Patna News: पटना म्यूजियम की आर्ट गैलरियां होंगी डिजिटल, AI तकनीक से जान सकेंगे इतिहास

Patna Museum
Patna News: अब पटना म्यूजियम सिर्फ इतिहास देखने की जगह नहीं, बल्कि इतिहास को “जीने” का अनुभव देगा. AI आधारित चाणक्य होलोग्राम, इंटरएक्टिव गैलरियां और डिजिटल तकनीक के साथ पटना म्यूजियम पूरी तरह नए अवतार में सामने आने जा रहा है.
Patna News:पटना म्यूजियम को अब एक नया, आधुनिक और विश्वस्तरीय रूप देने की दिशा में कदम तेजी से बढ़ रहे हैं. बुधवार को पटना म्यूजियम के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये.
इस बैठक में जो प्रमुख निर्णय लिये गये, वे न केवल पटना म्यूजियम को नया रूप देंगे, बल्कि यह पर्यटकों के अनुभव को भी पूरी तरह से डिजिटल, इनोवेटिव और इंटरएक्टिव बनायेंगे.
एआई चाणक्य होलोग्राम बनेगा सबसे बड़ा आकर्षण
पटना म्यूजियम में आने वाले पर्यटक जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चाणक्य होलोग्राम से संवाद जैसा अनुभव कर पाएंगे. इसके लिए जिम्मेदार एजेंसी जल्द ही अपनी प्रेजेंटेशन देगी. मंजूरी मिलते ही इंस्टॉलेशन का काम शुरू कर दिया जाएगा. यह तकनीक बच्चों, युवाओं और शोधार्थियों के लिए इतिहास को समझने का सबसे रोचक माध्यम बनेगी.
आर्ट गैलरी बनेगी खास पहचान
महापंडित राहुल सांकृत्यायन और तिब्बतन आर्ट गैलरी को तीन खंडों में विकसित किया जा रहा है. पहले खंड में उनके केदारनाथ से राहुल बनने की यात्रा दिखाई जाएगी. दूसरे खंड में तिब्बत से लाई गई दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह होगा. तीसरे खंड में थंगका पेंटिंग्स का विशाल और दुर्लभ संग्रह प्रदर्शित किया जाएगा.
इसके साथ ही मेटल आर्ट गैलरी में रॉयल, नेपाली और वेस्टर्न मेटल आर्ट को जगह मिलेगी. पटना कलम गैलरी में इस विशिष्ट शैली की करीब 250 पेंटिंग्स प्रदर्शित की जाएंगी, जो बिहार की कला परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाएंगी.
राजेंद्र बाबू से लेकर सिक्कों के इतिहास तक की झलक
देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के जीवन पर आधारित एक विशेष गैलरी भी बनाई जा रही है, जिसमें उनसे जुड़े सात हजार से अधिक संग्रह और तस्वीरें होंगी.
मिक्स गैलरी में 1764 से 2000 तक के सिक्कों के इतिहास को दिखाया जाएगा, जो आर्थिक और राजनीतिक बदलावों की कहानी बयां करेगा.
30-31 जनवरी को होने वाली है वर्कशॉप
पटना म्यूजियम में दो दिवसीय पटना कलम को लेकर वर्कशॉप कराया जा रहा है. इसमें शहर के अलग-अलग शैक्षणिक संस्थानों के स्कूल और कॉलेज के बच्चे भाग लेंगे. कुल 140 स्टूडेंट्स इस वर्कशॉप का हिस्सा बनने जा रहे है. इन स्टूडेंट्स को पटना कलम शैली पर पिछले 25 सालों से कार्य कर रही स्मिता पराशर बारीकियां सीखाएंगी.
दो कैटेगरी में स्टूडेंट्स को बांटा गया है जिसमें पहला कैटेगरी कक्षा छठीं से लेकर दसवीं तक है. वहीं दूसरी कैटेगरी 11वीं से लेकर पीजी तक के स्टूडेंट्स को शामिल किया गया. एक ओर जहां लोग पटना कलम की प्रदर्शनी देखेंगे वहीं स्टूडेंट्स इसकी बारीकियों को सीखेंगे. विजेताओं को सम्मानित किया जायेगा.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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