तेजस्वी ने शिक्षा व्यवस्था में गिरावट के लिए नीतीश को बताया जिम्मेवार, RJD पर बरसा JDU

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Aug 2017 9:31 PM

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पटना : बिहार सरकार द्वारा 50 वर्ष के शिक्षकों कोजबरन हटाये जाने के निर्णय को लेकर राजद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमलाबोला है. विरोधी दल के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार मेंबीते एक दशक में शिक्षा में गिरावट आयी हैऔर इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिम्मेवार हैं. तेजस्वी ने आगे कहा, अब […]

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पटना : बिहार सरकार द्वारा 50 वर्ष के शिक्षकों कोजबरन हटाये जाने के निर्णय को लेकर राजद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमलाबोला है. विरोधी दल के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार मेंबीते एक दशक में शिक्षा में गिरावट आयी हैऔर इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिम्मेवार हैं. तेजस्वी ने आगे कहा, अब ये 50 वर्ष से ऊपर के शिक्षकों को हटाने का नाटक रच रहे है.

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के पुत्र और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर कोई काबिल नहीं है तो उसे हटाने के किए उम्र की सीमा क्यों? शिक्षा की दयनीय स्थिति के लिए मुख्यमंत्री जिम्मेवार है और उसकी गाज 50 पार शिक्षकों पर गिराना चाहते है. आप भी तो 65 पार है आपसे राज्य नहीं संभल रहा तो आप भी सन्यास लीजिये.

तेजस्वी ने आगे कहा कि बिहार में शिक्षा के लगातार गिरते स्तर पर मुख्यमंत्री एक शब्द भी नहीं बोलते. उन्होंने कहा कि शिक्षा के गिरते स्तर पर मुख्यमंत्री ने कभी चिंता जाहिर नहीं की. शिक्षा का डंका बजाने वाला बिहार अचानक अपनी शिक्षा के गिरते स्तर, नकल, विलंब से परीक्षा परिणाम और अप्रशक्षिति शिक्षकों के लिए जाना जाने लगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बताना चाहिए कि अपने 12 साल के कार्यकाल में नियमित शिक्षकों की बहाली क्यों नहीं की? पूरे देश मेंबिहार की शिक्षा नीति की थू-थू हो रही है. तेजस्वी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को समझने के लिए रॉकेट विज्ञान समझने की आवश्यकता नहीं है.

जदयू ने साधा निशाना
जदयू के प्रदेश प्रवक्ता डॉ अजय आलोक ने ट्वीट कर पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि अगर शिक्षा नीति पर उनसे सवाल किया गया तो देश में राजनीति पर ही मजाक उड़ेगा. आज सरकार में ड्राइवर की नौकरी के लिए 10वीं पास होना जरुरी है, लेकिन प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री बनने के लिए इसकी अनिवार्यता नहीं है. ऐसे में संविधान में संशोधन करने की जरुरत है.

डॉ अजय आलोक ने ट्वीट किया कि एक चपरासी अपने भाई को पढ़ा सकता है, वे एमए-एलएलबी कर सकते हैं, लेकिन एक रेल मंत्री और मुख्यमंत्री अपने बेटे को नहीं पढ़ा सकते हैं और वो नौंवी पास भी नहीं कर सकता है. ऐसे में अगर शिक्षा की बात करें तो यह शिक्षा व राजनीतिक का ही मजाक उड़ाना है.

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