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पटना बनेगा क्लीन सिटी, 53 करोड़ की लागत से हर सर्किल में बनेगा कचरा स्टेशन

Updated at : 17 Feb 2026 10:28 AM (IST)
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Patna News

सांकेतिक तस्वीर

Patna News: पटना में अब कचरा प्रबंधन केवल कूड़ा उठाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरी तरह वैज्ञानिक और हाईटेक तरीके से प्रोसेस किया जाएगा. पटना अंचल शहरवासियों जल्द को बदबू और गंदगी से बड़ी राहत मिलने वाली है.

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Patna News: पटना को कचरा मुक्त और सुंदर बनाने की दिशा में पटना नगर निगम ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है. शहर के सभी सर्किलों में अत्याधुनिक गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन (जीटीएस) बनाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है.

इस महायोजना के लिए निगम करीब 53 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश कर रहा है. यह प्रोजेक्ट राजधानी के शहरी ढांचे को स्मार्ट सिटी मॉडल की दिशा में आगे बढ़ाने वाला अहम कदम मानी जा रही है.

टेक्नोलॉजी से बदलेगा कचरे का सिस्टम

नए गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन सिर्फ कूड़ा जमा करने की जगह नहीं होंगे, बल्कि यहां कचरे का वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण, वजन मापन और प्रोसेसिंग की व्यवस्था होगी. विशाल शेड, ड्रेनेज सिस्टम, शौचालय, गार्ड रूम और धर्मकांटा जैसी सुविधाएं पारदर्शिता और स्वच्छता सुनिश्चित करेंगी. इससे हर दिन आने वाले कचरे की सटीक निगरानी संभव होगी और अनियंत्रित ढेर की समस्या कम होगी.

स्टेशनों पर आधुनिक कॉम्पैक्टर यूनिट, हुक लोडर और कैप्सूल कंटेनर लगाए जा रहे हैं. इन मशीनों की मदद से कचरे को तेजी से संकुचित कर ट्रांसपोर्ट किया जा सकेगा. डीजी सेट की व्यवस्था से लगातार बिजली व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, जिससे काम बिना रुकावट चलता रहेगा. इससे शहर में कचरा उठाने का समय घटेगा और अंतिम प्रोसेसिंग अधिक प्रभावी होगी.

सर्किल-वार तेजी से आगे बढ़ रहा निर्माण

परियोजना के तहत पटना सिटी में सबसे अधिक लगभग 13.97 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. बांकीपुर और पाटलिपुत्र अंचल में भी बड़े पैमाने पर निर्माण जारी है. यारपुर में काम लगभग 70 प्रतिशत पूरा हो चुका है और मशीन इंस्टॉलेशन शुरू होने वाला है.

स्टेशन चालू होते ही पुराने कचरा केंद्रों को वहां स्थानांतरित कर दिया जाएगा, जिससे खुले कचरे की समस्या समाप्त होगी.

बदबू से राहत, स्वच्छता रैंकिंग में सुधार की उम्मीद

नए स्टेशनों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि कचरे से निकलने वाला गंदा पानी सीधे ड्रेनेज सिस्टम में जाए और आसपास के इलाकों में बदबू न फैले. इससे न केवल नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि शहर की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने में भी मदद मिलेगी.

यह प्रोजेक्ट राजधानी को साफ-सुथरा, आधुनिक और रहने योग्य बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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