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पितृपक्ष के दौरान भूल कर भी न करें यह काम, वरना इस दंड के होंगे भागी, जानें

Updated at : 07 Sep 2017 1:51 PM (IST)
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पितृपक्ष के दौरान भूल कर भी न करें यह काम, वरना इस दंड के होंगे भागी, जानें

पटना : भारतीय संस्कृति में संस्कारों का बहुत पवित्र महत्व है. संस्कार को निभाना एक अच्छे पुत्र और इंसान का पहला कर्तव्य है. खासकर हिंदू धर्म में माता-पिता के साथ बुजुर्गों की सेवा को सबसे बड़ी पूजा का दर्जा दिया गया है. पूर्वजों यानी पितरों का उद्धार पुत्र के लिए अनिवार्य माना गया है. जन्मदाता […]

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पटना : भारतीय संस्कृति में संस्कारों का बहुत पवित्र महत्व है. संस्कार को निभाना एक अच्छे पुत्र और इंसान का पहला कर्तव्य है. खासकर हिंदू धर्म में माता-पिता के साथ बुजुर्गों की सेवा को सबसे बड़ी पूजा का दर्जा दिया गया है. पूर्वजों यानी पितरों का उद्धार पुत्र के लिए अनिवार्य माना गया है. जन्मदाता जब पूर्वज के रूप में मृत्यु उपरांत स्वर्ग के वासी हो जाती हैं, तो उन्हें विस्मृत न करते हुए उनके लिए श्राद्ध का विशेष महत्व और विधान बताया गया है. पितृपक्ष और पिंडदान के मामलों के साथ ज्योतिष विद्या के विशेषज्ञ डॉ. श्रीपति त्रिपाठी ने कहा कि हिंदू धर्म में श्राद्ध का बहुत अधिक महत्व है. किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका श्राद्ध करना जरूरी माना जाता है. तभी हमारे पूर्वज को मुक्ति, मोक्ष मिलती है. ऐसी मान्यता है कि अगर किसी मनुष्य का विधिपूर्वक श्राद्ध और तर्पण ना किया जाये तो उसे इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती और वह भूत के रूप में इस संसार में ही रह जाता है.

उन्होंने कहा कि ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि दिवंगत पितरों के परिवार में या तो सबसे बड़ा पुत्र या सबसे छोटा पुत्र और अगर पुत्र न हो तो नाती, भतीजा, भांजा या शिष्य ही तिलांजलि और पिंडदान दे सकते हैं. जानिए इन दिनों में कौन से काम नहीं करना चाहिए. जिसे करने से आपके पूर्वजों को तो कष्ट होगा ही साथ में आपको नरक की प्राप्ति होगी. ऐसा शस्त्रों में कहा गया है. अगर आपको पितरों का श्राद्ध करना है, तो इस बात का ध्य़ान रखें कि इन दिनों में ब्रह्मचर्य का पूरा पालन करें. इन दिनों में मांस-मदिरा का सेवन न करें तो बेहतर है. पितृ पक्ष के दौरान चना, मसूर, सरसों का साग, सत्तू, जीरा, मूली, काला नमक, लौकी, खीरा एवं बासी भोजन नहीं खाना चाहिए. अगर आप अपने पितरों का तर्पण कर रहे है, तो गया, प्रयाग जाकर करें या फिर अपने घर पर करें। घर का मतलब कि वह आपका खुद का घर हो किराये में लिया हुआ न हो.

उन्होंने बताया कि शास्त्रों में कहा गया है कि इन दिनों में आपके पूर्वज किसी भी रूप में आपके द्वार में आ सकते है. इसलिए किसी को भी घर से निरादर कर भगाएं नहीं. हरवंश पुराण में बताया गया है कि भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया था कि श्राद्ध करने वाला व्यक्ति दोनों लोकों में सुख प्राप्त करता है. श्राद्ध से प्रसन्न होकर पितर धर्म को चाहने वालों को धर्म, संतान को चाहने वाले को संतान, कल्याण चाहने वाले को कल्याण जैसे इच्छानुसार वरदान देते है.

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