कमजोर मॉनसून ने अटकायीं किसानों की सांसें
Author Prabhat khabar digital desk
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जून में 250-300 मिमी की जगह मात्र 30 मिमी हुई बारिश पटना : अब तक के कमजोर मॉनसून ने बिहार के किसानों की सांसें अटका दी हैं. खास तौर पर खरीफ की मुख्य फसल धान की रोपनी के लिए न तो अभी उपयुक्त मौसम है, न ही समुचित बारिश. दरअसल पूरे बिहार में जून में […]
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जून में 250-300 मिमी की जगह मात्र 30 मिमी हुई बारिश
पटना : अब तक के कमजोर मॉनसून ने बिहार के किसानों की सांसें अटका दी हैं. खास तौर पर खरीफ की मुख्य फसल धान की रोपनी के लिए न तो अभी उपयुक्त मौसम है, न ही समुचित बारिश. दरअसल पूरे बिहार में जून में अपेक्षित 250-300 मिलीमीटर बारिश की तुलना में मात्र 30 मिलीमीटर बारिश हुई है. करीब दर्जन भर जिले तो ऐसे हैं, जहां बारिश का आंकड़ा शून्य के आसपास है.
ऐसे में अगर जुलाई के मध्य तक ठीकठाक बारिश नहीं हुई तो खरीफ की खेती पर पर संकट आ जायेगा. डाॅ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय विवि, पूसा के मौसम विज्ञानियों का ताजा विश्लेषण यह है कि अगर अगले दो तीन दिनों में मॉनसून ने मजबूत सक्रियता नहीं दिखायी तो करीब आठ से 10 दिन सूखे रह सकते हैं.
सरकार की तैयारी : बाढ़ और सूखा दोनों के लिए आपात प्लान
इधर राज्य के कृषि विभाग सीधे केरल के मॉनसून पर निगाह रखे हुआ है. वहां की मॉनसून की सक्रियता की रिपोर्ट के अध्ययन के बाद विभाग ने निष्कर्ष निकाला है कि बाढ़ और सूखा दोनों की नौबत आ सकती है.
दरअसल अब तक के मॉनसून की प्रवृत्ति बता रहा है कि या तो भारी बारिश होगी या सूखे जैसी की स्थिति बनेगी. इसलिए विभाग ने बाढ़ और सूखा दोनों के लिए आपात प्लान बना रखा है.
दूसरे विभाग भी अलर्ट कर रखे गये हैं. अनुदानित बीज और उर्वरक आदि देने की खास रणनीति बनायी गयी है. हालांकि, कृषि विभाग ने किसानों तक संदेश पहुंचा दिया है कि सिंचाई के निजी संसाधन हों तो ठीक है, लेकिन अगर संसाधन नहीं हैं तो धान की परंपरागत खेती भूल जाएं. सुझाव दिया है कि कम अवधि वाली फसल की रोपाईके लिए अभी इंतजार करें. कम अवधि वाली धान की रोपनी जुलाई के अंतिम सप्ताह से लेकर अगस्त दूसरे हफ्ते तक संभव है.
मॉनसून की बेरुखी का सबसे ज्यादा असर बिहार में क्यों
सर्दी के पिछले सीजन में बिहार में नवंबर तक गर्मी का एहसास रहा. सर्दी भी पड़ी तो देरी तक रही. इससे तिब्बत का पठार अधिक तप नहीं सका.
तिब्बत के पठार के तपने से हिमालय के परिक्षेत्र में खास वैक्यूम बन जाता है, जिसे भरने के लिए मॉनसून हिंद महासागर के विभिन्न इलाकों से मॉनसूनी हवाएं हिमालय की ओर जोर से बहती हैं. लेकिन इस बार इसकी सक्रियता कुछ कम रही है, जिसका खामियाजा बिहार भुगत रहा है, क्योंकि यह मैदानी परिक्षेत्र है. दक्षिण बिहार पर खास असर रहेगा. इस परिक्षेत्र में पटना भी शामिल है. वर्तमान में उत्तरी बिहार की तुलना में दक्षिण बिहार के जिलों में सबसे नाजुक स्थिति है.
निश्चित तौर पर मॉनसून की सक्रियता काफी अस्थिर है. हालांकि अभी निराश होने की जरूरत नहीं है. जुलाई के प्रथम सप्ताह से काफी आशा है, लेकिन अगर यह सप्ताह भी नहीं बरसा तो मॉनसून का कुछ दिन और इंतजार करना पड़ सकता है. किसानों को खासतौर पर कम अवधि वाली धान की प्रजातियों की रोपनी के लिए इंतजार करना चाहिए. अभी इसके लिए समय है.
डॉ ए सत्तार, वरिष्ठ मौसम विज्ञानी, डाॅ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि िववि, पूसा
अब तक बारिश काफी कम हुई है. हालांकि हमें उम्मीद रखनी चाहिए कि आनेवाले दिनों में अच्छी बारिश होगी. कृषि विभाग ने बाढ़ और सूखा दोनों स्थितियों के लिए आपात प्लान बना रखा है. किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है.
हिमांशु के राय, डायरेक्टर , कृषि विभाग, बिहार
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