कड़ी सजा का प्रावधान होता तो बिहार के मुजफ्फरपुर जैसी घटना नहीं होती : मेनका गांधी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Jul 2018 7:26 PM
नयी दिल्ली : बिहार के मुजफ्फरपुर के नारी निकेतन में लड़कियों के कथित यौनशोषण की घटना पर विभिन्न वर्गों की चिंताओं के बीच महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने आज कहा कि ऐसे अपराधों के संदर्भ में अगर इस तरह के संरक्षण गृहों के संचालकों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान होता तो […]
नयी दिल्ली : बिहार के मुजफ्फरपुर के नारी निकेतन में लड़कियों के कथित यौनशोषण की घटना पर विभिन्न वर्गों की चिंताओं के बीच महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने आज कहा कि ऐसे अपराधों के संदर्भ में अगर इस तरह के संरक्षण गृहों के संचालकों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान होता तो ऐसी घटना नहीं होती. मंत्री ने ‘व्यक्तियों का दुर्व्यापार (निवारण, संरक्षण और पुनर्वास) विधेयक-2018′ पर चर्चा का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की.
मेनका गांधी ने इस प्रस्तावित कानून में महिलाओं एवं बच्चों की तस्करी के अपराधियों के लिए कड़ी सजा प्रावधान का हवाला दिया और कहा, मुजफ्फरपुर की घटना हुई है क्योंकि सख्त सजा का प्रावधान नहीं था. मेनका गांधी ने सांसदों से कहा कि वे अपने इलाकों में सभी बालगृहों एवं सुधार गृहों का दौरा करें और अपनी राय से मंत्रालय को अवगत कराएं. उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर की समितियों में सांसदों को भी शामिल किया जायेगा.
इससे पहले, विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए राजद के जयप्रकाश नारायण यादव ने कहा कि मुजफ्फरपुर की घटना मानव तस्करी की बहुत बड़ी घटना है और बेटियों की सुरक्षा करने में बिहार सरकार विफल रही है. मुजफ्फरपुर की इस घटना को लेकर बिहार सरकार ने सीबीआई जांच की अनुशंसा की है.
उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरपुर स्थित नारी निकेतन में लड़कियों के कथित यौन शोषण और बलात्कार का मुद्दा पिछले कुछ दिनों से संसद के दोनों सदनों में उठ रहा है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा था कि राज्य सरकार की ओर से सिफारिश किये जाने पर इस मामले की सीबीआई जांच कराने पर विचार किया जायेगा.
लोकसभा में मंगलवार को शून्यकाल के दौरान कांग्रेस की रंजीत रंजन ने यह मुद्दा उठाया और कहा कि कहा कि यह एक गंभीर घटना है. मुजफ्फरपुर स्थित बालिका सुधार गृह में कई बालिकाओं के साथ बलात्कार हुआ. पीड़ितों में से एक की उम्र तो केवल सात वर्ष है. उन्होंने कहा कि इस मामले में 13 संस्थाओं पर आरोप लगे हैं. इनमें सफेदपोश लोग भी शामिल हैं. मधेपुरा से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने भी यह मुद्दा लोकसभा में उठाया था.
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