वे धर्मनिरपेक्षता की आड़ में धन जमा करने में लगे थे, कैसे बर्दाश्त करता : सीएम
Updated at : 01 Aug 2017 7:00 AM (IST)
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बेनामी संपत्ति नहीं है तो जिन पर आरोप लगे हैं वे ही साबित करेंगे पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वे प्रोपर्टी बनाने और उसे एक कंपनी से इधर से उधर ट्रांसफर करने के एक्सपर्ट नहीं हैं. अगर बेनामी संपत्ति नहीं है तो इसे जिन पर आरोप लगे हैं वे ही साबित करेंगे. […]
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बेनामी संपत्ति नहीं है तो जिन पर आरोप लगे हैं वे ही साबित करेंगे
पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वे प्रोपर्टी बनाने और उसे एक कंपनी से इधर से उधर ट्रांसफर करने के एक्सपर्ट नहीं हैं. अगर बेनामी संपत्ति नहीं है तो इसे जिन पर आरोप लगे हैं वे ही साबित करेंगे.
राजद सुप्रीमो के ठिकानों पर जब पहली बार छापा पड़ा तो उनकी ओर से ट्वीट किया गया कि भाजपा को नया साथी मुबारक. 40 मिनट बाद इसका इंटरप्रेटेशन किया गया, जबकि इतनी देर में इसका समाज में कड़ा मैसेज चला गया था. तबीयत खराब होने के कारण हम स्वास्थ्य लाभ के लिए राजगीर गये हुए थे उसी बीच सीबीआइ की छापेमारी हुई.
लौट के आने के बाद लालू प्रसाद से भी बातचीत हुई. पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने भी मुझसे अलग से बात की और पूछा कि क्या सफाई दें. हर बार हमने यही कहा कि जो आरोप लगे हैं उसे स्पष्ट कर देना चाहिए और बिंदुवार जवाब देना चाहिए. इससे आम जनमानस में बेहतर मैसेज जायेगा. साथ ही महागठबंधन के लिए भी यह अच्छा रहेगा. हमें तो संपत्ति और कंपनी के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
हमने जदयू के सामने कोई स्पष्टीकरण नहीं मांगा था, बल्कि आम जनता को बताने को कहा था, लेकिन राजद के पास सफाई देने के लिए कुछ बचा नहीं था. राजद के अपने विधायक दल की बैठक में भी इसी स्टैंड पर था. इस पर जदयू के विधानमंडल दल की बैठक में हमने स्पष्ट कर दिया कि ऐसी स्थिति में उनका सरकार चलाना संभव नहीं होगा. इसके बाद पार्टी के नेताओं ने उन्हें कोई भी फैसला लेने के लिए अधिकृत किया और कहा कि पार्टी की जो नीति रही है उससे अलग नहीं होना चाहिए.
इसके बाद राजभवन जाकर उन्होंने इस्तीफा दिया. इससे पहले लालू प्रसाद और कांग्रेस के बिहार प्रभारी सीपी जोशी से बातचीत भी की. कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी बातचीत की, लेकिन उनकी ओर से भी कोई रिस्पांश नहीं आया. आर्थिक अपराध इकाई की ओर से कार्रवाई के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अपनी क्षमता के अनुसार काम करती है. पांच करोड़ तक की संपत्ति जब्त करने का अधिकार है. इसे 10 करोड़ करने की लगातार मांग उठती रही है. कानून अपना काम करता है. सरकार किसी एक घटना पर काम नहीं करती है. न तो किसी को नाहक परेशान करती है.
महागठबंधन से अलग होने के सिवा नहीं था कोई विकल्प : मुख्यमंत्री ने कहा कि महागठबंधन से अलग होने के अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था. जब से मामला सामने आया था मुझ पर ब्लेम लग रहा था कि भ्रष्टाचार पर क्यों चुप हैं. हमारे पास दो तरह का ही रास्ता था.
या तो भ्रष्टाचार से समझौता करते या आलोचना झेलते. अगर इस मामले में कुछ नहीं करते तो हम पर ही दस तरह की बातें होती. हमने महागठबंधन सरकार में गठबंधन धर्म का पालन करने की पूरी कोशिश की है. भ्रष्टाचार के जो मामले आये उसकी चर्चा बिहार के बाहर भी होने लगी थी.
पहले से नहीं था सेटल, भाजपा शीर्ष नेतृत्व का आया था प्रस्ताव
धर्मनिरपेक्षता पर सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता तो विचार की चीज है. इसमें उन्हें किसी से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है. भाजपा के साथ जाने के फैसले को अल्पसंख्यकों ने भी सही ठहराया है. हम जुबान से कम अौर काम से ज्यादा बोलते हैं. धर्मनिरेपक्षता की बात करने वाले कुछ कर के दिखायें कि वह सिर्फ वोट के लिए बोलते हैं या फिर काम के लिए.
मंत्रियों ने विकास के काम में नहीं बरती कोताही
सीएम ने कहा कि महागठबंधन सरकार 20 महीने तक चली. इस दौरान मंत्रियों ने विकास के काम में कोई कोताही नहीं बरती. गवर्नेंस के इश्यू पर काम होता था, लेकिन नीचे के स्तर पर फोन चला जाता था. इस हस्तक्षेप से काम प्रभावित होता था. इस दौरान कानून से भी किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं किया गया.
सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि महागठबंधन से अलग होने और भाजपा के साथ सरकार बनाने का मामला पहले से सेटल नहीं था. इस्तीफा देने के बाद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का प्रस्ताव आया कि हम आपके साथ हैं.
उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्वीट भी आया. इस पर हमने अपने विधायक दल की बैठक में बात रखी. विधायकों ने भाजपा के साथ जाने पर सहमति जातायी तो हमने उन्हें इसकी जानकारी दी. इसके बाद जदयू और एनडीए विधानमंडल दल की बैठक हुई और नेता का चयन किया गया. इसके बाद राज्यपाल के अस्पताल से लौटने के बाद सरकार बनाने का दावा पेश किया गया और राज्यपाल ने निमंत्रण दिया. साथ ही दो दिनों के अंदर बहुमत साबित करने को कहा.
इसके बाद अगले दिन शपथ ग्रहण और उसके अलगे दिन विशेष सत्र बुलाकर बहुमत साबित किया गया. इसके बाद मंत्रिमंडल का विस्तार भी कर लिया गया और मंत्रियों को विभाग भी बांट दिये गये. उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ जाने का फैसला दूसरी तरह की परिस्थिति के बाद लिया गया था. नोट बंदी, जीएसटी से टेक्सेसन में पारदर्शिता आयेगी, दो नंबर कारोबार मुश्किल होगा और देश आगे बढ़ेगा.
गोपाल कृष्ण गांधी को वोट देगा जदयू : उन्होंने कहा जदयू उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी को वोट देगा. हमने पहले ही उन्हें वचन दे दिया है और इससे एनडीए को भी अवगत करा दिया है. उन्हें भी कोई आपत्ति नहीं है. यह फैसला महागठबंधन में रहते हुए ही लिया गया था.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के पक्ष में हमलोग थे, लेकिन सांसद शरद यादव विरोध कर रहे थे. बाद में बहुमत के आधार पर फैसला हुआ और रामनाथ कोविंद के पक्ष में वोट दिया गया. यह हमारे लिए गौरव की बात है.
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