बरेव गांव में मुगलकाल से मां काली की होती है पूजा-अर्चना
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 02 Nov 2024 4:41 PM
मां काली भक्तों की मन्नतें करतीं है पूरी
अकबरपुर. प्रखंड के बरेव गांव में गोविंदपुर- बरेव मुख्य मार्ग पर स्थित मां काली मंदिर से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था जुड़ी है. मंदिर का इतिहास मुगलकाल से ही है. ग्रामीण बिंदा सिंह पूर्व मुखिया बताते हैं कि यहां के पूर्वज मुगलकाल से मां काली की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि कार्तिक मास की अमावस्या के दिन शक्ति की अष्टधात्री माता काली की प्रतिमा स्थापना कर हर वर्ष दिवाली के अवसर पर की जाती है. इस मंदिर पर लोगों का अटूट विश्वास है. यह आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां जो सच्चे मन से मन्नते मांगते हैं, उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है. प्रत्येक वर्ष इस पूजा के अवसर पर जिनकी मनोकामना पूरी हो जाती है, वह यहां आकर पूजा- अर्चना करते हैं. पुत्र प्राप्ति के बाद उनका मुंडन भी यहां करवाते हैं. पूजा के दौरान यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किये जाते हैं. इसमें बड़ी संख्या में लोगों के यहां उपस्थित होकर संस्कृति कार्यक्रम का मनोरंजन का लुत्फ उठाते हैं. खासकर यहां दोनों समुदाय के लोग आकर एक साथ संस्कृति कार्यक्रम का आनंद उठाते हैं. ग्रामीण सूरज सिंह, जयराम सिंह, मुसाफिर सिंह, रामचंद्र मिश्र, विष्णु भक्त, कृष्ण साव, बबन सिंह आदि का कहना है कि हमारे पूर्वजों का कहना है कि यहां मां काली के पूजा मुगलकाल से ही की जा रही है, जो आज तक चलती रही है. इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मुखिया अभिमन्यु कुमार, पूर्व मुखिया संतोष कुमार, तपेश्वर सिंह, बॉबी सिंह व सभी ग्रामीण मिलजुल कर सहयोग करते हैं.
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