नयी तकनीक से 24 घंटे बाद भी लिवर में रहेगी जान, ट्रांसप्लांट में मिलेगी सफलता
Updated at : 09 Jul 2018 5:40 AM (IST)
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पटना : लिवर ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे मरीजों के लिए राहत की खबर आयी है. अब किसी डोनर से लिवर मिलने के बाद उसे ट्रांसप्लांट करने के लिए डॉक्टरों को 24 घंटे का समय मिल जायेगा. अभी तक डोनर के शरीर से लिवर निकालने के बाद उसे छह घंटे के भीतर मरीज के शरीर […]
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पटना : लिवर ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे मरीजों के लिए राहत की खबर आयी है. अब किसी डोनर से लिवर मिलने के बाद उसे ट्रांसप्लांट करने के लिए डॉक्टरों को 24 घंटे का समय मिल जायेगा. अभी तक डोनर के शरीर से लिवर निकालने के बाद उसे छह घंटे के भीतर मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट करना पड़ता था.
बहुत मुश्किल से डोनर मिलने के बावजूद समय की कमी के कारण लगभग 20 फीसदी लिवर प्रत्यारोपण के पहले ही खराब हो जाते थे. इसके लिए आईजीआईएमएस प्रशासन नोर्मोथर्मिक मशीन परफ्यूजन (एनएमपी) लाने जा रही है. यह मशीन लिवर को निकाले जाने के 24 घंटे बाद तक जीवित रखेगी. अस्पताल प्रशासन के इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गयी है.
इस तरह से काम करेगी यह तकनीक : आईजीआईएमएस के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के डॉ आशीष झा ने बताया कि एनएमपी तकनीक लिवर कोशिकाओं को खराब होने से बचाती है. ऑपरेशन के लिए मरीज के तैयार होने तक लिवर को जिंदा रखती है. यह तकनीक ऑक्सीजन युक्त ब्लड और पोषक तत्वों को पंप करती है और बर्फ में लिवर के संरक्षण से जुड़ी ग्रॉफ्ट इंंज्यूरी के खतरे पर काबू पाने में मदद करती है. यह मशीन ब्रेन डेड मरीज के द्वारा दान किये गये नये लिवर को लंबे समय तक जीवित रखने में मदद करेगी.
लिवर को एक से दूसरी जगह ले जाने में मिलेगी मदद
आईजीआईएमएस के डॉक्टरों की मानें, तो विदेशों में इस तकनीक का इस्तेमाल पिछले 10 साल से किया जा रहा है. इस तकनीक के जरिये लिवर को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में मदद मिलेगी. क्योंकि, यह मशीन 24 घंटे तक अंग को जीवित रख सकती है.
इस तकनीक का दूसरा फायदा यह है कि दान दिये गये अंगों में हल्का-सा अंग नुकसान होने पर भी इनका प्रत्यारोपण नहीं किया जाता था. लेकिन, अब इस तकनीक का उपयोग करके इन्हें पुनर्जीवित किया जा सकता है. डॉक्टरों की मानें, तो इससे 30 प्रतिशत अधिक ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा.
दिल्ली के विशेषज्ञ करेंगे 20 ट्रांसप्लांट
आईजीआईएमएस में करीब 12 से 15 लाख के अंदर ट्रांसप्लांट किया जायेगा. हालांकि, गरीब मरीजों को राहत मिले, इसके लिए सरकार से अनुदान की राशि दिलाने की बात चल रही है. अस्पताल प्रशासन की मानें, तो पहले लिवर ट्रांसप्लांट आईएलबीएस के विशेषज्ञ करेंगे. करीब 20 ट्रांसप्लांट होने के बाद संस्थान के विशेषज्ञ लिवर ट्रांसप्लांट करना शुरू करेंगे. आईजीआईएमएस में किडनी ट्रांसप्लांट की तर्ज पर इसे भी शुरू किये जाने की तैयारी की जा रही है. एक माह के अंदर ट्रांसप्लांट शुरू कर दिया जायेगा.
क्या कहते हैं अधिकारी
नोर्मोथर्मिक मशीन परफ्यूजन (एनएमपी) तकनीक से लिवर ट्रांसप्लांट करने की तैयारी अस्पताल प्रशासन कर रहा है. एनएमपी मशीन के इस्तेमाल को लेकर अस्पताल प्रशासन ने प्रस्ताव बना कर भेजा था. एनएमपी तकनीक से 20 प्रतिशत लिवर खराब होने से बचायी जा सकती है. साथ ही 24 घंटे तक लिवर को जिंदा रखा जा सकता है. आईजीआईएमएस प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल होगा, जहां नयी तकनीक से लिवर का ट्रांसप्लांट किया जायेगा.
—डॉ मनीष मंडल, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, आईजीआईएमएस
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