वायरल बुखार के मरीज बने पटना के अस्पतालों के लिए सिरदर्द, कौन सी कराएं जांच, डॉक्टर भी परेशान

पटना जिले में कोरोना के साथ अब वायरल बुखार और डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. शहर के सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है. वहीं, बीमारी की वजह पता करने के लिए कई-कई जांच करानी पड़ रही हैं.
पटना. पटना जिले में कोरोना के साथ अब वायरल बुखार और डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. शहर के सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है. वहीं, बीमारी की वजह पता करने के लिए कई-कई जांच करानी पड़ रही हैं. आम तौर पर बुखार-जुकाम और दर्द-थकान जैसे लक्षण डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू, टाइफाइड और कोरोना संक्रमण में नजर आते हैं.
ऐसे में डॉक्टर भी परेशान हैं कि एक तरह के मिलते-जुलते लक्षणों के आधार पर मरीज की कौन सी जांच करायी जाये. पीएमसीएच, आइजीआइएमएस, पटना एम्स, एनएमसीएच, गार्डिनर रोड के साथ-साथ प्राइवेट अस्पतालों में संबंधित लक्षण वाले मरीजों की संख्या अधिक देखने को मिल रही है.
डॉक्टरों का कहना है कि अगर सभी तरह की जांच कराएं, तो यह मरीजों की जेब पर भारी पड़ता है. इस तरह की समस्या सबसे अधिक प्राइवेट अस्पतालों में अधिक देखने को मिल रही है. ऐसे में डॉक्टर कोरोना, ब्लड व यूरिन कल्चर और डेंगू की एलाइजा जांच अधिक कराने पर जोर दे रहे हैं. संबंधित जांच में बीमारी पकड़ में आ जाती है तो ठीक, वरना अन्य पैथोलॉजी जांच करायी जा रही हैं. वहीं, वायरल बुखार से पीड़ित सबसे अधिक मरीज पीएमसीएच, एम्स और गार्डिनर रोड अस्पताल में पहुंच रहे है.
ओपीडी में इलाज के लिए आने वाले अधिकतर मरीजों में वायरल फीवर, शरीर में दर्द और थकान की शिकायत अधिक देखने को मिल रही है. इन्हें मच्छरजनित और कोरोना जांच की सलाह दी जा रही है. इस बारे में डॉक्टरों का कहना है कि वायरल और मच्छरजनित रोग सितंबर से नवंबर तक पीक पर होते हैं. ऐसे में लोगों को तीन महीने और सावधानी रखने की जरूरत है. साफसफाई, संतुलित खान-पान का ध्यान रखे.
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बीमारी बुखार
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सिरदर्द जोड़ों
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शरीर में दर्द उल्टी दस्त होना
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अत्यधिक कमजोरी थकान महसूस करना
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आइब्रप्रोफेन
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डिक्लोफेनेक
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एस्प्रिन
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डिस्प्रिन
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एसीक्लोफेने
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निमुस्लाइड
इन दिनों ओपीडी में वायरल बुखार से मिलते जुलते मरीजों की संख्या बढ़ गयी है. इसलिए किस मरीज का कौन सी पहले जांच करायी जाये, इसको लेकर थोड़ा कन्फ्यूजन हो रहा है. ऐसे मरीजों को पहले सीबीसी जांच व यूरिन कल्चर कराते हैं. अगर बीमारी का पता चल जायेगा तो ठीक, नहीं तो सेकेंड राउंड में विडाल व थर्ड राउंड में स्टूल व लिवर फंक्शन टेस्ट आदि जांच के बाद बीमारी को पकड़ कर ठीक किया जा रहा है.
– डॉ मनोज कुमार सिन्हा, अधीक्षक गार्डिनर रोड अस्पताल
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