बिहार : किडनी व लिवर के इलाज को नहीं जाना होगा बाहर : सीएम
Updated at : 11 Oct 2017 7:53 AM (IST)
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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य के क्षेत्र में अब दूसरे चरण का सुधार शुरू किया जा रहा है. इसके तहत सबसे बड़ी चुनौती मरीजों को इलाज के लिए मजबूरी में बाहर जाने से रोकने की होगी. इसके लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं. यहां के सभी […]
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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य के क्षेत्र में अब दूसरे चरण का सुधार शुरू किया जा रहा है. इसके तहत सबसे बड़ी चुनौती मरीजों को इलाज के लिए मजबूरी में बाहर जाने से रोकने की होगी.
इसके लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं. यहां के सभी सरकारी अस्पतालों में दवा, उपकरण, डॉक्टर से लेकर तमाम आधारभूत संरचना व सुविधाओं के विकास पर खासतौर से ध्यान दिया जा रहा है. कैंसर के इलाज के लिए पटना व मुजफ्फरपुर के अलावा किडनी के इलाज के लिए आइजीआइएमसी और पीएमसीएच में व्यवस्था की गयी है. इसी तरह आने वाले दिनों में लिवर समेत अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भी व्यवस्था की जायेगी.
मुख्यमंत्री मंगलवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद कक्ष में स्वास्थ्य विभाग की 866 करोड़ रुपये की 113 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे. इनमें 252 करोड़ रुपये की 32 योजनाओं का उद्घाटन और 614 करोड़ रुपये की 81 योजनाओं का शिलान्यास हुआ. मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएमसीएच को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अस्पताल बनाया जायेगा.
इसमें जगह की कोई कमी नहीं है. जरूरत पड़ने पर पुरानी संरचनाओं के स्थान पर नयी आधारभूत संरचना बनवायी जायेगी. उन्होंने कहा कि राज्य में डॉक्टरों की समस्या को दूर करने के लिए कई अहम प्रयास किये गये हैं. इसी तरह सभी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग कॉलेज, सभी अनुमंडलों में एएनएम कॉलेज और सभी जिलों में जीएनएम व पैरा मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा रही है.
सभी अस्पताल और स्कूल भवनों को भूकंपरोधी बनाने के लिए इनकी रेट्रोफिटिंग की जायेगी. जितने भी नये भवन बन रहे हैं, उन्हें आग से सुरक्षित बनाया जा रहा है. अब जितने भी अस्पताल या अन्य सरकारी भवन बनाये जाते हैं, उनमें फिनिशिंग और फर्नीचर समेत अन्य सभी कार्य साथ-साथ कराये जाते हैं, ताकि भवन तैयार होने के साथ ही इनका उपयोग किया जा सके.
सीएम ने कहा कि कई बार यह देखने को मिलता है कि अस्पताल में नीचे लेटा कर मरीजों का इलाज कराया जा रहा है. इसका एक पहलू यह भी है कि अस्पतालों में मरीज उसकी क्षमता से ज्यादा पहुंचने लगे हैं.
स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार के पहले चरण के तहत किये गये प्रयास का ही यह नतीजा है. वर्ष 2005 में जहां महीने में महज 39 मरीज पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) में इलाज कराने आते थे, वहीं वर्तमान में यह आंकड़ा बढ़ कर 10,500 मरीज प्रतिमाह का हो गया है. मरीजों की बढ़ती संख्या के आधार पर बेडों की संख्या भी बढ़ायी जा रही है. जो बेहद पुराने पीएचसी थे, उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में तब्दील किया जा रहा है. यहां सभी तरह के टेस्ट और इलाज की सुविधा मौजूद होगी.
