दोषपूर्ण परीक्षा परिणाम के खिलाफ AISA के बैनर तले इंटरमीडिएट के छात्रों ने किया बिहार बोर्ड के सामने हंगामा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Jun 2018 2:52 PM

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पटना : बिहार में इंटरमीडिएट के छात्रों ने परीक्षा परिणाम में हुई गड़बड़ी शुक्रवार को जमकर हंगामा मचाया. ऑल इंडिया स्टूडेंट यूनियन के बैनर तले छात्रों ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वार पर प्रदर्शन किया. साथ ही छात्रों ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के चेयरमैन की बर्खास्तगी की मांग की. जानकारी के मुताबिक, इंटरमीडिएट […]

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पटना : बिहार में इंटरमीडिएट के छात्रों ने परीक्षा परिणाम में हुई गड़बड़ी शुक्रवार को जमकर हंगामा मचाया. ऑल इंडिया स्टूडेंट यूनियन के बैनर तले छात्रों ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वार पर प्रदर्शन किया. साथ ही छात्रों ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के चेयरमैन की बर्खास्तगी की मांग की.

जानकारी के मुताबिक, इंटरमीडिएट की मार्क्सशीट त्रुटिपूर्ण होने से परेशान छात्रों ने शुक्रवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट यूनियन के बैनर तले बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के कार्यालय पहुंचे और विरोध-प्रदर्शन किया. साथ ही आक्रोशित छात्रों ने मुख्य द्वार के सामने बिहार बोर्ड के अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. छात्रों ने परीक्षा की उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गड़बड़ी और मार्क्सशीट तैयार करने में लापरवाही का आरोप लगाया. साथ ही कई छात्र ऐसे हैं, जिन्होंने जेईई मेन तथा इंजीनियरिंग की अन्य प्रवेश परीक्षाओं में सफलता हासिल की है, लेकिन इंटरमीडिएट की परीक्षा में परिणाम खराब होने के कारण अब उनका दाखिला नहीं हो पायेगा.

छात्र रूपेश कुमार ने जेईई मेन की परीक्षा में ओबीसी कैटेगरी में 2784वां रैंक हासिल किया, लेकिन इंटरमीडिएट की परीक्षा में फिजिक्स के थ्योरी पेपर में मात्र 5 और ऑब्जेक्टिव में 7 अंक मिले हैं. ऐसे में आईआईटी में जाने का उनका सपना टूटता नजर आ रहा है. परीक्षा परिणाम को लेकर एमएलसी और बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष केदारनाथ पांडेय ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को पत्र लिख चुके हैं. उन्होंने अपने में लिखा है कि कई ऐसे भी छात्र-छात्राएं हैं, जिन्होंने परीक्षाएं दी, मगर उनको अनुपस्थित कर दिया गया या उनका मार्क्सशीट बिना नंबर के ही निर्गत कर दिया गया. मालूम हो कि पिछले वर्ष 35.24 प्रतिशत छात्र-छात्राओं के मुकाबले इस वर्ष 2018 में करीब 16.71 प्रतिशत बेहतर परिणाम आये हैं. इस वर्ष 51.95 फीसदी छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण हुए हैं.

छात्र-छात्राओं की परेशानी

जेईई की परीक्षा में अच्छे रैंक लाने के बावजूद थ्योरी और ऑब्जेक्टिव में दस से भी कम अंक दिया जाना

मार्क्सशीट में वैसे विषय जोड़ दिये गये, जिसकी परीक्षा छात्र ने दी ही नहीं

मार्क्सशीट में मैथ को अतिरिक्त विषय रखे जाने के बावजूद मैथ के स्थान पर बायोलॉजी जोड़ दिया जाना और दोनों विषय में अनुपस्थित बताना

प्रैक्टिकल परीक्षा दिये जाने के बावजूद परीक्षा परिणाम में छात्र का उपस्थित नहीं होना बताया गया

विज्ञान के विषयों में कई छात्रों को उम्मीद से काफी कम अंक मिले

सभी विषयों की परीक्षा दिये जाने के बावजूद परीक्षा परिणा में बताया गया अनुपस्थित

छात्रों को दे दिये गये पूर्णांक से ज्यादा नंबर, जबकि बोर्ड कार्यालय के बाहर नोटिस लगा कर आश्वस्त किया गया, नहीं मिला किसी को ज्यादा नंबर

परीक्षा परिणाम दोषपूर्ण होने के कारण दूसरे कॉलेजों में नामांकन के बजाय बोर्ड कार्यालय का लगाना पड़ रहा चक्कर

परीक्षा परिणाम दोषपूर्ण होने पर दोबारा जांच कराने के लिए छात्र-छात्राओं को देने पड़ेंगे अतिरिक्त राशि, आने-जाने में भी होंगे खर्च

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