लोकतंत्र पर 1977 जैसा खतरा, निर्णायक होगा लोकसभा चुनाव : दीपांकर भट्टाचार्य
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Jul 2018 8:28 AM (IST)
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पटना : लोकतंत्र पर वर्ष 1977 जैसा खतरा मंडरा रहा है. महिलाओं, छात्राओं और दलितों पर बर्बर हिंसा हो रही है. किसानों की मांगें ठुकरायी जा रही हैं. भ्रष्टाचार चरम पर है. बेरोजगारी बढ़ रही है. राजनीति के नाम पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण किया जा रहा है. ऐसे में वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव निर्णायक होगा. […]
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पटना : लोकतंत्र पर वर्ष 1977 जैसा खतरा मंडरा रहा है. महिलाओं, छात्राओं और दलितों पर बर्बर हिंसा हो रही है. किसानों की मांगें ठुकरायी जा रही हैं. भ्रष्टाचार चरम पर है. बेरोजगारी बढ़ रही है. राजनीति के नाम पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण किया जा रहा है. ऐसे में वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव निर्णायक होगा. ये बातें भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहीं. वे सोमवार को संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि 27 सितंबर को गांधी मैदान में बड़ी रैली का आयोजन किया जायेगा. इसके लिए अभियान की शुरुआत 26 जून को हो चुकी है.
महागठबंधन महाफ्लॉप साबित हुआ, क्योंकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसे छोड़कर चले गये. इसलिए अगले लोकसभा चुनाव के लिए गहनता से विचार कर ही किसी भी गठबंधन का निर्माण किया जायेगा. उन्होंने कहा कि सभी वामदलों के बीच इसे लेकर सहमति बनी है.
वामदलों के बीच का गठबंधन केवल चुनाव के लिए ही नहीं बल्कि हमेशा के लिए है. लोकसभा चुनाव को लेकर राजद और कांग्रेस से गठबंधन करने की बाबत उनसे पूछा गया कि क्या ऐसे भ्रष्टाचारी दलों से वे गठबंधन करेंगे? इस पर दीपांकर ने कहा कि सबसे भ्रष्ट पार्टी तो देश में राज कर रही है. ऐसे में भ्रष्टाचार और अन्य चीजों से बड़ा मुद्दा लोकतंत्र को बचाना है.
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