बिहार : आईटी के आधा दर्जन प्रोजेक्ट्स नहीं उतरे धरातल पर
Updated at : 05 Sep 2017 7:00 AM (IST)
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उदासीनता : इनमें से एक महत्वाकांक्षी योजना पटना के डाकबंगला चौराहे पर विश्वस्तरीय आइटी टावर बनाने की थी पटना : बिहार में आइटी सेक्टर के विकास के लिए साल 2014 में कुल 12 प्रस्तावों को सरकार की सहमति मिल गयी थी. इसके बावजूद आधा दर्जन से अधिक ऐसे प्रोजेक्ट्स हैं जो तीन साल बाद भी […]
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उदासीनता : इनमें से एक महत्वाकांक्षी योजना पटना के डाकबंगला चौराहे पर विश्वस्तरीय आइटी टावर बनाने की थी
पटना : बिहार में आइटी सेक्टर के विकास के लिए साल 2014 में कुल 12 प्रस्तावों को सरकार की सहमति मिल गयी थी. इसके बावजूद आधा दर्जन से अधिक ऐसे प्रोजेक्ट्स हैं जो तीन साल बाद भी धरातल पर अब तक नहीं उतरे हैं.
इनमें से कई इतने महत्वपूर्ण हैं कि उनकी शुरुआत हुये बिना राज्य में आइटी का पूर्ण विकास संभव नहीं है. यदि ये सभी समय पर पूरा हो जाते तो राज्य का तेजी से विकास भी होता और हजारों लोगों को रोजगार भी मिलता. इनमें से एक महत्वाकांक्षी योजना पटना के डाकबंगला चौराहे पर विश्वस्तरीय आइटी टावर बनाने की थी. 18 फरवरी, 2014 को इसके लिए प्रदेश सरकार की मंजूरी भी मिल गयी थी.
इसके बावजूद इस पर काम शुरू नहीं हुआ. करीब तीन साल बाद 17 जनवरी, 2017 को इसे बनाने के लिए फिर से राजगीर कैबिनेट में मंजूरी मिली, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ. अब करीब छह महीने बीतने के बाद तीन अगस्त 2017 को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने बताया है कि इसका निर्माण पीपीपी मॉडल पर किया जायेगा. इसका डीपीआर बनकर तैयार है, लेकिन निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ है.
समय पर प्रोजेक्ट शुरू होने पर हजारों को मिलता रोजगार
किन प्रस्तावों पर नहीं हुआ काम
बिस्कोमान के सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क को अपग्रेड करने की बात थी, लेकिन यह अब तक पूरा नहीं हुआ.
पांच करोड़ रुपये की लागत से बीआइटी पटना के कैंपस में 100 सीट का एक आईटी इनक्यूबेशन सेंटर बनाने की योजना थी.
राजगीर में मेगा आइटी इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए आइटी सिटी बनाने की योजना थी.
आइटी आधारित उद्योगों को विकसित करने के लिए राज्य में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी बनाने की योजना थी.
आइटी आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इएसडीएम पॉलिसी बनाये जाने का प्रस्ताव था, जिसपर अभी केवल ड्रॉफ्टिंग का काम चल रहा है. इसकी शुरुआत किये बिना प्रदेश में आइटी का अपेक्षित विकास मुश्किल है.
– आइटी उद्योग के मल्टीमीडिया से संबंधित क्षेत्र में बिहार को हब सेंटर के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव था, जिस पर अब तक काम नहीं हुआ है.
प्रस्तावित प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण हैं
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुशील मोदी ने कहा है कि ये सभी प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स महत्वपूर्ण हैं. इन पर काम शुरू कर दिया गया है.
डाकबंगला चौराहे पर विश्वस्तरीय आइटी टावर बनाने का ठेका देने के लिए बिड निकाला गया, लेकिन पहले राउंड में कोई नहीं आया. प्रदेश को आइटी हब बनाने के लिए सरकार गंभीरता से काम कर रही है. इसके लिए 13 और 14 सितंबर को पटना में हैकेथन और आइटी कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है.
इसमें देशभर की आइटी कंपनियों को आमंत्रित किया गया है. 14 सितंबर को आइटी निवेशकों का विशेष सम्मेलन होगा. इसके जरिये प्रदेश में आइटी के क्षेत्र में निवेश और विकास की संभावनाओं का खाका तैयार किया जायेगा.
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