पटना एम्स के हुए 10 साल, डॉक्टरों की कमी के कारण कई सुपर स्पेशियलिटी विभाग हो रहे बंद
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 02 Aug 2022 11:50 AM
पटना एम्स की स्थापना इस उद्देश्य से की गयी थी कि यहां बिहार के मरीजों को सुपर स्पेशियलिटी इलाज की सुविधा मिलेगी. बिहार में मेडिकल के क्षेत्र में उच्च शिक्षा को तेजी से बढ़ावा मिलेगा, लेकिन पटना एम्स अपनी स्थापना के करीब 10 वर्ष बाद भी अपने उद्देश्यों में सफल होता नहीं दिख रहा है.
पटना. पटना एम्स की स्थापना इस उद्देश्य से की गयी थी कि यहां बिहार के मरीजों को सुपर स्पेशियलिटी इलाज की सुविधा मिलेगी. बिहार में मेडिकल के क्षेत्र में रिसर्च और सुपर स्पेशियलिटी से जुड़ी उच्च शिक्षा को तेजी से बढ़ावा मिलेगा, लेकिन पटना एम्स अपनी स्थापना के करीब 10 वर्ष बाद भी अपने उद्देश्यों में सफल होता नहीं दिख रहा है.
दरअसल, पटना एम्स की इन दिनों सबसे बड़ी समस्या सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टरों की भारी कमी है. डीएम और एमसीएच डिग्री वाले डॉक्टर यहां जरूरत से काफी कम हैं. इसका नतीजा है कि यहां सुपर स्पेशियलिटी विभाग मसलन नेफ्रोलॉजी व न्यूरोलॉजी काफी समय से बंद हैं, जबकि कार्डियोलॉजी विभाग के एकमात्र डॉक्टर भी एम्स छोड़ कर जा चुके हैं.
पटना एम्स में काफी इंतजार के बाद कोरोना काल में नेफ्रोलॉजी विभाग को खोला गया था. पीएमसीएच से एक डॉक्टर को यहां प्रतिनियुक्त किया गया था. करीब साढ़े 15 माह तक यह विभाग सिर्फ एक डॉक्टर के भरोसे चलता रहा. इसके बाद पीएमसीएच के डॉक्टर पिछले मार्च में लौट गये. इसके बाद मार्च सेयहां नेफ्रोलॉजी विभाग बंद पड़ा है. इसके कारण पूरे बिहार सेकिडनी के मरीज, जो यहां आकर इलाज कराना चाहते हैं, उन्हें हर दिन निराशा हो रही है.
पटना एम्स का न्यूरोलॉजी विभाग काफी समय तक एक डॉक्टर के भरोसे चलने के बाद अब बंद हो चुका है. इसमें कार्यरत डॉक्टर करीब दो वर्ष पहले ही पीएमसीएच ज्वाइन कर चुके हैं. उनके जाने के बाद पटना एम्स को अब तक इस विभाग के लिए कोई डॉक्टर नहीं मिल पाया है. इसके कारण न्यूरोलॉजी विभाग में भी मरीजों को सुपर स्पेशियलिटी इलाज नहीं मिल पा रहा है.
पटना एम्स में कॉर्डियोलॉजी विभाग लंबे समय से एकमात्र असिस्टेंट प्रोफेसर रैंक के डॉक्टर के भरोसे चल रहा था. लेकिन, जुलाई के अंत में उन्होंने भी यहां से इस्तीफा देकर मेदांता हॉस्पिटल, पटना में ज्वाइन कर लिया. अब एक अगस्त से यह विभाग भी विशेषज्ञ डॉक्टर विहीन हो गया. यह स्थिति तब है, जब हार्ट के मरीजों की संख्या राज्य में लगातार बढ़ रही है.
पटना एम्स की वेबसाइट के मुताबिक यहां मेडिकल अंकोलॉजी और सर्जिकल अंकोलॉजी दो अलग-अलग विभाग हैं, जिनमें सिर्फ एक-एक डॉक्टर हैं. मेडिकल अंकोलॉजी में एक असिस्टेंट प्रोफेसर रैंक के डॉक्टर हैं, जिन्हें ही विभाग का हेड बना दिया गया है. वेबसाइट के मुताबिक दोनों ही विभागों में फिलहाल ओपीडी नहीं चल रही है. ओपीडी सेवा बंद रहने से कैंसर मरीजों को परेशानी हो रही है. ऐसे मरीजों को अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है.
जानकारी के मुताबिक पटना एम्स एमसीएच व डीएम जैसी सुपर स्पेशियलिटी डिग्रीधारक डॉक्टरों को पसंद नहीं आ रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण निजी प्रैक्टिस से होने वाली लाखों की कमाई है. पटना एम्स के डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस करने की इजाजत नहीं होती है .ऐसे में पटना एम्स उन्हें आकर्षित नहीं कर पा रहा है. कई डॉक्टरों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अगर यहां काम करने का बेहतर माहौल दे, तो कई डॉक्टर इसमें आ सकते हैं. सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टरों की नियुक्ति की जटिल प्रक्रिया को आसान करने से वआकर्षक वेतन देने से डॉक्टरों की कमी दूर हो सकती है.
इस बारे में पटना एम्स के निदेशक डॉ गोपाल कृष्णा से बात करने की कोशिश की गयी. पर निदेशक के कार्यालय ने उनकी व्यस्तता का हवाला देकर उनसे बात कराने से इन्कार कर दिया गया.
पटना एम्स में गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग में सिर्फ एक डॉक्टर हैं. यह स्थिति तब है, जब राज्य में पेट और लिवर के मरीजों की बड़ी संख्या है. विभाग में डॉक्टर की कमी के कारण हर दिन मरीजों की लंबी लाइनें लगी रहती हैं. वहीं, सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग में सिर्फ दो डॉक्टर हैं. वहीं, यूरोलॉजी विभाग में भी सिर्फ दो डॉक्टर हैं, जो असिस्टेंट प्रोफेसर रैंक में हैं.
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