वायु प्रदूषण के बाद अब ध्वनि प्रदूषण की चपेट में पटना, आवासीय इलाकों में तय सीमा से अधिक

ध्वनि प्रदूषण के कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. इसके कारण सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, नींद की कमी, सुनने की क्षमता में कमी आने की शिकायत हो सकती है.
साकिब,पटना. पटना में ध्वनि प्रदूषण का स्तर लगातार चिंताजनक बनता जा रहा है. इस पर अंकुश नहीं लगा, तो आने वाले दिनों में शहर के लोगों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर देखने को मिलेगा. प्राप्त जानकारी के मुताबिक 2022 में पूरे साल पटना के आवासीय इलाके में ध्वनि प्रदूषण तय सीमा से अधिक रहा है. आवासीय इलाके के लिए ध्वनि की तय सीमा दिन में 55 डेसिबल है और रात में 45 डेसिबल. पटना के फुलवारीशरीफ इलाके में दिन में ध्वनि प्रदूषण का वार्षिक औसत 57.9 डेसिबल और रात का 52.8 डेसिबल रहा है. इस तरह इस क्षेत्र में 2022 में ध्वनि प्रदूषण तय सीमा से दिन में 2.9 डेसिबल और रात में 7.8 डेसिबल अधिक रहा है.
पाटलिपुत्र इंड्रस्ट्रियल एरिया में भी 2022 में ध्वनि प्रदूषण तय सीमा से ऊपर रहा. यहां ध्वनि प्रदूषण की तय सीमा दिन में 75 डेसिबल और रात में 70 डेसिबल है. लेकिन, इस इलाके में ध्वनि प्रदूषण का वार्षिक औसत दिन में 75.1 डेसिबल और रात में 71.9 रहा है.
तारामंडल इलाके से ध्वनि प्रदूषण कॉमर्शियल श्रेणी में दर्ज किया जाता है. यहां लगे ध्वनि प्रदूषण मापने की इकाई से प्राप्त जानकारी के मुताबिक वर्ष 2022 में यहां ध्वनि प्रदूषण का स्तर तय सीमा से थोड़ा ही कम रहा है. कॉमर्शियल इलाके के लिए ध्वनि की तय सीमा दिन में 65 डेसिबल और रात में 55 डेसिबल है. लेकिन, तारामंडल इलाके में ध्वनि का वार्षिक औसत दिन में 61.9 डेसिबल और रात में 54.7 डेसिबल रहा है.
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वाहनों का शोर
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लाउडस्पीकर का अधिक इस्तेमाल
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डीजे का बढ़ता प्रयोग
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इएनटी विशेषज्ञ डॉ शाहीन जफर ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण के कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. इसके कारण सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, नींद की कमी, सुनने की क्षमता में कमी आने की शिकायत हो सकती है. इसके साथ ही ध्वनि प्रदूषण के कारण टिनिटस भी हो सकता है, जिसमें मरीज को सिटी या झिंगूर की आवाज का अनुभव होता है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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