पटना हॉस्टल कांड: गांव पहुंची CBI टीम, परिजनों ने नहीं खोला दरवाजा-20 मिनट इंतजार के बाद लौटी टीम

Updated at : 20 Mar 2026 11:37 AM (IST)
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Patna NEET Student Death Case

सांकेतिक तस्वीर

Patna NEET Student Death Case: क्या पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत का रहस्य कभी सुलझ पाएगा? जहानाबाद पहुंची सीबीआई की टीम को परिजनों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा. 'जांच का नतीजा शून्य'—आखिर क्यों न्याय की उम्मीद छोड़ रहे हैं पीड़ित?

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Patna NEET Student Death Case: पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम एक बार फिर जहानाबाद के रतनी स्थित पैतृक गांव पहुंची. लेकिन इस बार भी टीम को निराशा ही हाथ लगी.

परिजनों ने बातचीत से साफ इनकार कर दिया और घर में प्रवेश तक नहीं करने दिया, जिसके बाद टीम को बैरंग लौटना पड़ा.

परिजनों ने सीबीआई को घर में घुसने से रोका

पटना के चर्चित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच की आंच एक बार फिर जहानाबाद के पैतृक गांव तक पहुंच गई है. गुरुवार को डीएसपी विभा कुमारी के नेतृत्व में सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम छात्रा के गांव पहुंची.

सीबीआई की टीम करीब 20 मिनट तक छात्रा के घर के बाहर खड़ी रही, लेकिन परिजनों ने उन्हें घर के अंदर प्रवेश तक नहीं करने दिया. परिजनों का साफ कहना है कि कई बार की पूछताछ के बावजूद अब तक जांच किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है.

मां की हालत नाजुक

सीबीआई की टीम ने छात्रा की मां से बात करने की कोशिश की, ताकि केस से जुड़े कुछ अनसुलझे पहलुओं को समझा जा सके, लेकिन परिवार के सदस्यों ने इनकार कर दिया.

परिजनों ने बताया कि अपनी होनहार बेटी को खोने के गम में मां की मानसिक और शारीरिक स्थिति बेहद खराब है. वह रह-रहकर बेहोश हो जाती हैं और किसी भी तरह के सवाल-जवाब की स्थिति में नहीं हैं.

गांव से खाली हाथ लौटने के बाद सीबीआई की टीम शकूराबाद थाना पहुंची. इसके बाद टीम छात्रा के पिता के कार्यस्थल ‘प्लस टू प्रवेशिका विद्यालय शकूराबाद’ भी पहुंची, लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी क्योंकि पिता चंद मिनट पहले ही वहां से निकल चुके थे.

न्याय की डगर अब भी है पथरीली

सीबीआई इस मामले की तह तक जाने की कोशिश तो कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर परिजनों का सहयोग न मिलना और अब तक किसी बड़ी गिरफ्तारी या खुलासे का न होना केस को पेचीदा बना रहा है.

क्या यह आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई गहरी साजिश? इस सवाल का जवाब फिलहाल वक्त की परतों में दफन है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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