एआईबीओए के अनुसार 56 ग्रामीण बैंकों का अस्तित्व है खतरे में

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Jul 2018 9:09 AM

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फिलहाल 56 ग्रामीण बैंकों की 21398 शाखाएं 28 राज्यों के 676 जिलों में कार्यरत सुबोध कुमार नंदन पटना : गरीब ग्रामीण जनता की आर्थिक सामाजिक प्रगति के लिए 2 अक्तूबर 1975 को ग्रामीण बैंकों की स्थापना की गयी थी. अपने चार दशक की स्थापना अवधि में आज शाखाओं के मामले में ग्रामीण बैंक देश का […]

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फिलहाल 56 ग्रामीण बैंकों की 21398 शाखाएं 28 राज्यों के 676 जिलों में कार्यरत
सुबोध कुमार नंदन
पटना : गरीब ग्रामीण जनता की आर्थिक सामाजिक प्रगति के लिए 2 अक्तूबर 1975 को ग्रामीण बैंकों की स्थापना की गयी थी. अपने चार दशक की स्थापना अवधि में आज शाखाओं के मामले में ग्रामीण बैंक देश का सबसे बड़ा बैंक बन गया हैं. फिलहाल 56 ग्रामीण बैंकों की 21398 शाखाएं, 28 राज्यों के 676 जिलों में कार्यरत हैं, लेकिन इसका अस्तित्व अभी खतरे में हैं.
ये बातें ऑल इंडिया बैंक आॅफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) के संयुक्त सचिव डीएन त्रिवेदी ने बुधवार को प्रभात खबर से विशेष बातचीत में कहीं. उन्होंने कहा कि व्यावसायिक बैंकों की कुल 118735 शाखाओं की अपेक्षा ग्रामीण बैंक की शाखाएं 18 प्रतिशत से ज्यादा है. लेकिन ग्रामीण बैंकों का कुल ऋण अपेक्षाकृत मात्र तीन प्रतिशत है. नाबार्ड की अनुशंसा पर भारत सरकार ग्रामीण बैंकों का आपस में विलय कर इसकी संख्या कम करती रही है.
त्रिवेदी ने बताया कि वर्ष 2004-05 में समान प्रायोजक बैंकों के ग्रामीण बैंकों का आपस में विलय कर 196 ग्रामीण बैंकों की संख्या घटा कर 82 की गयी. जिसमें बिहार में कार्यरत 16 ग्रामीण बैंकों में सेंट्रल बैंक के आठ ग्रामीण बैंकों को मिला कर उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक, पीएनबी ग्रामीण बैंक के चार ग्रामीण बैंकों को मिला कर मध्य बिहार ग्रामीण बैंक और यूको बैंक के तीन ग्रामीण बैंकों को मिला कर बिहार क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक बनाया गया. एसबीआई की एकमात्र समस्तीपुर ग्रामीण बैंक को यथा स्थिति छोड़ दिया गया.
सरकार ग्रामीण बैंक के तीसरे चरण का विलय करने पर आमादा
उन्होंने बताया कि सरकार ने अपनी यह कवायद सार्थक नहीं होता देख 2011-12 में ग्रामीण बैंकों की संख्या घटा कर 56 कर दी. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के समस्तीपुर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को यूको बैंक के बिहार ग्रामीण बैंक में मिला दिया और अब सरकार ग्रामीण बैंक के तीसरे चरण का विलय करने पर आमदा है जिसके तहत बिहार में यूको बैंक के ग्रामीण बैंक को पंजाब नेशनल बैंक के मध्य बिहार ग्रामीण बैंक में मिलाना चाहती हैं.
त्रिवेदी ने बताया कि 7 जून को जारी वित्त मंत्रालय के प्रस्ताव के तहत अब देश के 56 ग्रामीण बैंकों की जगह मात्र 38 ग्रामीण बैंक रह जायेंगे. प्रस्ताव के बाद अब 16 प्रायोजक बैंकों की जगह मात्र 12 प्रायोजक बैंक होंगे, जिसमें स्टेट बैंक 14, पीएनबी 4, बैंक ऑफ इंडिया, यूनाईटेड बैंक और इंडियन बैंक तीन-तीन, सिंडिकेट बैंक, सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक दो-दो तथा यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर बैंक के अधीन एक-एक ग्रामीण बैंक कार्य करेंगे. जहां तक राज्यवार ग्रामीण बैंकों का संख्या की बात हैं, तो यूपी और पश्चिम बंगाल में तीन-तीन तथा आंध्र प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और जम्मू कश्मीर में दो-दो और शेष बीस राज्यों में मात्र एक-एक ग्रामीण बैंक कार्यरत रहेंगे.
शाखाओं के मामले में देश के सबसे बड़ा ग्रामीण बैंक
उन्होंने बताया कि यही नहीं, जहां तक लाभ कमाने का प्रश्न है. आठ ग्रामीण बैंकों को मिला कर बने और शाखाओं के मामले में देश के सबसे बड़ा ग्रामीण बैंक, उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक विगत तीन वर्षों से लगातार घाटे में चल रहा है.
उन्होंने बताया कि ग्रामीण बैंक के विलय के प्रस्ताव के पीछे निजीकरण की सरकारी मानसिकता के खिलाफ ग्रामीण बैंककर्मी एकजुट होकर संसद के मॉनसून सत्र में प्रायोजक बैंकों में विलय की मांग को लेकर जन जागरण अभियान चलायेंगे.
न बैंक खुश हैं न कर्मी : उन्होंने बताया कि सरकार के इस विलय प्रस्ताव से न तो प्रायोजक बैंक खुश हैं और नहीं ग्रामीण बैंक कर्मी. क्योंकि ग्रामीण बैंकों के तीन अंश धारक हैं जिसमें तत्काल भारत सरकार 50 प्रतिशत, प्रायोजक बैंक 35 प्रतिशत तथा राज्य सरकार 15 प्रतिशत का अंशधारक हैं, लेकिन ग्रामीण बैंकों का प्रबंधन मूल रूप से प्रायोजक बैंक ही देखता है. ग्रामीण बैंकों के संचालन के साथ ही बैंकों के तकनीकी अपग्रेडेशन के लिए प्रायोजक बैंकों ने करोड़ों रुपये खर्च कर सीबीएस प्लेटफॉर्म पर ग्रामीण बैंकों को लाया हैं. स्टाफ को प्रशिक्षण देकर उन्हें अनुभवी बनाया है और
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