बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम ज्यादा सशक्त : CM नीतीश

पटना : बिहार में लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम (आरटीपीजीआर) को लागू हुए पांच जून को एक वर्ष पूरे हो गये. पहली वर्षगांठ के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आरटीपीजीआर के तहत मामलों की सुनवाई में लगे जो पदाधिकारी बेहतर कार्य करेंगे, उन्हें उनका तीन साल का कार्यकाल पूरा होने पर च्वाइस […]
पटना : बिहार में लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम (आरटीपीजीआर) को लागू हुए पांच जून को एक वर्ष पूरे हो गये. पहली वर्षगांठ के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आरटीपीजीआर के तहत मामलों की सुनवाई में लगे जो पदाधिकारी बेहतर कार्य करेंगे, उन्हें उनका तीन साल का कार्यकाल पूरा होने पर च्वाइस पोस्टिंग मिलेगी. इसलिए इस कार्य में लगे सभी पदाधिकारियों से कहा कि वे अपना काम निष्ठा के साथ करते रहे.
हज भवन सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आरटीपीजीआर की सुनवाई के दौरान जिन विभाग की जिस दिन तारीख रहेगी, उस दौरान अगर संबंधित विभाग का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं होता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाये. इसके अलावा वर्तमान में सुनवाई के दौरान यह पाया जा रहा है कि एक मामले के निपटारे में औसतन छह सुनवाई तक का समय लग रहा है. इस संख्या अवधि को कम करते हुए दो सुनवाई तक करें. ताकि न्याय के लिए आने वाले गरीबों को ज्यादा परेशान नहीं होना पड़े. जिन मामलों में तथ्य या दम है, तो उस पर तत्काल फैसला दें. अन्यथा बेमतलब देरी नहीं करें. समस्या का समाधान ही सबसे बड़ा प्रचार है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां 10 साल तक लगातार जनता के दरबार में मुख्यमंत्री से लेकर तमाम अधिकारी अलग-अलग स्तर पर उपस्थिति होकर निरंतर मामलों की सुनवाई की. दूसरे राज्यों में लोग यहां से सीखकर गये, लेकिन इतने लंबे समय तक लगातार जनता दरबार नहीं लगा पाये. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के जनता दरबार में आने वाले कुल मामलों में 40-45 फीसदी मामलों का ही निपटारा हो पाता था. जबकि आरटीपीजीआर में पिछले एक साल के दौरान एक लाख 66 हजार मामले आये, जिसमें एक लाख 42 हजार का निपटारा हो चुका है. इतने मामलों का निपटारा सीएम जनता दरबार में भी नहीं हुआ था.
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