मापदंडों की अनदेखी कर चल रहे आवासीय स्कूल

Updated at : 22 Jul 2018 4:16 AM (IST)
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मापदंडों की अनदेखी कर चल रहे आवासीय स्कूल

पटना : राजधानी व आसपास के क्षेत्रों में ऐसे कई आवासीय स्कूल चल रहे हैं, जहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुविधा के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जाती है. वहीं, सुविधाओं के नाम पर लंबी फेहरिस्त अभिभावकों के सामने रखी जाती है, लेकिन वास्तविकता उससे अलग होती है. जिले के बाईपास, फतुहा […]

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पटना : राजधानी व आसपास के क्षेत्रों में ऐसे कई आवासीय स्कूल चल रहे हैं, जहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुविधा के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जाती है. वहीं, सुविधाओं के नाम पर लंबी फेहरिस्त अभिभावकों के सामने रखी जाती है, लेकिन वास्तविकता उससे अलग होती है.
जिले के बाईपास, फतुहा समेत राज्य के विभिन्न जिलों में ऐसे स्कूलों का संचालन किया जा रहा है, जिनके भवनों का निर्माण मानकों के अनुसार नहीं किया गया है. कहीं जर्जर तो कहीं किराये के भवन में स्कूल का संचालन किया जा रहा है. यहां तक कि वहां विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में न तो बेड हैं और न ही शौचालय. पेयजल की भी समुचित व्यवस्था नहीं है.
समुचित सुरक्षा व्यवस्था नहीं : इन स्कूलों में सुरक्षा की भी समुचित व्यवस्था नहीं है. कई स्कूल हॉस्टलों में नर्सिंग स्टाफ की भी नियुक्ति नहीं की गयी है. इसके अलावा पर्याप्त संख्या में न सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और न ही चतुर्थवर्गीय कर्मी, सहायक स्टाफ व सुरक्षा प्रहरियों का पुलिस वेरिफिकेशन और न ही साइकोमेट्रिक टेस्ट कराया जाता है.
जबकि, अधिकांश स्कूलों में हो रही घटनाओं में सहायक स्टाफ, गार्ड, सफाईकर्मी या ड्राइवर-कंडक्टर की संलिप्तता प्रकाश में आ रही है. हाल ही में फतुहा के देवीचक स्थित शेफाली इंटरनेशनल स्कूल की घटना को देखें, तो उसमें भी सुरक्षा प्रहरी की संलिप्तता की बात कही जा रही है.
सीबीएसई की है गाइडलाइन : उल्लेखनीय है कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सीबीएसई की ओर से पिछले सितंबर माह में दिशा-निर्देश जारी किया गया था, जिसमें कहा गया है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह स्कूल प्रशासन की है.
यह भी कहा गया है कि यह हर बच्चे का अधिकार है कि वह भयमुक्त माहौल व सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करे. किसी तरह से उसका शारीरिक या मानसिक शोषण या प्रताड़ना न हो. बावजूद बोर्ड के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन नहीं किया जा रहा है.
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