ऑपरेशन बुलडोजर : हाइकोर्ट में मामले के निबटारे तक नहीं टूटेंगे नेपाली नगर के मकान
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 07 Jul 2022 6:30 AM
पटना हाइकोर्ट ने राजीव नगर के नेपाली नगर में वहां के निवासियों द्वारा आवास बोर्ड की जमीन पर किये गये अवैध कब्जा को नहीं तोड़ने संबंधी अपने पूर्व के आदेश को बरकरार रखा है. कोर्ट ने सरकार को कहा कि इस याचिका के निबटारा होने तक इस मामले में वहां यथास्थिति बरकरार रखी जाये.
पटना. पटना हाइकोर्ट ने राजीव नगर के नेपाली नगर में वहां के निवासियों द्वारा आवास बोर्ड की जमीन पर किये गये अवैध कब्जा को नहीं तोड़ने संबंधी अपने पूर्व के आदेश को बरकरार रखा है. कोर्ट ने सरकार को कहा कि इस याचिका के निबटारा होने तक इस मामले में वहां यथास्थिति बरकरार रखी जाये. कोर्ट ने जिला प्रशासन से कहा कि नेपाली नगर के जिस इलाके की जमीन पर बने मकान को अवैध अतिक्रमण के नाम पर तोड़ा गया है और उसमें रहने वाले वहां अब भी रह हैं, तो उन्हें अभी नहीं हटाया जाये. साथ ही उन्हें जरूरत के अनुसार पानी व बिजली की सुविधा जो समाप्त कर दी गयी है, उसे तत्काल अगले आदेश तक उपलब्ध करा दिया जाये.
कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यह सुविधा उन्हें अभी इस लिए मुहैया करायी जा रही है, ताकि उन्हें इस बरसात के मौसम में वहां कोई परेशानी नहीं हो. इस सुविधा को दिये जाने का मतलब यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि वे किसी अधिकार का दावा करेंगे. न्यायाधीश संदीप कुमार की एकलपीठ ने गजेन्द्र कुमार सिंह एवं अन्य द्वारा याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी. उस दिन पटना के डीएम, पटना सदर के सीओ, हाउसिंग बोर्ड के एमडी व एस्टेट ऑफिसर को कोर्टमें उपस्थित रहना होगा.
कोर्ट ने कहा कि अगर गैर कानूनी तरीके से मकान बना रहा था, तो राजीव नगर थाना और आवास बोर्ड के संबंधित अधिकारी जिनकी प्रतिनियुक्ति वहां थी वे क्या कर रहे थे. याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता बसंत कुमार चौधरी, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता के साथ ही सरकारी अधिवक्ता किंकर कुमार, आवास बोर्ड के अब्बास हैदर उपस्थित थे.
कोर्ट ने हाउसिंग बोर्ड के क्रियाकलापों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनके अधिकारियों और पुलिस की मिली भगत से यह अतिक्रमण हुआ है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आवास बोर्ड और पुलिस के वे संबंधित सभी पदाधिकारी जिनके क्षेत्र में यह इलाका आता है, उन पर करवाई जरूर की जायेगी. कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो इसकी जांच किसी भी निष्पक्ष एजेंसी से भी कराई जा सकती है.
कोर्ट ने कहा कि वहां मकान बनाकर रह रहे लोगों को बिना व्यक्तिगत नोटिस दिये रविवार के दिन ही यह कार्रवाई क्यों की गयी. कोर्ट ने कहा-क्या उस दिन कोई कार्यालय खुला रहता है. आखिर क्या जरूरत आ पड़ी कि यह कार्य रविवार को ही किया गया. कोर्ट ने महाधिवक्ता से जानना चाहा कि क्यापब्लिक का कोई जरूरी काम रविवार को कार्यालय में किया जायेगा. क्या प्रशासन रविवार को काम करता है.कोर्ट का कहना था कि प्रत्येक व्यक्ति को नोटिस जारी कर उन्हें सुन कर और जानकारी देकर कानूनी तरीके से यह कार्रवाई की जाती तो, किसी को यह आरोप लगाने का मौका ही नहीं मिलता कि सरकार ने गैरकानूनी तरीके से मकान तोड़ा है.
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पिछले 25 साल में कौनकौन रहे आवास बोर्ड के एमडी, राजीव नगर क्षेत्र की देखरेख करने वाले स्टेट ऑफिसर व थाने में पुलिस अफसर, उनकी सूची नाम- पता सहित दें
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नेपाली नगर में कितनी जमीन पर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई है.
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कितनी जमीन पर अवैध कब्जा है. कितनी जमीन पर से अतिक्रमण उस दिन हटाया गया Â जिनके मकान तोड़े गये, क्या उन्हें नोटिस दिया था
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जिस मजिस्ट्रेट की निगरानी में यह कार्रवाई की जा रही थी उसने दो मकानों को क्यों नही तोड़ा, जबकि उसके बगल के मकान को तोड़ दिया गया.
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निराला कोऑपरेटिव या अन्य कोऑपरेटिव के खिलाफ दर्जप्राथमिकी की पूरी जानकारी उपलब्ध करायी जाए.
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि 20 एकड़ जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया, विधि विभाग से पत्र आया था कि पटना हाइकोर्ट के न्यायाधीशों के आवास का निर्माण करने के लिए चिन्हित 20 एकड़ जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराना है. वाद चला सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया गया. सुनवाई भी हुई. जमीन को खाली नहीं किया गया तो कार्रवाई की गयी.
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