पटना : लोहिया स्वच्छता योजना में अब तक 59% घरों में ही बन पाये शौचालय
Updated at : 23 Jul 2018 7:33 AM (IST)
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पटना : राज्य में ‘शौचालय निर्माण, घर का सम्मान’ मिशन को पूरा करने के लिए लोहिया स्वच्छ योजना शुरू की गयी है. इसके तहत 2 अक्तूबर 2019 तक सभी घरों में शौचालय निर्माण का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. लेकिन इनके निर्माण की स्थिति काफी लचर है. जो निर्माण हो भी रहे […]
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पटना : राज्य में ‘शौचालय निर्माण, घर का सम्मान’ मिशन को पूरा करने के लिए लोहिया स्वच्छ योजना शुरू की गयी है. इसके तहत 2 अक्तूबर 2019 तक सभी घरों में शौचालय निर्माण का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
लेकिन इनके निर्माण की स्थिति काफी लचर है. जो निर्माण हो भी रहे हैं, उनकी गुणवत्ता बेहद खराब है. इसके तहत अब तक लक्ष्य से 87 लाख शौचालय राज्य में कम बने हैं. अब तक राज्य में 59.60 प्रतिशत परिवार या घरों में ही शौचालय बन पाये हैं. 81 लाख 13 हजार परिवार ऐसे हैं, जो शौचालय विहीन हैं.
वर्ष 2014 से अब तक 57 लाख शौचालयों का ही निर्माण कार्य पूर्ण हो पाया है. करीब 60 फीसदी घरों में शौचालय बनने के बाद भी बड़ी संख्या में ऐसी पंचायतें हैं, जहां के सभी घरों में शौचालय नहीं बन पाये हैं. आठ हजार 462 पंचायतों में महज 1213 पंचायतें ही ऐसी हैं, जो ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) बन पायी हैं. इसी तरह ओडीएफ गांवों की संख्या छह हजार 145 और प्रखंडों की संख्या 534 में महज 38 है.
शौचालय निर्माण कराने में रोहतास जिला सबसे आगे 99 फीसदी है. शेखपुरा में 97 प्रतिशत और सीतामढ़ी में 87 फीसदी घरों में शौचालय का निर्माण हो गया है.
हालांकि, अभी सीतामढ़ी इन सबसे आगे निकल गया है. वहीं दूसरी तरफ समस्तीपुर में सबसे कम 45 फीसदी शौचालय का ही निर्माण हो सका है. इसी तरह औरंगाबाद में 46 फीसदी और अररिया में 47 फीसदी शौचालय का ही निर्माण हो पाया है.
राज्य के तीन प्रखंडों कुशेश्वरस्थान (दरभंगा), अलौली (खगड़िया) और हसनपुर (समस्तीपुर) में शौचालय निर्माण की गति सबसे धीमी है. राज्य में शौचालय निर्माण की गति अच्छी नहीं है. इस गति से अगर निर्माण होता रहा तो 2 अक्तूबर तक राज्य के सभी एक करोड़ 69 लाख परिवारों के घरों में शौचालय का निर्माण करा देने का लक्ष्य पूरा होना संभव नहीं दिख रहा है.
जीविका को सौंपी गयी है िजम्मेदारी
वर्ष 2016 से लोहिया शौचालय निर्माण योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ग्रामीण विकास विभाग के तहत जीविका को सौंपी गयी है. इससे पहले यह योजना पीएचईडी के तहत चलती थी. तब इसकी स्थिति ज्यादा बदतर थी. वर्ष 2014-15 में महज 20.16 प्रतिशत ही शौचालय का निर्माण हो पाया था. परंतु जीविका के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों की मदद से इसके प्रति जागरूकता फैलाने में काफी मदद हुई और इसके निर्माण की गति बढ़ी है. लेकिन, अब भी यह उतनी रफ्तार नहीं पकड़ पाया है.
इस काम को मिशन मोड पर कराया जा रहा है. मार्च 2019 तक 80 फीसदी लक्ष्य प्राप्त करने का टारगेट सभी पदाधिकारियों को दिया गया है. इसकी समीक्षा सशक्त कर दी गयी है, ताकि हर हाल में 2 अक्तूबर 2019 तक राज्य के सभी घर में शौचालय का निर्माण पूरा कर लिया जाये. यह टारगेट प्राप्त कर लिया जायेगा.
—श्रवण कुमार, मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग
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