नामांकन समाप्त, पर अब भी भटक रहे छात्र

Updated at : 19 Aug 2018 5:53 AM (IST)
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पटना : नामांकन समाप्त, पर अब भी भटक रहे छात्र

अभ्यर्थियों ने राजभवन तक मार्च कर सौंपा ज्ञापन, एनओयू पर लगाया आरोप पटना : राज्य स्तरीय बीएड नामांकन की प्रक्रिया तो भले ही समाप्त हो गयी, लेकिन जिन छात्रों का अल्पसंख्यक कॉलेजों में दाखिले के लिए चयन किया गया था, वे अभी भी भटक रहे हैं. वहीं कई छात्रों का नामांकन किसी न किसी कारण […]

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अभ्यर्थियों ने राजभवन तक मार्च कर सौंपा ज्ञापन, एनओयू पर लगाया आरोप
पटना : राज्य स्तरीय बीएड नामांकन की प्रक्रिया तो भले ही समाप्त हो गयी, लेकिन जिन छात्रों का अल्पसंख्यक कॉलेजों में दाखिले के लिए चयन किया गया था, वे अभी भी भटक रहे हैं. वहीं कई छात्रों का नामांकन किसी न किसी कारण से पेंडिंग रह गया है. छात्रों ने कॉर्डिनेटिंग यूनिवर्सिटी एनओयू पर नामांकन प्रक्रिया को लेकर कई आरोप लगाये हैं.
छात्रों ने नामांकन में मेरिट लिस्ट का ध्यान नहीं दिये जाने, लिस्ट के अनुसार कॉलेज का एलॉटमेंट नहीं किये जाने समेत कई तरह की शिकायतें लेकर शनिवार को कारगिल चौक से राजभवन तक मार्च किया. छात्रों ने अपनी शिकायतें राजभवन को एक ज्ञापन के माध्यम से सौंपते हुए समाधान की मांग की. उन्होंने कहा कि जब तक शिकायतों का समाधान नहीं होता, हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे.
छात्रों ने सीट अलॉटमेंट में लगाया गड़बड़ी का आरोप, कहा-कम मार्क्सवालों को मिला मनपसंद कॉलेज
छात्रों ने आरोप लगाये कि जिस प्रक्रिया के तहत बीएड के लिए सीटों का एलॉटमेंट हुआ, उसमें कई तरह की गड़बड़ियां हुई हैं. छात्रों ने कहा कि एनओयू को रैंक वाइज बुलाया जाना चाहिए था तो छात्रों को रॉल नंबर वाइज बुलाया गया.
जो लिस्ट छात्रों के द्वारा दी गयी थी उसमें कई छात्रों के द्वारा की गयी कॉलेजों की च्वाइस फिलिंग खुद व खुद बदल गयी. कहा गया था कि च्वाइस नहीं मिला तो छात्रों को उसके ही जिले में कोई दूसरा कॉलेज एलॉट किया जायेगा, लेकिन यह भी नहीं हुआ और दूसरे-तीसरे जिले में छात्रों को सीट एलॉटमेंट कर दिया गया. दूर दराज जाकर छात्र पढ़ने को तैयार नहीं थे और उन्होंने नामांकन नहीं लिया. वे सीटें खाली ही रह गयीं. एबसेंट व पेंडिंग डॉक्यूमेंट्स वालों का कोई हल नहीं निकाला गया. छात्रों ने यह भी आरोप लगाये कि ज्यादा मार्क्स वाले को मनपसंद कॉलेज नहीं मिले और कम मार्क्स वालों को मनपसंद कॉलेज दे दिये गये.
एलॉटमेंट का क्या आधार था, छात्रों को कुछ पता नहीं चल रहा है. बस जैसे-तैसे किसी तरह से सीट एलॉट कर दिया गया. जिनकी मजबूरी थी, उन्होंने दूर-दराज भी जाकर एडमिशन ले लिया और बाकी नामांकन से वंचित रह गये.
अल्पसंख्यक कॉलेजों पर हो रही कानूनी कार्रवाई
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार व नोडल ऑफिसर एसपी सिन्हा ने बताया कि जहां तक अल्पसंख्यक कॉलेजों का मामला है लीगल नोटिस के बाद अब उन्हें कोर्ट में घसीटने की तैयारी चल रही है. एक दो दिन में उन पर सुप्रीम कोर्ट में केस दर्ज हो जायेगा. 20 अगस्त तक कितनी सीटों पर नामांकन हुआ कितनी खाली रह गयीं उसकी रिपोर्ट आ जायेगी. इसे आगे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जायेगा. कोर्ट जो निर्णय लेगी उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जायेगी.
को-ऑर्डिनेटिंग यूनिवर्सिटी ने आरोपों को बताया निराधार
एक तरफ छात्रों ने कई तरह के आरोप को-ऑर्डिनेटिंग यूनिवर्सिटी पर लगाये हैं तो दूसरी तरफ यूनिवर्सिटी ने सारे आरोपों को निराधार बताया है. यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार व नोडल ऑफिसर एसपी सिन्हा के अनुसार सीटों का एलॉटमेंट छात्रों के मेरिट व आरक्षण के आधार पर हुआ है.
कॉलेजों की सूची कहीं नहीं बदली गयी है. यह गलत आरोप है. लिस्ट या तो स्वयं छात्रों के द्वारा सुधार किया गया होगा या फिर किसी बाहरी स्रोत के द्वारा ही बदला जा सकता है. विवि के द्वारा किसी तरह की कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं हुई है. छात्रों को एलॉटमेंट की जानकारी एसएमएस व ई-मेल के जरिये भी दी गयी थी. तब छात्रों ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं करायी.
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