पटना जू हुआ हाईटेक,अब स्मार्ट तरीके से लें वाइल्डलाइफ का मजा

Updated at : 02 Apr 2026 1:29 PM (IST)
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Patna Zoo

संजय गांधी जैविक उद्यान

Patna News : पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान में अब घूमना पहले से कहीं ज्यादा आसान और रोचक हो गया है. जू प्रशासन ने गाइडेड टूर, वाई-फाई, मोबाइल ऐप और पेड़ों पर क्यूआर कोड जैसी डिजिटल सुविधाएं शुरू कर दी हैं, जिससे पर्यटकों को नया अनुभव मिल रहा है.

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Patna News : पटना का फेफड़ा कहे जाने वाले संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) का नजारा अब पूरी तरह बदल गया है. बुधवार से यहां ‘गाइडेड टूर’ की शुरुआत हो गई है, जिसने पहले ही दिन करीब 700 पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया.

अब जू घूमना केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक हाईटेक शैक्षणिक अनुभव बन गया है. पर्यावरण और वन्यजीव प्रेमियों के लिए जू प्रशासन ने तकनीक का ऐसा मेल तैयार किया है, जिससे लोग प्रकृति के और भी करीब महसूस करेंगे.

ई-वाहन पर गाइड के साथ सफर

जू भ्रमण को सुगम बनाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (ई-वाहन) के साथ प्रशिक्षित गाइड्स की तैनाती की गई है. पर्यटक अब गेट पर बने काउंटर से मामूली शुल्क देकर इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं. ये गाइड न केवल आपको जू की सैर कराएंगे, बल्कि रास्ते में मिलने वाले हर वन्यजीव और दुर्लभ वनस्पतियों के बारे में रोचक तथ्य भी साझा करेंगे.

जू परिसर में अब पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं. जैसे ही आप अपने मोबाइल से इसे स्कैन करेंगे, उस पेड़ की प्रजाति, आयु और उसके औषधीय गुणों की पूरी कुंडली आपके सामने खुल जाएगी.

जू एप- टिकट की लाइन से मुक्ति

पर्यटकों की सबसे बड़ी समस्या लंबी कतारों को देखते हुए अब ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा को बेहद सरल बना दिया गया है. जू के आधिकारिक मोबाइल एप और वेबसाइट के जरिए आप घर बैठे टिकट बुक कर सकते हैं. वयस्कों के लिए ₹50 और बच्चों के लिए ₹20 का टिकट तय किया गया है.

एप में एक विशेष ‘नेविगेशन फीचर’ भी जोड़ा गया है, जो आपको नक्शे की तरह गाइड करेगा कि आपका पसंदीदा जानवर जू के किस कोने में है. इसके अलावा, अगर भ्रमण के दौरान आपका कोई सामान खो जाता है, तो एप में मौजूद ‘खोया-पाया’ सेक्शन आपकी तुरंत मदद करेगा.

स्मार्ट सुविधाओं से लैस हुआ जू परिसर

डिजिटल इंडिया की झलक अब पटना जू में भी दिखेगी. पूरे परिसर में पर्यटकों के लिए हाई-स्पीड वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. जू निदेशक हेमंत पाटिल के अनुसार, यह एप इस तरह डिजाइन किया गया है कि जैसे ही आप किसी पिंजरे या बाड़े के पास पहुंचेंगे, आपके फोन पर उस जीव से संबंधित जानकारी ऑडियो और टेक्स्ट दोनों रूप में उपलब्ध हो जाएगी.

इससे बच्चों और छात्रों को वन्यजीव संरक्षण के बारे में सीखने में काफी मदद मिलेगी. अब पटना जू सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता डिजिटल म्यूजियम बन चुका है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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