बेटी का इलाज कराने वाली माता को Rs 200 रोजाना
नीतीश कुमार ने कहा कि लड़कियों की मृत्यु दर को कम करने के लिए खासतौर से प्रयास किये गये हैं. इसमें अस्पताल लाकर बेटी का इलाज कराने वाली माता को 200 रुपये रोजाना दिया जायेगा. बेटी का इलाज कराने के लिए अस्पताल लाने वाली आशा को अब 500 रुपये भत्ता दिया जायेगा.
उन्होंने कहा कि बाल विवाह पर रोक लगा कर राज्य में मातृ मृत्यु दर और आइएमए दोनों को कम किया जा सकता है. 18 वर्ष से कम उम्र में बेटी की शादी करना मातृ मृत्यु दर का मुख्य कारण है.
स्वास्थ्य विभाग भी अपने स्तर पर इस पर रोक लगाने की पहल कर रहा है. महिला अपराध में बिहार का देश में 26वां स्थान है, लेकिन जैसे ही इसमें दहेज उत्पीड़न के आंकड़े जोड़ दिये जाते हैं, बिहार का स्थान यूपी के बाद दूसरा हो जाता है. दहेज और बाल विवाह का विरोध करके इससे छूटकारा पाया जा सकता है. इसके लिए सशक्त अभियान चलाया जायेगा.
पोलियो की तरह कालाजार का होगा उन्मूलन
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार से पोलियो की तरह ही कालाजार का भी उन्मूलन हो जायेगा. इसके लिए जुलाई, 2018 तक का लक्ष्य रखा गया है.
रूटीन टीकाकरण का आंकड़ा बढ़ कर 84% पहुंच गया है. जल्द ही बिहार देश के टॉप-5 राज्यों में होगा. इंद्रधनुषी योजना में जो जिले छूट गये हैं, उनमें राज्य सरकार अपने स्तर पर टीकाकरण करायेगी. उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव चार से बढ़ कर 52% हो गया है, लेकिन इसमें 100% लक्ष्य हासिल करना उद्देश्य है. इसी तरह शिशु मृत्यु दर (आइएमएफ) में कमी लाने के लिए विशेष कैंपेन चलाया जायेगा. इसमें यह देखा जाता है कि लड़कों की तुलना में लड़कियों की मृत्यु दर ज्यादा है. यानी लड़कियों के इलाज पर घर वाले उतना ध्यान नहीं देते हैं.
मोदी बोले, कैंसर के इलाज को मुंबई जाने पर निवेश आयुक्त करेंगे व्यवस्था
पटना : डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रम में बिहार से कैंसर का इलाज कराने के लिए मुंबई जाने वालों की संख्या काफी ज्यादा है. इन लोगों को मुंबई में हर तरह की सहायता
मुहैया कराने के लिए वहां मौजूद निवेश आयुक्त को इसके लिए अधिकृत किया गया है. सभी जिला अस्पतालों में किडनी के डायलिसिस की व्यवस्था की जा रही है. यह बीपीएल वर्ग के लिए मुफ्त होगा. उन्होंने कहा कि जो डॉक्टर दुर्गम क्षेत्रों में काम करते हैं, उन्हें 25 हजार रुपये अतिरिक्त भत्ता दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष में अब तीन बीमारियों को शामिल किया गया है. बोन मैरो ट्रांसप्लांट, हीमोफिलिया और ट्रांसजेंडर सर्जरी के लिए भी अन्य बीमारियों की तरह ही सहायता मिल सकेगी.
जनवरी, 2018 तक अस्पतालों में मिलेंगी 118 दवाएं
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि जनवरी, 2018 तक सभी सरकारी अस्पतालों में 118 दवाएं मिलेंगी. राज्य में आईएमआर में 0.4% की कमी आयी है.
15 अक्तूबर तक सभी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन डी की दवाएं मिलना शुरू हो जायेगी. 20 अक्तूबर के बाद किसी अस्पताल से खाने की शिकायत नहीं मिलेगी. अगर मिलेगी, तो संबंधित सिविल सर्जन पर कार्रवाई होगी.
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