सावन रहा सूखा-भादो भी रूठा ! किसानों की मेहनत पर मंडरा रहे संकट के बादल, खेतों में आयी दरारें

Updated at : 22 Aug 2022 3:21 AM (IST)
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सावन रहा सूखा-भादो भी रूठा ! किसानों की मेहनत पर मंडरा रहे संकट के बादल, खेतों में आयी दरारें

सुहाना कहे जाने वाले सावन ने पूरी तरह से सूखा रहा. किसानों को भादो से उम्मीद थी, तो वह भी रूठ गया है. 10 दिन बीतने के बाद भी वर्षा नहीं हुई. तल्ख धूप के चलते खेतों में बची-खुची नमी भी गायब हो रही है. संकट में फंसे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं.

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गोपालगंज: जुलाई के बाद अगस्त में भी इंद्रदेव पूरी तरह से रूठे हुए हैं. एक सप्ताह से बारिश का एक बूंद भी नहीं पड़ा है. बरसात के लिए प्रसिद्ध महीना भादो चल रहा है लेकिन भादो में बारिश की आफत की कौन कहे, चिलचिलाती धूप, खेतों में फटी दरार और सड़कों पर उड़ रही धूल किसानों की चिंता बढ़ा रही है. जुलाई के बाद अब अगस्त किसानों की आशा और उम्मीदों पर पानी फेर रहा है. खेतों में किसानों की मेहनत झुलस रही है, पानी की कमी से इसमें ग्रोथ और उत्पादन के आसार खत्म हो गये हैं.

बिन पानी सब सून !

अगस्त में 310 मिमी बारिश की जरूरत है, लेकिन अब तक महज 86.5 मिमी बारिश हुई है. एक माह से मॉनसून पूरी तरह दगा दे रहा है. ऐसे में किसानों की मेहनत पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. इससे उनके चेहरे पर मायूसी है. धान के पौधों में रौनक नहीं है, किसानों के चेहरे पर मायूसी है. जहां सुविधा है, वहां किसान पंपसेट से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन जहां सुविधा नहीं है, वहां भगवान का भरोसा है. सबसे ज्यादा किसानों की चिंता लागत पूंजी को लेकर है. यदि अब भी बारिश नहीं हुई, तो धान के उत्पादन में भारी कमी का आना लाजिमी है, जिसका कोई हल नहीं है.

संकट से जूझ रहे किसान

अन्नदाता अपनी फसल को पंपिंगसेट आदि साधनों से इस आस में बचाने में जुटे रहे कि भादो में वर्षा की धार फूटेगी और फसलों को नवजीवन मिल जायेगा. उम्मीदों से इतर भादो में भी सावन की तरह ही मौसम की बेरुखी दिख रही है. ऐसे में खेती-किसानी पर पूरी तरह से बर्बादी के बादल छा गये हैं. उनको सूझ नहीं रहा है कि क्या करें, कैसे अपनी गाढ़ी कमाई बचाएं. उदंत राय के बंगरा के किसान अर्जुन सिंह के कहते हैं कि अब तो एक-एक दिन पहाड़ की तरह कट रहा है, केवल फसल की चिंता सता रही है. खेतों में दम तोड़ती फसलों को देखकर मन रो रहा है.

निवाले पर संकट

वहीं, खरहरवां के सत्येंद्र सिंह कहते हैं कि हाल यही रहा, तो निवाले पर संकट आ जायेगा. घर-गृहस्थी अस्त-व्यस्त हो जायेगी. अभिषेक तिवारी कहते हैं कि किसी तरह पंपिंग सेट का सहारा लेकर फसल को यहां तक खींचकर लाये हैं, अब लग रहा है कि फसल बच नहीं पायेगी. हमारी गाढ़ी कमाई डूब जायेगी.

एक नजर में अगस्त की बारिश पर

  • अगस्त माह में आवश्यक बारिश – 310.3 मिमी

  • अब तक इस अगस्त माह में बारिश – 86.5 मिमी

  • वर्ष 2021 में अगस्त में बारिश – 328.5 मिमी

  • वर्ष 2020 में अगस्त में बारिश – 171.7 मिमी

  • वर्ष 2019 में अगस्त में बारिश – 109.3 मिमी

  • वर्ष 2018 में अगस्त में बारिश – 317.2 मिमी

  • वर्ष 2017 में अगस्त में बारिश – 153.7 मिमी

  • वर्ष 2016 में अगस्त में बारिश – 61.8 मिमी

  • वर्ष 2015 में अगस्त में बारिश – 292.0 मिमी

  • वर्ष 2014 में अगस्त में बारिश – 376.9 मिमी

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