बिहार : पटना हाईकोर्ट का फैसला, नियोजित शिक्षक समान वेतन के हकदार
Updated at : 01 Nov 2017 5:52 AM (IST)
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पटना हाईकोर्ट का फैसला : सामान्य शिक्षकों की तरह नियोजित शिक्षकों को सभी सुविधाएं दे सरकार पटना : पटना हाईकोर्ट ने राज्य में नियत मानदेय पर कार्यरत करीब साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया कि वे भी समान कार्य के लिए समान वेतन के हकदार हैं. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस […]
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पटना हाईकोर्ट का फैसला : सामान्य शिक्षकों की तरह नियोजित शिक्षकों को सभी सुविधाएं दे सरकार
पटना : पटना हाईकोर्ट ने राज्य में नियत मानदेय पर कार्यरत करीब साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया कि वे भी समान कार्य के लिए समान वेतन के हकदार हैं.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने द बिहार सेकेंडरी टीचर्स स्ट्रगल कमेटी और अन्य की ओर से दायर रिट याचिका पर मंगलवार को अपना फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने नियोजित शिक्षकों की मांग को सही ठहराया है.
कोर्ट ने मानदेय पर नियुक्त शिक्षकों से लिये जा रहे कार्य को मनमाना करार देते हुए उन्हें भी वेतनमान पर कार्यरत सामान्य शिक्षकों की तरह ही सारी सुविधाएं देने का निर्देश सरकार को दिया है.
कोर्ट ने नियोजित शिक्षकों के मानदेय को लेकर राज्य सरकार द्वारा बनाये गये नियम और कृत्य को भी असंवैधानिक करार देते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया. समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग वाली याचिका पर पटना हाईकोर्ट ने छह अक्तूबर को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था.
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया था कि राज्य के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत नियोजित शिक्षकों से समान कार्य तो लिया जा रहा है, लेकिन समान वेतन नहीं दिया जा रहा है. उनके साथ वेतन देने के मामले में भेदभाव बरता जा रहा है.
कोर्ट को यह भी बताया गया था कि विद्यालयों में कार्यरत चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के वेतन से भी उनका मानदेय काफी कम है, जबकि उनसे सामान्य शिक्षकों की तरह ही सभी प्रकार के कार्य लिये जा रहे हैं. कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार पर नाराजगी भी जाहिर की थी.
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह इस मामले में स्थिति स्पष्ट करे. सुनवाई के क्रम में सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर ने पक्ष रखा था, जबकि नियोजित शिक्षकों की ओर से वरीय अधिवक्ता पीके शाही, अधिवक्ता दीनू कुमार, संजीव कुमार अंसुल सहित कई अन्य अधिवक्ताओं ने अपना-अपना पक्ष रखा था. सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था.
वर्तमान वेतन
पंचायत व प्रखंड शिक्षक : Rs 13,200 – 20,500 तक
हाई और +2 शिक्षक : Rs 15,500 – 23,000 तक
7वां वेतनमान
राज्य सरकार ने 7वें वेतनमान लागू कर दिया है. नियोजित शिक्षकों को भी इसका लाभ मिलेगा. उनके वेतन में तीन से चार हजार रुपये तक की वृद्धि होगी. इसका लाभ जुलाई, 2017 के प्रभाव से मिलेगा.
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला है. सरकार की बेहतर छवि के लिए भी यह जरूरी है कि वह गुणात्मक शिक्षा में योग्यतानुसार शिक्षकों को केंद्रीय वेतनमान हू-ब-हू लागू करे और जल्द इसकी अधिसूचना जारी करे.
केदारनाथ पांडेय, अध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षक संघ
14 साल के संघर्ष के बाद हाईकोर्ट से न्याय मिला है. समान वेतन नहीं देने व सरकार के शोषण के खिलाफ 2014 में सेवा से त्यागपत्र दे दिया और शिक्षकों के लिए संघर्ष किया.
आनंद कौशल सिंह, याचिकाकर्ता
मांगों की न्यायिक जीत हुई है. नियोजित शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के समान वेतनमान और अन्य सुविधाएं मुहैया करायी जाएं. राज्य सरकार जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी करे.
पूरण कुमार, अध्यक्ष, पंचायत-नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ
पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी. इस संबंध में मैंने राज्य सरकार को अपनी सलाह दे दी है. सरकार जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटायेगी.
ललित किशोर, महाधिवक्ता
अपील याचिका दायर कर सकती है राज्य सरकार
पटना हाईकोर्ट के फैसले का अध्ययन करेंगे. इसके बाद राज्य सरकार अपील याचिका दायर कर सकती है. इसके पहले विधि विशेषज्ञों से शिक्षा विभाग राय-मशविरा करेगा.
कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, शिक्षा मंत्री
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