पटना : झारखंड के आरोपित को बिहार की जेल में रखना मौलिक अधिकार का हनन, क्यों न मुआवजा मिले
Updated at : 30 Jun 2018 8:44 AM (IST)
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कार्यशैली पर सवाल : बिहार पुलिस पर हाईकोर्ट ने जतायी नाराजगी पटना : पटना हाईकोर्ट में शुक्रवार को सनसनीखेज मामला सामने आया. यह झारखंड के एक आपराधिक मामले के आरोपित को अवैध रूप से करीब छह महीने तक बिहार के मुंगेर जेल में रखने का मामला है. न्यायाधीश डॉ रवि रंजन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ […]
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कार्यशैली पर सवाल : बिहार पुलिस पर हाईकोर्ट ने जतायी नाराजगी
पटना : पटना हाईकोर्ट में शुक्रवार को सनसनीखेज मामला सामने आया. यह झारखंड के एक आपराधिक मामले के आरोपित को अवैध रूप से करीब छह महीने तक बिहार के मुंगेर जेल में रखने का मामला है. न्यायाधीश डॉ रवि रंजन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इससे संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए बिहार पुलिस की कार्यशैली पर भी नाराजगी जतायी. अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला निजी स्वतंत्रता एवं मौलिक अधिकारों के हनन का है. बिहार की जेल में बंद आरोपित मुआवजे का हकदार प्रतीत होता है. इस मामले पर अगली सुनवाई चार जुलाई को होगी.
आर्म्स एक्ट एवं शराबबंदी कानून के तहत हुआ था गिफ्तार
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता उत्तम शर्मा मुंगेर के कासिम बाजार थाना निवासी आर्म्स एक्ट एवं शराबबंदी कानून के तहत मई, 2017 को गिरफ्तार हुआ था. झारखंड के साहेबगंज जिला अंतर्गत रांगा थाने में दर्ज मामले के सिलसिले में याचिकाकर्ता उत्तम शर्मा की कोर्ट में पेशी के लिए रिमांड आदेश बिहार की मुंगेर पुलिस को अगस्त 2017 में मिला. याचिकाकर्ता को 17 अक्तूबर, 2017 को मुंगेर की निचली अदालत से जमानत मिल गयी.
इसके बाद कानूनन मुंगेर पुलिस को झारखंड से आये रिमांड आदेश को तामील करते हुए आरोपित को साहेबगंज पुलिस को सौंपना चाहिए था. लेकिन आरोपित पांच महीने से अधिक की अवधि तक मुंगेर जेल में बंद रहा.
नवंबर में मिली थी जमानत
आरोपित याचिकाकर्ता ने नवंबर, 2017 में साहेबगंज की निचली अदालत में जमानत के लिए इस आधार पर याचिका दायर की कि बिहार की एक निचली अदालत ने उसे जमानत दे दी है. बावजूद इसके याचिकाकर्ता की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि आरोपित उत्तम शर्मा झारखंड की किसी जेल में बंद नहीं है.
बाद में जब याचिकाकर्ता की ओर से पटना हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गयी, तो हाईकोर्ट ने उस याचिका पर राज्य सरकार से 15 अप्रैल तक जवाब मांगा था.
अदालत द्वारा बिहार सरकार से जवाब मांगे जाने के बाद मुंगेर पुलिस ने आनन-फानन याचिकाकर्ता को 13 अप्रैल, 2018 को मुंगेर जेल से हटा कर साहेबगंज (झारखंड) पुलिस को रिमांड कर दिया. हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में मुंगेर पुलिस के रवैये पर हैरानी जतायी.
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