ऑपरेशन बुलडोजर : मजदूरी के पैसे से खरीदी नेपाली नगर में छह धूर जमीन, अब चार बच्चों को लेकर कहां जाएं
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 05 Jul 2022 6:50 AM
आंखों में आंसू और माथे में पर चिंता की लकीरें...जब रो रही महिला प्रीतम प्रजापति से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मजदूरी के पैसे से मनखुश के पापा ने 2015 में छह धूर जमीन खरीदी थी भइया...इसे भी खाली करने को बड़े साहेब ने कहा है.
पटना. आंखों में आंसू और माथे में पर चिंता की लकीरें…जब रो रही महिला प्रीतम प्रजापति से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मजदूरी के पैसे से मनखुश के पापा ने 2015 में छह धूर जमीन खरीदी थी भइया…इसे भी खाली करने को बड़े साहेब ने कहा है. अब चार बच्चों को लेकर कहां जाएं… बताइए अब तो मरने के सिवा कोई चारा नहीं. प्रजापति के चार बच्चे हैं- मनखुश, दिलखुश, मुस्कान और अंकुर. पति राजकुमार पंडित मजदूरी कर घर चलाते हैं. प्रीतम ने कहा, कम दाम में पटना में जमीन मिल रही थी, तो वह गांव की जमीन बेच पटना में छह धूर जमीन खरीद ली. जमीन खरीदने के बाद कर्ज लेकर इस पर मकान बनाया.
जमीन खरीदी, घर बनाया और जब रहने लगे, तो कहते हैं कि यह मकान सरकारी जमीन पर बनाया गया है. यह सही नहीं है सर…यह तो लोगों के साथ बर्बरता है. ये बातें गया की रहने वाले प्रीति कुमारी ने कहीं. उन्होंने बताया कि 2019 में मैंने यह जमीन यहीं के किसान से खरीदी, जो यहां किसानी करते थे. लक्ष्मीनिया देवी से मैंने 2019 में जमीन खरीदी, तब तक यहां किसी ने नहीं कहा कि यह जमीन आवास बोर्ड की है और अवैध है. अब जब मकान बना कर रह रहे हैं, तो एकाएक आदेश दिया गया कि मकान खाली कर लें.
दीघा के विधायक संजीव चौरसिया ने सोमवार को नेपाली नगर मामले में कहा कि बिना सरकार की प्लानिंग स्पष्ट किये इस तरह की कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं है. मैं बिहार सरकार से इसे तुरंत रोकने की मांग करता हूं. सोमवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि जिन निर्दोष लोगों पर कार्रवाई की गयी है व गिरफ्तार किया गया है, उन्हें तुरंत छोड़ा जाये. 201 में दीघा अधिनियम की नियमावली आयी थी, जिसमें मुआवजा व पुनर्वास की बात थी, उसे भी दरकिनार किया गया.
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