नीतीश कैबिनेट का फैसला : विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षकों-कर्मियों की वेतन विसंगति जल्द होगी दूर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Jul 2018 8:52 PM
पटना : बिहार में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की वेतन विसंगति जल्दी ही दूर होगी. इसके लिए राज्य सरकार ने राजस्व परिषद के अध्यक्ष की अगुवाई में वेतन विसंगति निराकरण समिति का गठन किया है. यह समिति छह माह में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी. समिति में शिक्षा, वित्त आदि विभागों के अधिकारियों […]
पटना : बिहार में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की वेतन विसंगति जल्दी ही दूर होगी. इसके लिए राज्य सरकार ने राजस्व परिषद के अध्यक्ष की अगुवाई में वेतन विसंगति निराकरण समिति का गठन किया है. यह समिति छह माह में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी. समिति में शिक्षा, वित्त आदि विभागों के अधिकारियों को रखा गया है. वित्त विभाग के इस प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मंगलवार को मुहर लगायी.
मंगलवार की शाम छह बजे से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मुख्य सचिवालय स्थित मंत्रिमंडल सभागार में मंत्रिपरिषद की बैठक शुरू हुई. बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने बताया कि बैठक में कुल 15 प्रस्तावों को स्वीकृति मिली. इसमें सहकारिता विभाग के तीन प्रस्ताव शामिल हैं. सहकारिता विभाग के प्रस्तावों में सबसे महत्वपूर्ण ड्रायर सहित विद्युत चावल मिल स्थापित करने का प्रस्ताव रहा.
कृषि रोड मैप के तहत 2017-22 तक के लिए पैक्स/व्यापार मंडलों में 77.45 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है. वर्ष 2018-19 में 115 विद्युत आधारित चावल मिल ड्रायर सहित स्थापित होगा. दो मीट्रिक टन प्रति घंटा क्षमता के कुल 260 मिलों की स्थापना होनी है. इसमें केंद्रांश और राज्यांश प्राप्त कर पैक्स/व्यापार मंडलों को 50 प्रतिशत अनुदान तथा 50 प्रतिशत चक्रीय पूंजी (ऋण) के रूप में दिया जायेगा. कृषि रोड मैप 2017-22 के तहत पैक्स/व्यापार मंडलों में वित्तीय वर्ष 2018-22 तक 200, 500 या एक हजार मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम बनाये जायेंगे.
इसके लिए समितियों को 50 प्रतिशत अनुदान तथा 50 प्रतिशत चक्रीय पूंजी (ऋण) के रूप में वर्षवार 560 करोड़ रुपये व्यय की स्वीकृति मिली है. कृषि रोड मैप के तहत ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कार्य करने के लिए बिहार राज्य सहकारी बैंक लि. को राज्य योजना के तहत 800 करोड़ रुपये कार्यशील पूंजी के लिए सशर्त स्वीकृति दी गयी.
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